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हिंदी दिवस विशेष : इन्हें भारत आने के बाद हिन्दी से ही हो गया प्यार ! बड़ी रोचक है इनकी कहानी


  • दो चीनी लड़कियों ने बदल लिया अपना नाम, उन्हें हिन्दी में दिखता है अपना भविष्य

देवेश तिवारी की स्पेशल रिपोर्ट

‘हिन्दी को छोड़कर तो मैं और कहीं नहीं जाऊंगी” ये किसी भारतीय लड़की के शब्द नहीं बल्कि रूस की ओल्गा का हैं । ओल्गा हिन्दी बेहतर तरीके से बोल लेती है. ओल्गा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिंदी में एमए की द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। इससे पहले वो दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दू कॉलेज से हिंदी में स्नातक कर चुकी हैं। भारत आने से पहले रूस में अपने विश्वविद्यालय में रामायण और महाभारत पढ़ने के बाद ओल्गा ने हिंदी और भारत में अपने भविष्य का सफर तय कर लिया था। (Hindi diwas Speech, Bhashan, Nibandh for student, Teacher )

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इसी विश्वविद्यालय में चीन की दो लड़कियां हिंदी में स्नातक कर रही हैं। दोनों को हिंदी से इतना लगाव हुआ कि उन्होंने अपना नाम भी हिन्दुस्तानी नाम की तरह कर लिया. इनमें से एक रेखा बताती हैं, “मुझे लगता है कि चीन और भारत में संबंद्ध प्रगाढ़ होने वाले हैं इसलिए मुझे लगा की हिंदी सीखना मेरे लिए अच्छा होगा। इनकी साथी वर्षा कहती हैं, “मुझे बॉलीवुड बहुत पसंद हैं।” इन्होंने हिंदी के दो गाने भी सुनाए।

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‘काम के लिए हिंदी’

लेकिन भारत में हिंदी सीख रहा बड़ा विदेशी तबका ऐसा है जो उच्च शिक्षा या करियर के तौर पर हिंदी का चयन नहीं करता बल्कि अपने काम के लिए, कुछ समय के लिए हिंदी सीख रहा है। भारत में लोगों को लगता है कि हिंदी का विस्तार रुका है लेकिन पूरे विश्व से आए आंकड़े बताते हैं कि हिंदी का विस्तार बढ़ा है। यह कहना है दिल्ली के मालवीय नगर में विदेशी छात्रों को हिंदी पढ़ाने वाले संस्थान ‘हिंदी गुरु’ के संथापक चंद्रभूषण का। इस संस्थान में लगभग 32 देशों से विद्यार्थी हिंदी सीख रहे हैं। एक इमारत के तल में हिंदी के विस्तार के नए प्रयोग किए जा रहे हैं।

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चंद्रभूषण बताते हैं, “जो लोग हिंदी सीखने आते हैं उनमें बहुत से लोग किसी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं, कुछ मीडिया के लोग हैं जो भारत में फिल्में बनाना चाहते हैं, कुछ संगीतकार हैं जो हिंदी या संस्कृत के शब्द अपने गानों में डाल कर रीमिक्स करना चाहते हैं और कुछ अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा के क्रू मेंबर हैं।” उन्होंने बताया, “भारत में काम कर रहे विदेशी राजदूत और बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के विदेशी कर्मचारी और भारत में शोध कार्यों के लिए आने वाले लोग भी पहले हिंदी सीखने चाहते हैं।”

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वह कहते हैं, “जब हमने शुरुआत की थी तब इतने लोग नहीं थे लेकिन पिछले पांच-छह सालों में यह संख्या बढ़ी है।” इसी संस्थान में पढ़ने वाले एड्म जाधव जिन्होंने एक भारतीय लड़की से शादी की है। उनका कहना है, “ससुराल वालों से बात करने के लिए हिंदी सीखना बहुत ज़रूरी है।”

‘बढ़ता जा रहा है बाजार’

दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर सुधीश पचौरी कहते हैं, “काफी बड़ी तादाद में विदेशी विद्यार्थी हिंदी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। हिंदी एक बड़ा बाजार बना हुआ है। हिंदी सीखने के लिए बाहर से लोग आना चाहते हैं। मुझे लगता है कि ब्लॉग ने और फेसबुक ने हिंदी का विस्तार किया है।”

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चंद्रभूषण का कहना है, “हिंदी उन लोगों के लिए एक जुनून की तरह होती है। मैंने जापानी लोगों के बिजनेस कार्ड पर हिंदी में लिखा हुआ नाम देखा है।” विदेशी विद्यार्थियों को हिंदी सिखाने में आने वाली समस्याओं के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “उनकी इच्छा यह होती है कि जल्दी से जल्दी लोगों से बात कर सकें और लोगों से घुल मिल सकें, उन्हें हिंदी सिखाते हुए मैं, मैंने और मुझे का अंतर स्पष्ट करना मुश्किल होता है। कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं, जैसे लगना, मुझे लगा या मुझे चोट लग गई, साथ ही स्त्री लिंग और पुल्लिंग का भेद भी समझाना मुश्किल हो जाता है।”

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“जापानी लोग हिंदी सीखते हुए ‘र’ को हमेशा ‘ल’ बोलते हैं, और जर्मन लोग ‘ज’ को ‘य’ बोलते हैं”

हिंदी सिखाने के लिए संकेत की भाषा का भी खूब प्रयोग होता है। कक्षा में अर्थ बताने के लिए अभिनय का सहारा लेना पड़ता है साथ ही ऑडियो- विजुअल माध्यम की भी सहायता ली जाती है। जिस देश के विद्यार्थी को समझाना है अगर उस देश की भाषा शिक्षक को आती हो तो अपनी बात आसानी से समझाई जा सकती है।

(लेखक पोल टॉक में इंटर्नशिप कर रहे हैं ) |


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पोल टॉक और PollTalk.In के सम्पादक संतोष कुमार पांडेय देश के कई शहरों में पत्रकारिता कर चुके हैं। ये शहर जो कार्यस्थल बने वाराणसी , लखनऊ, आगरा, देहरादून, नोएडा, जयपुर, बिहार, हैदराबाद, पानीपत, सतना में रहे हैं। इन संस्थानों में दी सेवाएं राजस्थान पत्रिका , दैनिक भास्कर, एग्रो भास्कर, हिन्दुस्थान, जनसन्देश न्यूज़ चैनल, जनसन्देश टाइम्स, ईटीवी भारत में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किये. राजनीति की सही जानकारी और कुछ रोचक इन्टरव्यू दिखाना प्राथमिकता है।

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