आखिर भाजपा की सरकार में ही क्यों होते है बड़े एनकाउंटर ?

उत्तर प्रदेश का गैंगस्टर विकास दूबे एनकाउंटर में मारा गया. लेकिन कई सारे सवाल खड़े हो रहे हैं. विकास दुबे को मारने पर लोगों का कोई सवाल नहीं है लेकिन पुलिस के तरीके पर सवाल हैं. आइये आपको बताते हैं देश का पहला एनकाउंटर कब हुआ था. और वो तीन एनकाउंटर जो चर्चा में बने रहे. 

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विकास दुबे, श्रीप्रकाश शुक्ला और आन्नद पाल .
विकास दुबे, श्रीप्रकाश शुक्ला और आन्नद पाल .

  • देश का पहला एनकाउंटर 1982 में मुंबई में हुआ था
  • राजस्थान में आनंद्पाल एनकाउंटर पर हुआ था बवाल
  • यूपी में श्रीप्रकाश शुक्ला का था बड़ा एनकाउंटर

संतोष कुमार पाण्डेय | सम्पादक

उत्तर प्रदेश का गैंगस्टर विकास दूबे एनकाउंटर में मारा गया. लेकिन कई सारे सवाल खड़े हो रहे हैं. विकास दुबे को मारने पर लोगों का कोई सवाल नहीं है लेकिन पुलिस के तरीके पर सवाल हैं. आइये आपको बताते हैं देश का पहला एनकाउंटर कब हुआ था. और वो तीन एनकाउंटर जो चर्चा में बने रहे. 

देश का पहला एनकाउंटर 11 जनवरी 1982 को मुंबई में हुआ था. ये एनकाउंटर मुंबई के वडाला कॉलेज में हुआ था. जब स्पेशल टीम ने गैंगस्टर मान्या सुर्वे को छह गोलियां मारी थीं. कहा जाता है कि देश को आजादी मिलने के बाद ये पहला एनकाउंटर था, जिसकी काफी चर्चा हुई थी. इस दौरान महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री थे एआर अंतुले. मगर हम आपको भाजपा शासन में तीन बड़े एनकाउंटर को बताने जा रहे हैं. आखिर भाजपा के साशन में एनकाउंटर क्यों होते हैं ? जानिए पूरी कहानी.

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कल्याण सिंह की सरकार में श्रीप्रकाश शुक्ला का अंत

उत्तर प्रदेश में श्रीप्रकाश शुक्ला गैंग का कहर जारी जारी था. यूपी और बिहार दोनों राज्यों में श्रीप्रकाश शुक्ला का चल रहा था. वर्ष 1993 में श्रीप्रकाश शुक्ला अपराध की दुनिया में आया था. लेकिन भाजपा की कल्याण सिंह सरकार के लिए मुश्किल बढ़ गई थी. 1998 में उसने बिहार सरकार में मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की उनके सुरक्षाकर्मियों के सामने हत्या कर दी। इसके बाद उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी ले ली. लेकिन उसे 4 मई 1998 में पुलिस ने मार गिराया था. जिसकी चर्चा अभी तक होती है.

वसुंधरा की सरकार में आनन्दपाल का अंत…

साल 1992 में आनंदपाल सिंह की शादी की बिन्दौरी को कुछ दबंगों ने रुकवा दी थी और पथराव भी किया। गांव के दबंग लोगों ने आनंदपाल सिंह के पिता को दूल्हे की घोड़ी पर बिन्दौरी नहीं निकालने की हिदायत दे डाली। उस समय छात्र नेता के रूप में जीवनराम गोदारा का दबदबा था और आनंदपाल सिंह ने पूरी बात दोस्त को बताई। जीवनराम और उसके साथी सांवरदा पहुंचे और आनंदपाल के साथ मिलकर असमानता का विरोध कर गांव में बिन्दौरी निकलवाई। वर्ष 2017 में आनंद पाल को मार गिराया जाता है.उस समय राजस्थान में भाजपा की सरकार थी. वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थीं. आनंद पाल पर 10 लाख रूपये का इनाम था.

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योगी के शासन में विकास का खात्मा 

उत्तर प्रदेश में विकास दुबे जैसे दुर्दांत को मार दिया गया है. उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है. योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं. विकास दुबे 5 लाख रूपये का इनाम था. उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक पूर्वापराधी को पकड़ने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने घेरकर गोलियां की बौछार कर दी. इसमें एक थाना इंचार्ज समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हुए हैं. हमले में 12 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. कानपुर देहात के शिवली थाना इलाके में पुलिस ने बिकरू गांव में दबिश दी थी.

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