बिहार में बस नेताओं का चुनाव ठीक समय पर होता है बाकी सब ‘प्राकृतिक आपदा’ है

बिहार में जब भी कोई बड़ी घटना घटी है तो वहां के मंत्री उस घटना को प्राकृतिक आपदा से जोड़ने का प्रयास करते हैं . कई बार इस तरह की बातें हो चुकी हैं.

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बैकुंठपुर के फैजुल्लाहपुर में ढह गया पुल.
बैकुंठपुर के फैजुल्लाहपुर में ढह गया पुल.

  • 263 करोड़ की लागत से 8 साल में बना पुल 29 दिन में ढह गया
  • मंत्री ने बोला- यह प्राकृतिक आपदा है

संतोष कुमार पाण्डेय | सम्पादक

बिहार में जब भी कोई बड़ी घटना घटी है तो वहां के मंत्री उस घटना को प्राकृतिक आपदा से जोड़ने का प्रयास करते हैं . कई बार इस तरह की बातें हो चुकी हैं. लेकिन आज बिहार के गोपालगंज जिले में बैकुंठपुर के फैजुल्लाहपुर में छपरा- सत्तरघाट मुख्य पथ को जोड़ने वाला पुल का एक हिस्सा ढह गया है. इस हादसे पर प्रदेश के पथ निर्माण मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता नंद किशोर यादव का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष सत्तरघाटपुल के क्षतिग्रस्त होने की झूठी खबर फैला रहे हैं. सत्तर घाट मुख्य पुल से लगभग दो किमी दूर गोपालगंज की ओर एक 18 मी लम्बाई के छोटे पुल का पहुँच पथ कट गया है। यह छोटा पुल गंडक नदी के बांध के अन्दर अवस्थित है।

गंडक नदी में पानी का दबाव गोपालगंज की और ज़्यादा है । इस कारण पुल के पहुँच का सड़क का हिस्सा कट गया है। यह अप्रत्याशित पानी के दबाब के कारण हुआ है। इस कटाव से छोटे पुल की संरचना को कोई नुक़सान नहीं हुआ है। मुख्य सत्तर घाट पुल जो १.४ किमी लंबा है बह पूर्णतः सुरक्षित है। लेकिन मंत्री जी क्या आप जब चुनाव में जाते हैं तो उस समय मौसम आपके अनुकुल रहता है. बस जब कोई परेशानी आई तो आप उसे प्राकृतिक आपदा कह कर अपना पल्ला झाड लेते हैं.

वाकई में बिहार में प्राकृतिक आपदाएं समय समय पर आती रहती हैं. लगातार वहां के मंत्री भी इस बात को कहते हैं और अब लोग भी मान लेते हैं. मगर अब इस बार इससे काम नहीं चलेगा. लोग जवाब मांग रहे हैं. दरअसल, गंडक नदी में आई बाढ़ से गोपालगंज जिले में बैकुंठपुर के फैजुल्लाहपुर में छपरा- सत्तरघाट मुख्य पथ को जोड़ने वाले पुल का एक हिस्सा गिर गया. 2012 में इस पुल का निर्माण शुरू हुआ था. 264 करोड़ की लागत से इस पुल का निर्माण हुआ और पिछले 16 जून को सीएम नीतीश कुमार ने वर्चुअल तकनीक से इस महासेतु का उद्घाटन किया.


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