गोगोई से पहले ये EX CJI राज्यसभा और राज्यपाल बन चुके हैं, गोगोई के पिता दो महीने रहे हैं सीएम

राज्यसभा में पहली बार कोई उच्चतम न्यायालय का पूर्व मुख्यन्यायाधीश नामित हुआ है

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पीएम मोदी के साथ पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई

उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्यन्यायाधीश (ex Chief Justice of India) रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) इन दिनों चर्चा में हैं. क्योंकि उन्हें भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ( Ramnath Kovind) ने राज्यसभा (RAJYA Sabha) सदस्य के रूप में नामित किया है. नियमत: राज्यसभा में 12 लोगों को राष्ट्रपति नामित कर सकते हैं. तो रंजन गोगोई (ranjan Gogoi) के नाम पर इतना हंगामा क्यों बरपा है ? इसके पहले भी उच्चतम न्यायालय के दो ऐसे पूर्व मुख्यन्यायाधीश रहे हैं जिन्हें कांग्रेस (congress) ने राज्यसभा और एनडीए सरकार ने राज्यपाल बनाया था. पढ़िए पोलटॉक की ये ख़ास रिपोर्ट.

पीएम नरेन्द्र मोदी के साथ पूर्व मुख्यन्यायाधीश रंजन गोगोई .

रंजन गोगोई काफी चर्चित रहे हैं. उन्होंने एक बार प्रेस कांफ्रेंस भी बुलाई थी. ये असम से आते हैं. इनके पिता केशव चन्द्र गोगोई १९८२ में असम के दो महिने के लिए मुख्यमंत्री रहे. डिब्रूगढ़ विधान सभा सीट से वो विधायक रहा करते थे. खांटी कांग्रेसी नेता थे. दरअसल, आने वाले वर्ष में असम में विधानसभा का चुनाव होना है. गोगोई के राज्यसभा भेजे जाने को लेकर चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है.

रंगनाथ मिश्रा, उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्यन्यायाधीश.

ओडिशा निवासी उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्यन्यायाधीश रंगनाथ मिश्रा को कांग्रेस ने १९९८ में राज्यसभा के लिए भेजा था. वे 2004 तक राज्य सभा सदस्य रहे. जब केंद्र में २०१४ में नरेंद्र मोदी की सरकार आई तो केरल से शीला दीक्षित ने राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया था. 05-09-2014 को नरेंद्र मोदी सरकार ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्यन्यायाधीश 65 वर्षीय सदाशिवम को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. देश में पहली बार ऐसा हुआ था कि किसी उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्यन्यायाधीश को राज्यपाल बनाया गया था.

सदाशिवम , उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्यन्यायाधीश

अब विपक्ष कई सवाल खड़े कर रहा है. क्योंकि, जस्टिस रंजन गोगोई 2019 में नवंबर में रिटायर हुए हैं और मार्च के महीने में ही राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दिया है. अब इस बात को लेकर इन दिनों बवाल मचा हुआ है. राष्ट्रपति के इस फैसले से कई सारे सवाल उठ रहे हैं.


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