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BIHAR CHUNAV 2020 : बिहार में इन छोटे दलों ने बनाई अपनी जगह और बनाई सरकार, बड़ा रोचक है इनका इतिहास


  • बिहार में ३० साल से कांग्रेस और भाजपा की स्थिति हुई खराब
  • हर चुनाव में क्षेत्रीय दलों को मिलती है यहाँ प्राथमिकता

तौफीक़ हयात की ख़ास रिपोर्ट

बिहार की 243 विधानसभा (BIHAR VIDHAN SABHA CHUNAV 2020 ) सीटों के लिए चुनाव होना है. सभी दल अपनी-अपनी बातें कर रहे हैं. आइये जानते हैं कि बिहार में कौन कौन से दल हैं. उनकी क्या स्थिति है.पढिये ये ख़ास रिपोर्ट।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद)

5 जुलाई 1997 में बिहार के लालू प्रसाद यादव ने एक राजनीतिक पार्टी का गठन किया। जिसका नाम राष्ट्रीय जनता दल तय किया गया। राजद के गठन की बड़ी ही दिलचस्प कहानी है। 90 के दशक में जब लालू प्रसाद यादव जनता दल के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री हुआ करते थे तब उन पर चारा घोटाले का आरोप लग गया था जिसके बाद पार्टी के सदस्यों ने उनसे पार्टी अध्यक्ष व मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का दबाव बनाया। इस घटना के बाद लालू ने अपने समर्थक जो पार्टी से 17 लोकसभा और 8 राज्यसभा के सदस्य थे से मिलकर बैठक कर इस्तीफा दिया तथा अपनी अलग पार्टी राजद का गठन किया। लालू की इस पार्टी को लालटेन चुनाव चिह्न दिया गया. उस दौरान यह नारा दिया गया कि लालटेन ही अब गरीब की कुटिया में रोशनी लाएगी। लालू के पार्टी गठित करने के बाद लालू को चारा घोटाले के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. जिसके बाद यादव ने पार्टी की कमान पत्नी राबड़ी देवी को सौंप दी। 24 सालों के राजनीतिक सफर में राजद ने लोकसभा व विधानसभा में अपने प्रत्याशियों की जीत दर्ज कराई है।

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जनता दल यूनाइटेड (जदयू)

बिहार और झारखंड में मजबूत पकड़ बनाए रखने वाली राजनीतिक पार्टी जदयू जनता दल से टूटकर बनी। जदयू का गठन 30 अक्टूबर 2003 में हुआ। उस समय इसमें समता पार्टी और लोकशक्ति पार्टी का विलय हुआ। इस दल का चुनाव चिह्न हरे-सफ़ेद झंडे पर तीर का निशान हैं। जदयू के पहले अध्यक्ष शरद यादव बने। वर्तमान में जदयू भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडी) के साथ है। जदयू और एनडीए का हमेशा से गठबंधन रहा है और सत्ता में रही लेकिन 2014 में लोकसभा चुनाव में जदयू ने नरेंद्र मोदी को भाजपा द्वारा चुनाव प्रचार कमेटी का प्रमुख बनाए जाने का विरोध करते हुए अपना गठजोड़ तोड़ लिया जिसका खामियाजा शरद यादव को एनडीए का संयोजक पद छोड़कर चुकाना पड़ा। बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में जदयू राजद और कांग्रेस ने मिलकर एनडीए के खिलाफ महागठबंधन बनाया और विधानसभा में 178 सीटों पर जीत दर्ज कर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने। साल 2017 आते आते नीतीश ने राजद व कांग्रेस का साथ छोड़ फिर एक बार भाजपा के साथ हो लिए । राजद बिहार विधानसभा चुनाव एनडीए के साथ लड़ सकती हैं।

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लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा)

लोक जनशक्ति पार्टी भारत का एक राजनैतिक दल जिसका गठन 50 सालो से राजनीति में अपना परचम लहराने वाले रामविलास पासवान ने सन 2000 में बाबू जगजीवनराम के बाद बिहार में दलित नेता के तौर पर पहचान बनाने के लिए पार्टी की स्थापना की। पार्टी के माध्यम से वे दलितों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाले नेता बनना चाहते थे।

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रामविलास पासवान का मानना था कि वे लोकसभा में सबसे उम्र दराज व्यक्ति है जिससे उन्हें कभी भी मंत्री पद से हटाया जा सकता है. जिसके बाद पार्टी केवल सांसदों की रह जाएगी जिसके चलते पासवान ने अपने बेटे चिराग पासवान को पार्टी का अध्यक्ष बनाया। वर्तमान में चिराग पासवान लोजपा के अध्यक्ष व जमुई से लोकसभा में सांसद हैं। वर्तमान में लोजपा एनडीए के साथ शामिल होकर चुनाव लड़ रही हैं वहीं लोजपा ने बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट घोषणा पत्र मुख्य एजेंडा के रूप में घोषित किया है।

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जन अधिकार पार्टी ( लोकतांत्रिक )

बिहार के दिग्गज नेता और कई बार के लोक सभा सांसद राजेश रंजन यादव उर्फ़ पप्पू यादव ने 2015 में जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक ) पार्टी का गठन किया। हालांकि, इनके दल को किसी चुनाव में जीत तो नहीं मिली लेकिन चुनाव में डटे हुए हैं. इस विधान सभा चुनाव में जन अधिकार पार्टी लगातार काम कर रही है. 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

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राष्ट्रीय लोक समता पार्टी

रालोसपा का बिहार में होल्ड है. रालोसपा बिहार में एक बड़ी पार्टी है. इस दल के नेता उपेन्द्र कुशवाहा हैं. 3 मार्च 2013 को पटना के गांधी मैदान में एक रैली में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का शुभारंभ किया। वर्ष 2014 के भारतीय आम चुनाव में रालोसपा ने एनडीए के साथ गठबंधन में बिहार की सीतामढ़ी, काराकाट और जहानाबाद से लोकसभा की सीट जीत लिया था. वर्ष 2015 के विधानसभा के चुनाव में 23 पर रालोसपा ने चुनाव लड़ा था. जिसमें से दो सीटों पर जीत मिली थी.

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हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने 8 मई 2015 को हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा का गठन किया। जदयू, कांग्रेस और राजद में रह चुके जीतन राम मांझी के हम दल ने खूब चर्चा बटोरी थी लेकिन इन्हें किसी भी चुनाव में फायदा नहीं हुआ. कभी महागठबंधन में तो कभी एनडीए में रहे. मगर इन्हें चुनाव में लगातार हार मिलती जा रही है। ये खुद २०१९ का लोकसभा चुनाव हार गये.

( लेखक पोल टॉक में इंटर्नशिप कर रहे है ) |

 

 


POLL TALK DESKhttps://polltalk.in/
पोल टॉक और PollTalk.In के सम्पादक संतोष कुमार पांडेय देश के कई शहरों में पत्रकारिता कर चुके हैं। ये शहर जो कार्यस्थल बने वाराणसी , लखनऊ, आगरा, देहरादून, नोएडा, जयपुर, बिहार, हैदराबाद, पानीपत, सतना में रहे हैं। इन संस्थानों में दी सेवाएं राजस्थान पत्रिका , दैनिक भास्कर, एग्रो भास्कर, हिन्दुस्थान, जनसन्देश न्यूज़ चैनल, जनसन्देश टाइम्स, ईटीवी भारत में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किये. राजनीति की सही जानकारी और कुछ रोचक इन्टरव्यू दिखाना प्राथमिकता है।

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