डॉक्टर्स को सलाम : राजस्थान के इस सरकारी अस्पताल में कोरोना के मरीजों को मिल रही ‘संजीवनी’, नहीं हुई कोई मौत

कोरोना महामारी में पूरी दुनिया परेशान है. भारत में राजस्थान की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है. यहाँ भी कोरोना का असर है. 3491 कोरोना के मामले मिल चुके हैं. जिनमें से 100 लोगों की मौत भी हो चुकी हैं. डॉक्टर्स भी परेशान हो रहे हैं. उनके परिजन भी उनसे कम मिल पा रहे हैं.

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भरतपुर
डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ अस्पताल के डॉक्टर्स के साथ.

  • जहाँ से 115 केस कोरोना के मिले हैं जिनमें से 90 मरीज अभी तक ठीक हो चुके
  • मरीज का इलाज स्वाइन फ्लू या अन्य वायरस से होने वाली बीमारियों की दवाओं के साथ किया जाता है

कोरोना महामारी में पूरी दुनिया परेशान है. भारत में राजस्थान की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है. यहाँ भी कोरोना का असर है. अबतक 3491 कोरोना के मामले मिल चुके हैं. जिनमें से 100 लोगों की मौत भी हो चुकी हैं. डॉक्टर्स भी परेशान हो रहे हैं. उनके परिजन भी उनसे कम मिल पा रहे हैं. लेकिन वहीं राजस्थान में एक ऐसा सरकारी अस्पताल है जहाँ से कोरोना के केस तेजी से ठीक हो रहे हैं. यहाँ पर डॉक्टर्स की मेहनत और काम की तत्परता से मामले पर जीत मिल रही है. राजस्थान के इस सरकारी अस्पताल में कोरोना के मरीजों को दवा रूपी ‘संजीवनी’ मिल रही है. किसी भी कोरोना मरीज की मौत नहीं हुई. यहाँ के डॉक्टर्स को सलाम करना चाहिए. पोलटॉक में इंटर्नशिप कर रही स्वस्ति कुलश्रेष्ठ की पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट !

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ऐसे रखा जाता सभी का ख्याल

भरतपुर के राज बहादुर मेमोरियल अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि, “जब भी कोई मरीज अस्पताल आता है तो उसे हाथ धोने के लिए सैनिटाइज़र दिया जाता है और कर्मचारियों से 1 फीट की दूरी बनाए रखने के लिए कहा जाता है। इसके साथ ही, उसे तब तक अपना मास्क न हटाने के लिए कहा जाता है जब तक कि उसे अन्यथा न कहा जाए। यदि रोगी में कोरोनावायरस के लक्षण हैं तो उसका परीक्षण किया जाता है और यदि सकारात्मक पाया जाता है तो उसे आइसोलेशन वार्ड में रखा जाता है।”

संजय
डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ, अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक, भरतपुर

कोविड-19 वार्ड की अंदर की बात

जो अभी कोविड-19 वार्ड है यह पहले पुरुष और महिला मेडिकल सर्जिकल वार्ड था। जहां लगातार कोरोना के मरीज ठीक हो रहे हैं. कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है. जहाँ से 115 केस कोरोना के मिले हैं जिनमें से 90 मरीज अभी तक ठीक हो चुके हैं. डॉ. संजय ने बताया कि यदि रोगी सकारात्मक पाया जाता है. तो कोरोना रोगियों के लिए एक त्वरित प्रतिक्रिया टीम रोगी के घर के 3 किलोमीटर के भीतर एक नियंत्रण क्षेत्र स्थापित करती है। मरीज का इलाज अस्पताल में किया जाता है। पूर्ण उपचार के बाद उसे 14 दिनों की संगरोध (एकांतवास) अवधि के लिए एक होटल में भेजा जाता है. जिसके बाद वह अपने घर जा सकता है। मरीज का इलाज स्वाइन फ्लू या अन्य वायरस से होने वाली बीमारियाँ की दवाओं के साथ किया जाता है।

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लगातार हो रहे हैं ठीक

कोरोनोवायरस संक्रमण वाले 115 रोगियों में से 90 मरीज भरतपुर में पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं। इन मरीजों को रहने, खाने और दवा की नि:शुल्क सुविधा दी गई है। डॉ. संजय बताते है की, “अगर एक डॉक्टर कोविड -19 के रोगी के इलाज के लिए 7 दिनों तक लगातार काम करता है, तो उसे 14 दिनों की संगरोध अवधि के लिए एक होटल में भी रखा जाता है, जब तक कि उसके संक्रमण के परीक्षण के परिणाम नकारात्मक नहीं आते हैं। मरीज के इलाज के दौरान डॉक्टर दस्ताने, मास्क, गाउन, विशेष जूते पहनते हैं और डॉक्टर के शरीर का हर हिस्सा ढंका रहता है। इस महत्वपूर्ण समय में, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, सफाई कर्मचारी, लैब तकनीशियन, रेडियोग्राफर, वार्ड बॉय, ट्रॉली खींचने वाले, एम्बुलेंस चालक सभी को चौबीसों घंटे काम करना पड़ रहा है। सरकार के चिकित्सा विभाग के प्रत्येक कर्मचारी ने उनके वेतन का कुछ हिस्सा राजस्थान मुख्यमंत्री कोविड-19 राहत कोष में दान किया है।”

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