एक्सक्लूसिव : निर्भया के दोषियों को मिली फांसी और 92 वें दिन टूटा अन्ना का मौन आन्दोलन!

निर्भया मामले को लेकर अन्ना थे आंदोलित !

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रालेगण सिद्दी, तालुका पारनेर, अहमदनगर में यादव बाबा के मन्दिर में बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे !

Nirbhaya Case Justice : निर्भया केस में उसके चार दोषियों को फांसी होने में 7 साल से अधिक समय लग गया. लेकिन हर समय निर्भया की मां आशा देवी न्याय की गुहार लगाती रही. हर तरह की मदद मांगती रही और उन्हें उम्मीद था एक दिन सफलता मिलेगी. 20 मार्च की वो सुबह आई जब चारों दोषियों को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया. मगर दिल्ली से सैकड़ों किमी दूर महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में रालेगण सिद्दी के तालुका पारनेर में अपने गाँव के यादव बाबा मंदिर में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे 92 दिन से मौन व्रत पर थे. जानिए अन्ना हजारे ने ऐसा क्यों किया ! पढ़िए पोलटॉक की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट:

रालेगण सिद्दी, तालुका पारनेर, अहमदनगर में यादव बाबा के मन्दिर में बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे !

निर्भया मामले में देरी से थे नाराज!

निर्भया की घटना २०१२ में दिल्ली में घटी. तभी से आज तक पूरे देश को उम्मीद थी कि जल्द ही इसपर फैसला आ जाएगा. फैसला आया फांसी का भी देने में देरी होने लगी. इसका सभी अपने-अपने तरीके से विरोध जता रहे थे. जब दो बार फांसी की डेट आने के बाद भी फांसी नहीं हुई तो लोगों में गुस्सा बढने लगा. इसी कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने मौन आन्दोलन का ठान लिया. उन्होंने 20 दिसम्बर को मौन आन्दोलन शुरू किया. उनकी मांग थी जबतक निर्भया के दोषियों को फांसी नहीं हो जाएगी तबतक मैं मौन आन्दोलन पर रहूंगा.

रालेगण सिद्दी, तालुका पारनेर, अहमदनगर में यादव बाबा के मन्दिर में बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे !

9 दिसम्बर को लिखा था पीएम को लेटर!

अन्ना ने भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी को एक लेटर लिखा था. 09 दिसम्बर को उन्होंने अपने लेटर में लिखा था कि दिल्ली के २०१३ के निर्भया मामले में फांसी की सजा सुनाई गई लेकिन 7 साल बाद भी कार्रवाई नहीं हुई. इसीलिए देश की जनता हैदरबाद की एनकाउन्टर की घटना का स्वागत कर रही है.

निर्भया फंड खर्च नहीं हो रहा

अन्ना ने पत्र में लिखा है कि नाबालिग बेटियों पर अत्याचार बढ़ता जा रहा है. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी लिखा है कि देश में निर्भया फंड का भी सही और पूरा इस्तेमाल नहीं हो रहा है. १०९१ महिला हेल्प लाइन का भी ठीक से उपयोग नहीं हो रहा है. फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में 6 लाख से अधिक मामले लंबित हैं.

जनता के साथ अन्याय

महिलाओं को पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराने में परेशानी हो रही है. जनता को न्याय मिलने में अगर देरी होगी तो वह जनता पर अन्याय है. इन्हीं सभी बातों को लेकर अन्ना मौन आंदोलन पर बैठ गये थे.

अन्ना हजारे के सहयोगी अमोल झेंडे से ये बातचीत पर आधारित खबर हैं. जोरालेगण सिद्दी के तालुका पारनेर अहमदनगर महाराष्ट्र में रहते हैं.


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