अमेरिका बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में भोपाल के सीए मुकेश राजपूत का नाम दर्ज हुआ

मध्य प्रदेश भोपाल के लेखक और सीए मुकेश राजपूत, ने एक खास उपलब्धि हासिल की है। सीए मुकेश को ‘अमेरिका बुक आफ रिकार्ड्स’ में स्थान मिला है। सीए मुकेश राजपूत को अपने स्वयं के जीवन पर एक किताब लिखने के लिए यह सराहना मिली। जिसका शीर्षक 'सी.ए. पास द रियल स्टोरी', 2015 में इंद्रा पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित की गई है।

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ca mukesh rajput
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  • अमेरिका बुक ऑफ रिकार्ड में नाम कराया दर्ज
  • ऐसा करने वाले सीए मुकेश पहले व्यक्ति हैं

पोल टॉक नेटवर्क | भोपाल

मध्य प्रदेश भोपाल के लेखक और सीए मुकेश राजपूत, ने एक खास उपलब्धि हासिल की है। सीए मुकेश को ‘अमेरिका बुक आफ रिकार्ड्स’ में स्थान मिला है। सीए मुकेश राजपूत को अपने स्वयं के जीवन पर एक किताब लिखने के लिए यह सराहना मिली। जिसका शीर्षक ‘सी.ए. पास द रियल स्टोरी’, 2015 में इंद्रा पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित की गई है। इस पुस्तक में उनके जीवन के उतार-चढ़ाव का वर्णन किया है। इसमें शून्य से लेकर शिखर तक पहुंचने को लेकर बहुत ही रोचक तरीके से वर्णन किया गया है। उनकी कहानी प्रेरणादायक है और युवाओं को एक संदेश देती है. जीवन की सबसे खराब परिस्थितियों में भी कभी उम्मीद न खोएं ’ के रूप में नाम दर्ज किया है।

गौरतलब है कि किसी सीए द्वारा अपनी सफलता की रियल स्टोरी को दर्ज करने वाली यह पहली किताब है. जिसमे एक स्टूडेंट का संघर्ष तब शुरू होता है जब पांचवी कक्षा के बाद पढाई पूरी तरह से छूट गयी थी. इनका पूरा बचपन घर परिवार से दूर होटलो में और स्टेशनो में साफ सफाई का काम करते हुए बीता, कुछ लोगो ने शारीरिक शोषण भी किया है. एक दिन जीवन को नई दिशा तब मिली जब किसी ने किताब देते हुए ये कहा कि शिक्षा में बहुत बड़ी ताकत होती है. इससे तुम सब कुछ पा सकते है अपने सपने पूरे कर सकते हो. समाज में अपनी एक अलग पहचान तथा स्थान बना सकते हो. इसके बाद पांचवी तक पढ़े , मुकेश ने सीधे 10 वी का फार्म (ओपन स्कूल पत्राचार पाठ्यक्रम से म.प्र. सरकार की वर्तमान योजना “रुक जाना नहीं”) भरा 3 बार असफलता के बाद भी हार नहीं मानी , चौथी बार में सफलता मिली|

और आगे की पढाई जारी रखने के लिए भी संघर्ष जारी रखा आर्थिक स्थिती ठीक नहीं होने के कारण इन्हे रात में चौकीदारी का काम इंडस्ट्रियल एरिया गोविन्दपुरा में करना पड़ता था, किन्तु शिक्षा को पकड़ कर रखा और पढाई करते रहे और प्राइवेट 12वी कॉमर्स से 1996 में पास की, सफर यही खत्म नहीं हुआ सपनो में पंख तब लगे जब मुकेश, आर.के. वेअर्स प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री मंडीडीप के ऑफिस जो मारवाड़ी रोड भोपाल में लोडिंग ऑटो ड्राईवर की जॉब के दौरान फैक्ट्री मालिक वाटूमल वासवानी जी ने कुछ पेपर, सीए मनोज खरे हमीदिया रोड स्थित ऑफिस में देने को भेजा पहली बार किसी सीए को देखा और बहुत प्रभावित हुआ की अब में भी सीए करूँगा और सर को अपना गुरु बना लिया और अपना सीए का सफर शुरू किया |

सीए के पहले ग्रुप आई.पी.पी.सी (IPPC ) में 6 बार असफलताओ का सामना किया किन्तु हार नहीं मानी और 2010 में सीए की प्रोफेशनल डिग्री को हासिल कर ही लिया और आज भोपाल में प्रैक्टिस करते है | सीए मुकेश राजपूत उन स्टूडेंट्स के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है जो जरा सी असफलता मिलने से निराश हो जाते है और सारा दोष किसमत या गरीबी को देकर छोड़ देते है या संघर्ष से डरकर आत्महत्या जैसे कदम उठाने लगते है | जब सीए से चर्चा की तो उन्होंने बताया की मेने इस एक जीवन में दो-दो जिंदगी को जिया है एक वो जो दरिद्रता वाली और दूसरी किसी सपने से काम नहीं |

सीए मुकेश आगे कहते है डिअर स्टूडेंट्स यदि हम गरीब है तो हमे डरने की कोई जरुरत नहीं है हमारे पास एजुकेशन का टूल है जिसके सहारे हम अपने सभी सपनो को हकीकत में बदल सकते है, एजुकेशन कभी भी अमीरी – गरीबी में भेदभाव नहीं करती है वो सभी को सामान रूप से मिलती है हां ये हो सकता है कि यदि आप आर्थिक रूप से कमजोर हो तो कम सुविधाओं में आपको ज्यादा परिश्रम करना पड़े किन्तु असंभव कुछ भी नहीं, आप मुझे देख सकते है |
सीए मुकेश राजपूत को अमेरिका बुक ऑफ रिकार्ड्स में स्थान मिलने का एक और कारण है वो है मुकेश दो मिशन स्टूडेंट्स के लिए चलाते है ;

i) मिशन “शिक्षित वर्ल्ड ~ सफल वर्ल्ड” :

(अ) स्टूडेंट्स मोटीवेशनल & स्पीकर कॉउंसलर : वर्ष 2015 में एक मिशन बनाया “शिक्षित भारत ~ सफल भारत” स्टूडेंट्स को शिक्षा के लिए मोटीवेट और करियर काउंसलिंग करना, ऐसे स्टूडेंट्स जिन्हे जरा सी असफलता क्या मिली और सोचने लगते की अब जीने से क्या होगा और आत्महत्या के बारे में सोचने लगते है या सोचते है की एजुकेशन उनके बस की बात नहीं है, क्योकि हम गरीब है, इस तरह के बहाने बनाकर किस्मत के भरोसे बैठ जाते है | सीए मुकेश राजपूत अपनी रियल स्टोरी के बारे में बताकर स्टूडेंट्स को मोटीवेट करते और उनके अंदर खोई उम्मीद को जगाते है और जैसे ही स्टूडेंट्स को पता चलता है कि मुकेश जी, 5-वी कक्षा के बाद की पढाई पूरी तरह से छूट चुकी थी, फिर भी सफल सीए बने और फर्श से अर्श तक पहुंचे, तो “हम क्यों नहीं”……..? यही मेरा मिशन है | यदि हमने स्टूडेंट्स के अंदर सोये हुए सपने को जगा दिया, तो फिर आगे का सफर वो स्वयं ही तय कर लेगा, उसे किसी के सहारे की जरुरत नहीं है |

 

 

 

 


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