Home जनसरोकार डिजिटल मीडिया की ताकत को नकार नहीं सकते : प्रो संजय द्विवेदी

डिजिटल मीडिया की ताकत को नकार नहीं सकते : प्रो संजय द्विवेदी


  • कम्युनिकेशन टुडे के 7वें राष्ट्रीय वेबिनार में डिजिटल मीडिया के विस्तार पर मंथन
  • डिजिटल मीडिया का संसार : कितना यथार्थ, कितना काल्पनिक’ विषय पर परिसंवाद

पोल टॉक नेटवर्क | जयपुर 

जयपुर से प्रकाशित द्विभाषी कम्युनिकेशन टुडे त्रैमासिक मीडिया जर्नल की ओर से 26 अक्टूबर की शाम 5:30 बजे 7वें राष्ट्रीय वेबिनार का अयोजन हुआ। इसमें ‘डिजिटल मीडिया का संसार : कितना यथार्थ, कितना काल्पनिक’ विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। परिसंवाद में मीडिया जगत के कई दिग्गज विषय के विविध पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कम्युनिकेशन टुडे का 7वां राष्ट्रीय वेबिनार 26 अक्टूबर को

मुख्य वक्ता के रूप में आईआईएमसी, दिल्ली के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने डिजिटल मीडिया के तमाम प्रारूपों को सामने रखा। उन्होंने डिजिटल मीडिया को वर्तमान दौर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि आज इस माध्यम को आप नजरअंदाज नहीं कर सकते। प्रो. संजय ने कहा कि इस माध्यम ने तमाम उन लोगों को बात कहने का और चंद समय में लाखों तक पहुंचने का मौका दिया है, जिनकी बात मुख्यधारा में नहीं की जा रही थी या फिर उन्हें जगह नहीं मिल रहा था। उन्होंने कहा कि आने वाला दौर डिजिटल मीडिया का है। हालांकि, इस दौरान फेक न्यूज के मुद्दे को उठाते हुए प्रो. संजय ने यह जरूर कहा कि हमारे सामने चुनौती है इससे निपटने की और इसके लिए हमें लोगों को प्रशिक्षित करने की भी जरूरत है।

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कम्युनिकेशन टुडे के सम्पादक और राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष प्रो संजीव भानावत ने बताया कि सोशल मीडिया से दूसरे मीडिया के माध्यम को कोई नुकसान नहीं है। बल्कि यह सशक्त माध्यम  और लोगों की आवाज बन रहा है। आने वाले दिनों में इसकी भूमिका और ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। इस दौरान भानावत ने कुछ श्रोताओं के सवालों का जवाब भी दिया।

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मैसूर विश्वविद्यालय की पत्रकारिता विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सपना एम.एस, ने सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया को ताकत बताया। एक एक दिन में हजारों हजार फ़ोटो और वीडियो फेसबुक पर डाले जा रहे हैं। यहां सूचनाओं का महाजाल है। बस फेक न्यूज पर रोक लगाने की जरूरत है।

लेट्सअप के रीजनल एडिटर लक्ष्मी शंकर मिश्र ने कहा कि डिजिटल मीडिया के यथार्थ को नकारा नहीं जा सकता है। आज हम सभी किसी न किसी रूप में इससे प्रभावित हैं। मिश्र ने कहा कि आज कोई भी व्यक्ति उसके पास अगर मोबाइल है और डेटा है तो वह अपनी बात को दूसरों तक आसानी से पहुंचा सकता है। हालांकि यह जहां एक तरफ ताकत है तो वहीं दूसरी तरफ एक चुनौती भी है। प्रोपेगेंडा जर्नलिज्म का उदाहरण देते हुए मिश्र ने कहा कि आज के समय में कई ऐसे लोग हैं जो सोशल मीडिया पर सिर्फ प्रोपेगेंडा चलाने का काम कर रहे हैं जो समाज के विकास में घातक है। ऐसे में हमें इसे लेकर सावधान भी रहने की जरूरत है। फेक न्यूज का मुद्दा उठाते हुए लक्ष्मी शंकर ने कहा कि हमें हर आने वाली खबरों को क्रॉसचेक करना होगा और उसके बाद ही अपने ग्रुप्स में लोगों के साथ उसे साझा करना होगा।

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पोल टॉक के एडिटर संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि अब सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया पर खुद निगरानी रखने का सिस्टम बन रहा है। जैसे यूट्यूब में स्ट्राइक मारना, कॉपी कंटेंट पर रोक लगाना और फेक वीडियो को रिमूव करना तमाम चीजें बन गई हैं। कंटेंट पॉलिसी की वजह से अब सत्यता पर बात हो रही है। ऐसे ही डिजिटल मीडिया में भी इन सारी चीजों पर काम हो रहा है। पाण्डेय ने कहा कि अब मनमानी तरीके से यहां काम नहीं किया जा सकता। यहां वनवे कम्युनिकेशन नहीं है। यहां पर कई तरीके से जवाब और सवाल किये जाते हैं। दर्शक पसंद करता और अनलाइक, कमेंट करके बताता है। इसलिए डिजिटल मीडिया का ताकतवर बनता जा रहा है।

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कम्युनिकेशन टुडे की डिप्टी एडिटर तथा शहीद मंगल पांडे पीजी गर्ल्स कॉलेज मेरठ में अंग्रेजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. ऊषा साहनी ने कार्यक्रम का संचालन किया। मीडिया की शोधार्थी पृथ्वी सेंगर ने तकनीकी सहयोग संभाला। परिसंवाद भी राजस्थान विश्वविद्यालय की अंग्रेजी की विभाग की सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉक्टर जया चक्रवर्ती तथा कुशाभाऊ ठाकरे राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, रायपुर शहीद जयपुर के कल्याण सिंह कोठारी , बिहार की डॉ अर्चना भारती, नासिक से अल्पना जैन, मोतिहारी से अमृतेश कुमार ठाकुर , डॉ अमित शर्मा, सहित 20 राज्यों के 100 से अधिक प्रतिभागियों सहभागिता की।


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पोल टॉक और PollTalk.In के सम्पादक संतोष कुमार पांडेय देश के कई शहरों में पत्रकारिता कर चुके हैं। ये शहर जो कार्यस्थल बने वाराणसी , लखनऊ, आगरा, देहरादून, नोएडा, जयपुर, बिहार, हैदराबाद, पानीपत, सतना में रहे हैं। इन संस्थानों में दी सेवाएं राजस्थान पत्रिका , दैनिक भास्कर, एग्रो भास्कर, हिन्दुस्थान, जनसन्देश न्यूज़ चैनल, जनसन्देश टाइम्स, ईटीवी भारत में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किये. राजनीति की सही जानकारी और कुछ रोचक इन्टरव्यू दिखाना प्राथमिकता है।

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