Home चुनाव उत्तर प्रदेश आगरा अतीत के पन्नों से : आपदाओं की सदी बदली, पर सीखने...

आगरा अतीत के पन्नों से : आपदाओं की सदी बदली, पर सीखने में बदलाव नहीं आया


अनिल शर्मा (सचिव,सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा)

  • 1837-38 का साल “सूखे” पड़ने के कारण, आगरा के 220 सालों का सब से भयावह समय
  • आगरा उस समय “नार्थ वेस्ट प्रोविंस” की राजधानी थी

आगरा. बहुत से इतिहासकारों ने कहा है और मैने भी सुना है “जो इतिहास नहीं जानते वो अभिशापित हैं” अगर हम करोना महामारी, आपदा प्रबंधन और उस से उत्पन्न आगरा शहर की समस्यों का अध्यन करें तो एक अलग ही अंदाज दिखता है. शायद यह भी सच है के “इतिहास अपने आप को दोहराता है”

हर सदी में आपदा आगरा में दस्तक देती रही है. अगर हम १९ सदी से २१ सदी का अध्यन करें तो हमें बहुत कुछ सिखने को मिलता है. बहुत कुछ बदला पर समय के साथ हम अपनी आपदाओं से लड़ने के हुनर को भूल गए. और जिन्दगी की दौड़ में खो गए.

इतिहास से सीख

१.“चौरान्वी” अकाल

१८३७-३८ का साल “सूखे” पड़ने के कारण, आगरा के २२० सालों का सब से भयावह समय था. सुखा जनमानस में “चौरान्वी” के नाम से जाना जाता था. इस नामकरण की वजह वर्ष 1838 के अनुरूप संवत कैलेंडर १८९४ था. उस समय कि सूचना के अनुसार 8००००० लोगों की जान गयी थी. साथ हि बहुत ज्यदा पशु म्रत्यु होने के कारण आकंडा रखना संभव नहीं था. आगरा उस समय “नार्थ वेस्ट प्रोविंस” की राजधानी था और बहुत बड़ा जिला भी. सूबे के अंग्रेज शासन और प्रशासन का बहुत अहम् शहर था.

सूखा पड़ने से कॉलरा,फीवर और आमातिसार-संबंधी बीमारियों से भी आगरा जूझा था. उस समय समस्या यह नहीं थी के भोजन कैसे मिलेगा, अपितु खाने के लिए भूखे लोगों को कैसे भोजन तक लायें या सबसे सस्ते और सबसे अधिक संभव तरीके से उनके लिए भोजन उपलब्ध करवाया जाये. गेंहू महंगा हो गया था. सरकार ने राहत सिर्फ ह्रष्ट-पुष्ट और सक्षम को ही प्रदान की थी. जब की अपाहिज,अक्षम और अनाथ को सार्वजनिक दान पर छोड़ दिया था.  उस वक्त भी भुखमरी और उत्प्रवास के कारण लोगों ने पलायन किया था. यह आगरा के लिए दशक का गंभीर आर्थिक गिरावट वाला समय भी था. किसानों ने आगरा शहर में सराफा, पीतल के बर्तन, निम्न दर्जे के कपडे और शराब आदि खरीदना बंद कर दिया था.

शासन के क़दम

तब बहुत से कार्य आपदा को सँभालने के लिए, किये गए. तब एक स्वैच्छिक संगठन “आगरा रिलीफ सोसाइटी” का गठन, अकाल राहत के लिए किया गया था, स्थानीय अनाज व्यापारी इस के महत्वपूर्ण सहभागी थे. दान के पैसे का सही उपयोग करने के लिए स्वैच्छिक संगठन की अनेक उप समितियां बनायीं गयी थीं. अकाल पालिसी का उस समय के शासन ने पहली बार गठन किया था जो पूरे देश और समय समय पर उन्नयन के साथ बहुत लम्बे समय तक भारत सरकार की भी पालिसी रही.

आगरा में चैरिटी अस्पताल– उस समय के आगरा के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर चार्ल्स मेटकाल्फ ने अपने पैसे से नाइ कि मंडी में चैरिटी हॉस्पिटल स्थापित किया था. उस के पहले सिविल सर्जन डंकन थे और डॉ गणेश लाल उन के साहयक हुए.

पानी की कमी को दूर करने के लिए “कैनाल सिस्टम” बनाया जो आज तक मौजूद है. १९८० तक आगरा शहर में भी कैनाल को देखा जा सकता था, लेकिन विकास के नाम पर बहुत कुछ जायज और नाजायज़ बदलाव आगरा में हुए. यह कैनाल सिस्टम नेविगेशन और सिंचाई के लिए उपयोग में आता था.

साथ ही सड़क बनाने का,टेलीग्राफ सिस्टम लागु किया गया,रेलवे का भी कार्य शुरू हुआ और बहुत से अन्या कार्य भी क्रियान्वित किये गए.  उस समय दो समाज सुधार के महत्वपूर्ण कार्य हुए – सती प्रथा और कन्या भ्रूण हत्या को खत्म करने का कानून बना.

