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Bihar Chunav 2020 GRound Report : गुम होती विरासत के बीच मधुबनी में शुरू हो चुकी है वोटों में सेंधमारी की राजनीति


  • मधुबनी पेंटिंग के कारण मधुबनी रेलवे स्टेशन देश के खूबसूरत रेलवे स्टेशनों में से एक है
  • बुनकर कॉलोनी को जमीन तो मिली लेकिन मुहल्ले में एक भी सड़क नहीं

पोल टॉक के लिए सच्चिदानंद सच्चू की रिपोर्ट | 

मिथिला पेंटिंग को लोग मधुबनी पेंटिंग के नाम से भी जानते हैं. इसी पेंटिंग के कारण मधुबनी रेलवे स्टेशन देश के खूबसूरत रेलवे स्टेशनों में से एक है. वास्तव में मधुबनी पेंटिंग ने एक नयी ऊंचाई हासिल की है. लेकिन मधुबनी पेंटिंग को यह मुकाम किसी सरकारी प्रयास से कम, महिला कलाकारों के अथक परिश्रम से अथिक मिला है. बावजूद इसके यह सवाल आज भी बना हुआ है कि कला के इस क्षेत्र से बिचौलियागिरि कब खत्म होगी?

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पेंटिंग के सहारे मधुबनी ने एक नया मुकाम हासिल जरूर किया है लेकिन इस शहर की और भी पहचान थी जो अब गुम हो गयी है. इतिहास के पन्नों में झांकने पर पता चलता है कि खादी की शुरुआत मधुबनी से ही हुई थी. यहां के बुनकरों द्वारा तैयार किए गये कपड़े किसी जमाने में नेहरू की पहली पसंद हुआ करते थे. लेकिन आज इन बुनकरों की हालत बेहद खराब है. खादी भंडार के पास आज भी अकूत संपत्ति है. लेकिन देखरेख के अभाव यह संपत्ति कहीं खंडहर में तब्दील होने लगी है तो कहीं यह अतिक्रमण की शिकार है. मधुबनी के भौआड़ा में एक बुनकर कॉलोनी बनायी गयी है. सरकार ने यहां पर बुनकरों के लिए जमीन तो दे दी है लेकिन अधिकतर लोगों को अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना का भी लाभ नहीं मिल सका है. मुहल्ले में अब तक सड़क नहीं है. लोग यहां नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. मधुबनी शहर की हालत भी कमोबेश यही है. बरसात के दिनों शहर के लगभग सभी मुहल्लों में पानी भर जाता है. सड़क किनारे बजबजाती हुई गंदगी हमेशा यहां देखने को मिलती है.

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नगर परिषद के 103 करोड़ रुपये का क्या हुआ

मधुबनी नगर परिषद के विकास के लिए नगर विकास विभाग की ओर से 103 करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे. इन रुपयों का क्या हुआ, यह कोई बतानेवाला नहीं है. जल निकासी के लिए अंग्रेजों के जमाने के तीन केनाल, वाट्सन, किन्स और राज केनाल हैं. लेकिन अब ये तीनों केनाल अतिक्रमण का शिकार हैं. ‘पग-पग पोखरि’ के लिए विख्यात मधुबनी के पोखरों को भरकर या उसका अतिक्रमण कर कंक्रीट के घर तैयार किये जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि मधुबनी शहर एक बहुत बड़े खतरे की ओर बढ़ रहा है.

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लोगों को टीस देती है बंद पड़े उद्योगों की खंडहर होती चहारदीवारी

मधुबनी विधानसभा के पंडौल प्रखंड में पड़ता है लोहट चीनी मिल. बात जब उद्योग धंधे की होती है तो यहां के लोग यह कहते हुए मिलते हैं नये उद्योगों की बात ही छोड़िए, जो उद्योग बंद पड़े हैं अगर उसे ही चालू कर दिया जाय तो क्षेत्र की बेरोजगारी की समस्या बहुत हद तक दूर की जा सकती है.  यहां के लोगों का कहना है कि जब लोहट चीनी मिल से उत्पादन होता था तो तो यहां के किसान खुशहाल थे. वे नकदी फसल के रूप में गन्ने की खेती करते थे. इससे न सिर्फ मधुबनी के लोग, बल्कि इसके आसपास के किसान भी लाभान्वित होते थे. यही हाल पंडौल के सूता मिल और सकरी के चीनी मिल का भी है. अब इन बंद पड़े उद्योगों की चहारदीवारी लोगों के सीने में सिर्फ एक कसक छोड़ रही है. उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मधुबनी के लहेरियागंज में सुधा दूध की ओर से एक चिलिंग प्लांट का निर्माण किया गया था लेकिन यह भी सिर्फ खानापूर्ति ही साबित हुई. वर्तमान में मात्र इसकी एक इकाई काम कर रही है जो ऊंट के मुंह में जीरा के समान है.

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चरम पर पहुंचने लगा है राजनीतिक पारा

इन बुनियादी समस्याओं के बीच मधुबनी विस क्षेत्र का सियासी पारा भी चरम पर पहुंचने लगा है. समीर कुमार महासेठ यहां से शिटिंग विधायक हैं. वे राजद में हैं और इस बार फिर राजद की ओर से चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं. समीर अच्छी छवि के नेता माने जाते हैं. वे मिथिलांचल के प्रसिद्ध राजनेता राजकुमार महासेठ के सुपुत्र हैं जिस कारण उनके पास उनका पारिवारिक जनाधार भी है. दूसरी ओर एनडीए की ओर से यह वीआईपी को दिया गया है. वीआईपी से इस बार यहां सुमन महासेठ अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं तो समीर और सुमन का खेल बिगाड़ने के लिए अरविंद पूर्वे लोजपा से चुनाव मैदान में उतर चुके हैं.

मधुबनी विस क्षेत्र में सूड़ी वोटों की संख्या ठीक – ठाक है लिहाजा सभी प्रमुख दलों ने सूड़ी मतदाताओं को खुश करने के लिए सूड़ी प्रत्याशी को मैदान में उतारा है. इसके बाद ब्राह्मण और यादव वोटों की संख्या भी इस विस क्षेत्र में है. मधुबनी सीट पर चुनावी दंगल इस बार काफी रोमांचक होने जा रहा है. हर प्रत्याशी, दूसरे प्रत्याशी के वोट बैंक में सेंधमारी करने की कोशिश कर रहा है. जो वोटों की सेंधमारी करने में सफल होगा, उसी के सिर पर जीत का सेहरा सजेगा.


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पोल टॉक और PollTalk.In के सम्पादक संतोष कुमार पांडेय देश के कई शहरों में पत्रकारिता कर चुके हैं। ये शहर जो कार्यस्थल बने वाराणसी , लखनऊ, आगरा, देहरादून, नोएडा, जयपुर, बिहार, हैदराबाद, पानीपत, सतना में रहे हैं। इन संस्थानों में दी सेवाएं राजस्थान पत्रिका , दैनिक भास्कर, एग्रो भास्कर, हिन्दुस्थान, जनसन्देश न्यूज़ चैनल, जनसन्देश टाइम्स, ईटीवी भारत में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किये. राजनीति की सही जानकारी और कुछ रोचक इन्टरव्यू दिखाना प्राथमिकता है।

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