बिहार चुनाव 2020 : दो-दो सीट जीतने वाले दल नीतीश कुमार को क्यों दिखाते हैं आँख ? जानिए पूरी कहानी

बिहार (bihar chunav 2020 ) में जो दल विधायक की संख्या के हिसाब से सबसे छोटे हैं वो ज्यादा परेशान दिख रहे हैं. वो नीतीश कुमार को आँख दिखा रहे हैं. चाहे 2019 का लोकसभा चुनाव रहा हो या अब विधान सभा का। आखिर ये दल अपनी बात कहने की बजाय गठबंधन तोड़ने पर विश्वास क्यों करते है. इन दिनों जीतन राम मांझी और चिराग पासवान चर्चा में हैं. आइये पढिये ये ख़ास रिपोर्ट।

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उपेन्द्र कुशवाहा, चिराग और जीतन राम
उपेन्द्र कुशवाहा, चिराग और जीतन राम .

  • लोजपा एनडीए में रहने के बावजूद नीतीश सरकार पर उठा रहा ऊँगली
  • रालोसपा ने 201 9 के लोकसभा चुनाव में एनडीए का छोड़ दिया था साथ

संतोष कुमार पाण्डेय | सम्पादक

बिहार (bihar chunav 2020 ) में जो दल विधायक की संख्या के हिसाब से सबसे छोटे हैं वो ज्यादा परेशान दिख रहे हैं. वो नीतीश कुमार को आँख दिखा रहे हैं. चाहे 2019 का लोकसभा चुनाव रहा हो या अब विधान सभा का। आखिर ये दल अपनी बात कहने की बजाय गठबंधन तोड़ने पर विश्वास क्यों करते है. इन दिनों जीतन राम मांझी और चिराग पासवान चर्चा में हैं. आइये पढिये ये ख़ास रिपोर्ट।

विशेष : लगातार ‘हार’ का सामना कर रहे अजय को कांग्रेस ने दे दिया जीता हुआ ‘राज’

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार में एनडीए (nda) ने 40 में 39 सीटें जीत लिया था. महागठबंधन को बड़ा नुकसान हुआ था. कांग्रेस ने बस एक सीट जीता था. लेकिन सबसे अधिक घाटा रालोसपा ( rlsp )  के नेता उपेन्द्र कुशवाहा को लगा था. क्योंकि उन्होंने अपनी सीट गंवा दी थी. दो सीट से लड़े और दोनों हार गये थे. रालोसपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में तीन सीटों पर जीत दर्ज किया था। और उपेन्द्र कुशवाहा केंद्र में मंत्री बने थे. लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव से पहले उपेन्द्र कुशवाहा नीतीश सरकार पर हमलावर हो गये थे। बाद में वो एनडीए से बाहर हो गये थे। उस दौरान भी रालोसपा के पास मात्र दो विधायक ही थे. मगर उपेन्द्र हमेशा सीएम पर हमलावर दिखे।

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चिराग पासवान अब नीतीश कुमार की सरकार पर हमलावर हो गये हैं. लगातार नीतीश की सरकार पर वो हमला कर रहे हैं. ठीक वैसे ही जैसे उपेन्द्र कुशवाहा 2019 नीतीश पर हमलावर थे. तो क्या अब चिराग पासवान की पार्टी अब अलग रास्ते पर जाएगी ? इस समय लोजपा केंद्र में एनडीए की सरकार में शामिल हैं. मगर बिहार की सरकार से बाहर है. वहीँ जदयू भी केंद्र में सरकार से बाहर है। सूत्रों की माने तो यह सब बस सीट बंटवारे को लेकर हो रहा है. अब कई चीजें और सामने आयेंगी।

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जीतन मांझी के पास बस एक विधायक है. मगर उन्हें भी आँख दिखाने की आदत हो गई है लोकसभा चुनाव में जीतन राम मांझी अपनी सीट नहीं बचा पाए थे. और उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा था. ये सभी दल इस बार भी उसी मूड में दिख रहे हैं. इन तीनों दलों के पास मात्र पांच विधायक हैं.

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थोड़ा इनका अंक गणित समझिये

वर्ष 2005 का विधानसभा चुनाव

आरजेडी  54
जदयू      88
भाजपा    55
लोजपा    10
कांग्रेस     09
भाकपा    09
निर्दलीय व अन्य दल 18

वर्ष 2010 का विधानसभा चुनाव

आरजेडी   22
जदयू      105
भाजपा     91
लोजपा     03
कांग्रेस      04
भाकपा      01
निर्दलीय व अन्य दल 7

वर्ष 2015 का विधानसभा चुनाव
आरजेडी    80
जदयू        71
भाजपा      53
लोजपा      02
कॉग्रेस      27
रालोसपा   02
हम         01
भाकपा     03
निर्दलीय व अन्य दल 04


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