२. बूबोनिक प्लेग का काल १८९६ से १९२१.
इस काल में प्लेग से १२ मिलियन लोगों की जान गयीं.यह संक्रामक रोग था. जनता में न फैले इस के लिए एकांत
और बाहरी संगरोध शिविर लगाये गये. प्लेग संक्रमित लोगो को खोजने के लिए प्रशासन और पुलिस को गाँव गाँव में लगाया गया था. औचक निरिक्षण,रेल यात्रा पर बारीकी से निगरानी रखी गयी,संक्रमित मिलने पर अस्पताल में भर्ती करा ईलाज करवाया गया.

शासन के क़दम
इस दौरान सब से पहले “महामारी आपदा अधिनियम 1897” लाया गया जो आज तक लागू है. सेक्शन 188 इस एक्ट में, संक्रमण ना फैलने में सरकार का सहयोग ना करने पर लागु होता है.आज भी मुकदमे कायम किये गए हैं.

१८८५ में आगरा में क्षेत्र बजाजा कमेटी का गठन ” सर्व भूताहिते रताः “को कर्म सूत्र बनाकर हुआ. कमेटी की स्थापना सर्वप्रथम असहाय एवं गरीब लोगों के लिए “भोजन सेवा” के साथ हुयी थी। समिति ने आयुर्वेदिक औषधालय की भी स्थापना की थी. लागत मूल्य पर दाह संस्कार सामिग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की सेवा से श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी को एक विशिष्ट पहचान मिली. ऐसा माना जाता है के संक्रमण के दौरान अत्यधिक म्रत्यु होने से, प्रशासन ने नागरिक संगठनों से दाह संस्कार के लिये मदद मांगी थी. उस समय श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी के योगदान की पूरी सम्भावना है. श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी आज भी पूरे निष्ठा के साथ कार्यरत है.

संक्रामक रोग अस्पताल इस काल में इस हॉस्पिटल की स्थापना हुई जो कि जनस्‍वास्‍थ्‍य से संबधि‍त एक महत्‍वपूर्ण अवस्‍थापना थी। यह शाहगंज में आज भी जर्जर अवस्था में है. इस का सञ्चालन म्युनिसिपल कारपोरेशन के पास था और आज भी है. इस में एक डॉक्टर और कम्पाउण्डर और ३० बेड जो के निशुल्क इलाज के लिए उपलब्ध थे. उस काल में स्थापित मानसि‍क आरोगय शाला, गांधी कुष्‍ठ आश्रम ,लेडी लायल हॉस्‍पि‍टल (महि‍ला चि‍कि‍सलय) आदि‍ वे पुराने स्‍वास्थ्‍य संबधी प्रति‍ष्‍ठान हैं जि‍न्‍हें मौजूदा जनस्‍वास्‍थ्‍य सुवि‍धाओं को उपलब्‍ध करवाने वाली सुवि‍धाओं को संभव करवाने का ढाचागत आधार माना जा सकता है। लेकिन संक्रामक रोग अस्पताल को निष्क्रिय करने में किन किन लोगों का योगदान है,इस पर आज चर्चा करना उपयुक्त नहीं होगा. आज के हालत देख कर, इस अस्पताल का फिर से शुरू होना बहुत ज़रूरी है.

अब इस अस्पताल को बड़ा और संक्रमिक रोग का इलाज करने वाले डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्टाफ जो मेडिकल भाषा में एक्टिव और पैसिव हैं,उन के लिए उचित रहने का हॉस्टल भी बनाया जाये. जिस तरह से करोना संक्रमण फ़ैल रहा है और जब तक बचाव का टीका नहीं बनता तब तक इस अस्पताल की जरुरत रहेगी. जिस तरह नए नए संक्रामक रोगों के पनपने से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता,उसी तरह रिसर्च की भी जरुरत होगी. इस अस्पताल में संक्रामक रोगों का रिसर्च सेंटर भी प्रदेश और केंद्रीय सरकारों के सहयोग से स्थापित किया जाना चाहिए.

आगे की रणनीति की नागरिकों की अपेक्षा.

अब आगरा किसी भी प्रोविंस की राजधानी नहीं है,पर राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय महत्त्व का इतिहासिक शहर है. पर्यटन और पर्यटन सम्बंधित प्रमुख उद्योग है, छवि सुधारने के लिए समग्र प्रयास करने होंगे. हमारे पास इतिहास और सरकारी दस्तावेजों से बहुत कुछ सिखने को मिलता है. ऊपर दिए गए विवरण में बहुत कुछ है जो आज के अनुभव के अनुरूप है .

1. संक्रामक रोग अस्पताल को दुबारा शुरु करना चाहिए. आगरा में कुष्ट, टीबी और मानसिक रोगों के राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठान हैं.

