सीओ और विकास दुबे में 22 साल पुरानी थी अदावत , सीओ से विकास था परेशान !

विकास दुबे बिल्हौर और कानपुर में पहले भी चर्चित रहा है लेकिन उसकी चर्चा तब ज्यादा हुआ जब उसने 8 पुलिस वालों पर हमला कर दिया। इस हमले में 8 पुलिस वाले शहीद हो गये. अब विकास दुबे भी एनकाउंटर में मारा जा चुका है. जब वो उज्जैन से कानपुर सड़क मार्ग से आ रहा था उसने कुछ बातों का खुलासा किया था. आइये जानते है वो बातें। उसने बताया था 22 साल पहले उसकी सीओ देवेंद्र मिश्रा से लड़ाई हो चुकी थी. मसलन, देवेंद्र मिश्रा सीओ रहते हुए डेढ़ साल से विकास दुबे पर लगातार कार्रवाई कर रहे थे. विकास को लगा की सीओ देवेंद्र मिश्रा उसका एनकाउंटर कर देंगे।

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उज्जैन मंदिर परिसर में बैठा हुआ विकास दुबे.
उज्जैन मंदिर परिसर में बैठा हुआ विकास दुबे.

  • उज्जैन से कानपुर आते समय एसटीएफ को उसने बताये कई राज
  • कल्याणपुर थाने में देवेंद्र मिश्रा थे सिपाही, विकास को किये थे बंद

संतोष कुमार पांडेय | सम्पादक

विकास दुबे बिल्हौर और कानपुर में पहले भी चर्चित रहा है लेकिन उसकी चर्चा तब ज्यादा हुआ जब उसने 8 पुलिस वालों पर हमला कर दिया। इस हमले में 8 पुलिस वाले शहीद हो गये. अब विकास दुबे भी एनकाउंटर में मारा जा चुका है. जब वो उज्जैन से कानपुर सड़क मार्ग से आ रहा था उसने कुछ बातों का खुलासा किया था. आइये जानते है वो बातें। उसने बताया था 22 साल पहले उसकी सीओ देवेंद्र मिश्रा से लड़ाई हो चुकी थी. मसलन, देवेंद्र मिश्रा सीओ रहते हुए डेढ़ साल से विकास दुबे पर लगातार कार्रवाई कर रहे थे. विकास को लगा की सीओ देवेंद्र मिश्रा उसका एनकाउंटर कर देंगे।

यह था मामला

22 साल पहले देवन्द्र मिश्रा जब कल्याणपुर थान में सिपाही थे तो उनका और विकास का आमना-सामना हुआ था. उस दौरान दोनों एक दूसरे पर बंदूक तन दिए थे। लेकिन ट्रिगर किसी ने नहीं दबाया था. जानकारी के अनुसार इस दौरान देवन्द्र ने विकास को जमकर पीटा था. और विकास को लॉकअप में डाला दिया था. यह मामला पूरे क्षेत्र में लोग जानते हैं. दरअसल, 1998 में विकास दुबे बसपा के विधायक रहे हरे कृष्ण श्रीवास्तव के साथ रहने लगा. इसी बीच उसकी हनक क्षेत्र में बढ़ने लगी. विकास दुबे स्मैक की 30 पुड़िया और बंदूक के साथ गिरफ़्तार हुआ था.

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थानेदार से भिड गया था विकास दुबे 

तत्कालीन थानेदार हरिमोहन यादव से विकास थाने में भीड़ गया था. उनके साथ मारपीट किया था. यह देखकर देवेंद्र मिश्रा विकास से भीड़ गए थे. तभी से इन दोनों में अदावत हो गई थी. उसने बताया कि जब देवेन्द्र मिश्रा को बिल्हौर का चार्ज मिला तो उसे पुरानी घटना याद आ गई. और वो चौबेपुर थाना इंचार्ज से सांठगांठ करने लगा. और उसे डर था सीओ उसका एनकाउंटर कर देंगे।

उस समय दो विधायकों ने उसे बचाया था

जब विकास दुबे थाने में बंद हुआ तो उसकी पैरवी करने के लिए उस समय के दो विधायक उसे बचाने आये थे.. भगवती सागर और राजाराम पाल थाने पहुंचकर उसकी पैरवी किये और जब बात नहीं बनी तो वहीँ धरने पर बैठ गए. फिर उसे छोड़ा गया.


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