Akhilesh vs Shivpal: शिवपाल यादव और अखिलेश में चली आ रही है बड़े कद की लड़ाई !

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  • 2016 में लखनऊ में मचा था बवाल अखिलेश पर शिवपाल ने की थी कार्रवाई
  • अखिलेश और शिवपाल में अभी भी चल रही है ‘कद’ की लड़ाई

पोल टॉक नेटवर्क | लखनऊ

उत्तर प्रदेश विधानसभा (UP vidhan sabha chunav) चुनाव में चाचा-भतीजे यानी अखिलेश यादव (Akhilesh yadav) और शिवपाल यादव (shivpal singh yadav) 6 साल बाद भले की एक ही साथ नजर मिलकर चुनाव लड़ें हों लेकिन 6 साल पहले छिड़ी तकरार आज भी जारी है। दोनों में अभी भी बड़े कद की लड़ाई जारी है। इसी का नतीजा है रह रहकर तकरार दिख जाती है. विधानसभा चुनाव होने के बाद लगातार शिवपाल सिंह यादव के बगावती तेवर देखें जा रहें हैं। हालांकि, बीते 6 सालों के बीच राजनीतिक संबंध अच्छे न होने के चलते अखिलेश-शिवपाल की मुलाकात केवल शादी विवाह या पारिवारिक कार्यक्रमों में ही हुई है। दोनों के बीच राजनीतिक लकीर खींचने की वजह बना अखिलेश यादव का सपा से निष्कासित होना।

साल 2016 में जब सभी राजनीतिक दल 2017 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हुए थे तब विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित सपा मुख्यालय पर अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के समर्थक आमने सामने थे। 2016 में समाजवादी पार्टी पर कब्जे को लेकर दोनों नेताओं के बीच खींचतान मची हुई थी।

2017 के विधानसभा चुनाव से पहले एक टाइम ऐसा आया जब अखिलेश यादव के खेमे ने चाचा शिवपाल यादव के साथ अंबिका चौधरी, नारद राय, शादाब फातिमा, ओमप्रकाश सिंह और गायत्री प्रजापति को मंत्रिमंडल से निकाल दिया था। मंत्रिमंडल से निकले जाने के बाद दोनों खेमों के बीच खींचतान और बढ़ गयी। शिवपाल यादव जोकि तब मुलायम सिंह यादव के करीबी थे। मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद सपा के तत्कालीन मुखिया मुलायम सिंह यादव से पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव और प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव को छह साल के लिए पार्टी से निकालने का आदेश जारी करा दिया था।

मुलायम सिंह यादव ने सपा कार्यालय पर प्रेस वार्ता कर दोनों के दोनों के निष्कासन का ऐलान किया था। तब उन्होंने कहा था कि रामगोपाल ने मुझे बिना बताए बुलाया पार्टी सम्मेलन, जो कि असंवैधानिक है। सिर्फ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को ही पार्टी सम्मेलन बुलाने का हक़ है। पार्टी सम्मेलन बुलाकर रामगोपाल ने मुझपर अब सीधा हमला किया है। जो पार्टी सदस्य और कार्यकर्ता रामगोपाल के बुलाए सम्मेलन में शामिल होगा, उसे भी पार्टी से निकाला जाएगा। तब मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाते हुए था कि यूपी के मुख्यमंत्री गुटबाजी कर रहे थे यह उनकी सज़ा है। मुलायम सिंह यादव के इस एक्शन के बाद दोनों नेताओं के बीच तकरार और बढ़ गयी जिसका नतीजा ये हुआ कि  समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं से भरे परिसर में मंच पर अखिलेश-शिवपाल के बीच जो खींचतान हुई थी।

मुलायम सिंह को संविधान नहीं पता है 

अखिलेश यादव के सबसे करीबी रामगोपाल यादव ने पार्टी से निकाले जाने के बाद कहा था, ”आधे घंटे के अंदर हमें पार्टी से निकाल दिया। बिना जवाब सुने और दूसरा पक्ष लिए। किसी के खिलाफ़ ऐसे कार्रवाई नहीं की जाती। नोटिस दिया और बिना जवाब लिए ही पार्टी से निकाल दिया। न्यायिक नियम के मुताबिक़ बिना दूसरे पक्ष को सुने पार्टी से नहीं निकाला जा सकता है। इस पार्टी में शीर्ष स्तर से लगातार असंवैधानिक काम काम हो रहे हैं। यदि पार्टी प्रमुख असंवैधानिक काम करे, तो सम्मेलन कौन बुलाएगा? संसदीय बोर्ड की एक भी बैठक नहीं हुई और सारे पार्टी उम्मीवारों की सूची तय कर दी गई।  हमने आपातकालीन मीटिंग बुलाई थी। नेताजी को पार्टी का संविधान पता नहीं है। हमारा सम्मेलन पूरी तरह से वैध था।”

हालांकि पार्टी ने निकाले जाने के बाद अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता कर रुंधे गले से सीएम पद छोड़ने का ऐलान तक कर दिया था। अखिलेश यादव 2017 के चुनाव में टिकट बंटवारा करना चाहते थे लेकिन प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते शिवपाल सिंह यादव टिकटों का बंटवारा कर रहे थे। इसी विवाद को लेकर चल रही कलह के बीच पार्टी कार्यालय में मुलायम सिंह यादव ने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित किया। पार्टी कार्यालय में मुलायम सिंह यादव का भाषण शिवपाल के पक्ष में था। अखिलेश यादव को लेकर मुलायम सिंह यादव ने पार्टी के नौजवान नेताओं पर रास्ता भटकने का आरोप लगाया था। हालांकि, चाचा शिवपाल सिंह यादव और भतीजे अखिलेश यादव के बीच तकरार जारी रही और शिवपाल यादव ने 2018 में नई पार्टी की घोषणा कर दी।


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