2. कैनाल सिस्टम को पुख्ता कर पर्यावरण को मजबूती देनी चाहिए. आगरा में टूरिज्म इंडस्ट्री महत्वपूर्ण है, टूरिस्ट को आकर्षित करने के लिए कैनाल में नेविगेशन के लिए फिर से अन्वेषण करना चाहिए. कैनाल पर नौका विहार उन पर्यटकों के लिए अवसर होगा जो वेनिस का सस्ते में आनंद लेने के लिए आगरा आयें.

3. प्रशासन,पुलिस और आम जनता के बीच तालमेल बैठाने के लिए कारगर कदम लेने पड़ेंगे. आम नागरिक अपराधी नहीं है और आपदा के समय लाठी समस्या का समाधान नहीं है. प्रशासन और पुलिस को आम नागरिक को साथ लाने का प्रयास करना होगा. देश में ऐसा उदहारण सूरत शहर में मोदीजी के दिशा निर्देश पर उस समय के पुलिस कमिश्नर श्री राकेश अस्थाना, आईपीएस ने कायम किया था जो आज भी है. उन्होंने सिविल सोसाइटी के साथ मिल कर CCTV निगरानी के साथ “hawak eye” और ट्रैफिक मैनेजमेंट का सिस्टम खड़ा किया था. उत्तर प्रदेश पुलिस, आगरा (या प्रदेश के कवल शहरों ) को समझते हुए सूरत मॉडल पर आगरा मॉडल पर कार्य करे. मेरा मानना है के प्रसासनिक और पुलिस ट्रेनिंग में आपदा और सामाजिक संगठनों के साथ समन्वय पर व्यापक प्रशिक्षण शुरू से ही देना होगा.

4. आपदा प्रबंधन एक्ट २००५ को पूर्ण रूप से लागु कर “डिस्ट्रिक्ट आपदा प्रबंधन प्राधिकरण” को एक्टिव रोल में लाना होगा. नगर निगम और जनता द्वारा चुने हुए पार्षदों को आपदा प्रबंधन एक्ट २००५ के अनुरूप समय समय पर उचित प्रशिक्षण दे कर तैयार करना होगा. इस एक्ट के अनुसार सिविल सोसाइटी और विभिन्न सामाजिक संगठनों को समय समय पर भी उचित प्रशिक्षण देने का प्रावधान है. करोना आपदा में सामाजिक संगठनों ने भरपूर कार्य कर प्रशासन को वहा वाही लेने का पूरा पूरा मौका दिया है.

समय की सब से अच्छी बात है के कैसा भी हो बीत जाता है, पर समझदार सीख कर आगे आने वाली आपदा के लिए आज से तैयारी शुरू कर देते हैं.

(ये लेखक के निजी विचार है.)


POLL TALK DESKhttps://polltalk.in/
पोल टॉक और PollTalk.In के सम्पादक संतोष कुमार पांडेय देश के कई शहरों में पत्रकारिता कर चुके हैं। ये शहर जो कार्यस्थल बने वाराणसी , लखनऊ, आगरा, देहरादून, नोएडा, जयपुर, बिहार, हैदराबाद, पानीपत, सतना में रहे हैं। इन संस्थानों में दी सेवाएं राजस्थान पत्रिका , दैनिक भास्कर, एग्रो भास्कर, हिन्दुस्थान, जनसन्देश न्यूज़ चैनल, जनसन्देश टाइम्स, ईटीवी भारत में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किये. राजनीति की सही जानकारी और कुछ रोचक इन्टरव्यू दिखाना प्राथमिकता है।

Leave a Reply

Must Read

चौधरी साहब ताउम्र ग़रीबों, किसानों, नौजवानों और वंचितों की आवाज़ बने रहे : यज्ञेन्दु

चौधरी अजीत के बेटे जयंत ने दी सोशल मीडिया से जानकारी देश भर के नेताओं ने भावभीनी...

वैक्सीनेशन के पश्चात् मिलने वाले सर्टिफिकेट पर पीएम की फोटो नहीं लगाने वाला बयान अत्यन्त शर्मनाक : राजेन्द्र राठौड़

राजस्थान में ऑक्सीजन का कोटा 100 मीट्रिक टन बढ़ाकर 280 मीट्रिक टन से 380 मीट्रिक टन किया है ...

प्रदेश युवा कांग्रेस ने “सेवा दिवस” के रुप में मनाया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जन्मदिन

प्रदेश के सभी 33 जिलों में रक्तदान शिविर, फल, भोजन, मास्क एवं सैनिटाइजर वितरण कार्यक्रम पोल टॉक नेटवर्क | जयपुर  राजस्थान...

केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही सहायता से गहलोत सरकार जनता को दे राहत : सांसद रामचरण बोहरा

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन से की मुलाकात कोरोना आपदा प्रबंधन, रेमेडिसिवर...

कोरोना मरीजों और उनके परिजनों के लिए प्रदेश युवा कांग्रेस ने शुरू की ‘जनता रसोई’

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंशा "कोई भूका ना सोए" को आगे बढ़ाते हुए को खाना उपलब्ध करवाने का लिया संकल्प पोल...