एक तांगेवाले का लड़का कैसे बना प्रदेश का सबसे बड़ा माफिया, मायावती से हुई बड़ी दुश्मनी

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atiq ahmad

पोलटॉक नेटवर्क | लखनऊ 

उत्तर प्रदेश की सियासत हो या फिर देश की सियासत हो बाहुबल दोनों जगह ही नजर आता है। देश भर में तमाम ऐसे नेता हैं जिहोने अपराध जगत से सियासत में कदम रखा। जुर्म की दुनिया से राजनीतिक गलियारों में आने के बाद भी नेता जी गर्म की दुनिया से बाहर नहीं निकल पाए। उनके अपराध के इतिहास के कारण अक्सर वे सुर्ख़ियों का विषय बने रहते हैं। ऐसे ही उत्तर प्रदेश मेंअपराध जगत से सियासत में कदम रखने वाला नेता है जिसका नाम है अतीक अहमद।

कौन है अतीक अहमद

अतीक अहमद का जन्म 10 अगस्त 1962 को हुआ था। अतीक अहमद मूलत: उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जनपद के रहने वाले है। अतीक अहमद का मन बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में नहीं लगता था। नतीजन वह हाई स्कूल में फेल हो गया। हाई स्कूल के बाद अतीक अहमद ने पढ़ाई छोड़ कर जुर्म की दुनिया का रुख कर लिया। पूर्वांचल और इलाहाबाद में सरकारी ठेकेदारी, खनन और उगाही समेत कई अपराधों में उसका नाम सामने आने लगा।

कैसे माफिया बना अतीक अहमद 

कहतें हैं 1980 के दौर में इलाहाबाद (प्रयागराज) बदल था यानी विकास की और अग्रसर हो रहा था। नए नए उद्योग-धंधे लगाए जा रहा थे। नए नए कॉलेज और स्कूल बन रहे थे। संगम किनारे बसे शहर में जब बदलाव की धारा बहाई जा रही थी तब बड़े-बड़े सरकारी ठेके दिए जा रहे थे। शहर के छात्र नेता और दबंग हर कोई जल्द दौलतमंद होने के सपने संजोये अपने अपने रसूख का इस्तेमाल कर ठेके लेने का जुगाड़ कर रहा था। यही चाह शहर के चकिया मोहल्ले में रहने वाले फिरोज तांगेवाले के बेटे अतीक को लग गयी।

हाईस्कूल फेल हुआ लड़का जोकि इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर तांगा चलता था उसको अमीर बनने की चाहत जुर्म की दुनिया में घसीट लायी। 1979 में मात्र 17 साल की उम्र में अतीक अहमद पर पहला हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। जिसके बाद अतीक अहमद के जुर्म बढ़ने लगे। अतीक के पसरते पैर उस समय संगम नगरी में किसी को खटक रहे थे। दरअसल इलाहाबाद में चाँद बाबा का खौफ चलता था। कहा जाता है कि पुलिस भी उनके इलाके में नहीं जाती थी। चाँद बाबा के खौफ को खत्म करने के लिए नेताओं और पुलिस ने अतीक अहमद को शह दी और लोहे को लोहे से काटने का हथियार तैयार कर दिया लेकिन वो ये नहीं जानते थे कि ये हथियार एक दिन उनके गले की हड्डी बन जायेगा। पुलिस, नेता और बदमाशों के दम पर अतीक अहमद का कद बड़ा होता चला गया। जानने वाले बताते हैं कि अतीक अहमद का साम्राज्य इतना फैल गया था कि पुलिस के पकड़ लेने पर अतीक अहमद के लिए दिल्ली से फ़ोन आ जाते थे।

लेकिन अब तक अतीक को यह समझ आ चुका था की एकछत्र राज करने के लिए सियासी हाथ होना जरुरी है। 1889 में अतीक अहमद ने चुनाव लड़ा और इस चुनाव में  उसने चाँद बाबा को हराकर जीत हासिल की थी। चुनाव के कुछ महीने  बाद ही प्रयागराज के भरे चौराहे के बीच चाँद बाबा की हत्या कर दी गयी। बीच चौराहे पर केवल एक पुरानी जुर्म की दुनिया का सूर्यास्त ही नहीं हुआ बल्कि इलाहाबाद में अतीक अहमद के एक नए अपराध का सूर्योदय भी हो गया था।

अतीक अहमद का राजनीतिक सफर 

अतीक अहमद ने अपना पहला चुनाव 1989 में इलाहबाद पश्चिम सीट से लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 1991 और 1993 का चुनाव भी अतीक अहमद ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीता। 1996 के चुनाव में अतीक अहमद ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 1999 में अतीक अहमद अपना दल का हाथ थाम प्रतापगढ़ से चुनाव लड़े और हार गए। 2002 में अतीक एक बार फिर से अपना दल से चुनाव लड़े और विधायक चुने गए। उत्तर प्रदेश में जब 2003 में मुलायम सिंह की सरकार बनी तो एक बार फिर से अतीक सपा की साइकल पर सवार हो गए। 2004 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अतीक को फूलपुर संसदीय क्षेत्र से टिकट दिया और वह सांसद बन गए।

2007 में उत्तर प्रदेश की सत्ता में फिर से परिवर्तन हुआ और सीएम की कुर्सी पर विराजमान हुईं बसपा सुप्रीमो मायावती। मायवती के राज में अतीक अहमद का सिक्का कमजोर होने लगा। समाजवादी पार्टी ने अतीक अहमद को बाहर का रास्ता दिखा दिया और मायावती ने अतीक को सबक सीखना शुरू कर दिया। मायावती ने अतीक अहमद को मोस्ट वांटेड घोषित करवा दिया। अतीक की करोड़ों की सम्पति सीज कर दी गयी और इमारतों को गिरा दिया गया। अतीक अहमद फरार घोषित कर दिया गया। दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर यूपी पुलिस को सौंप दिया जिसके बाद अतीक का ठिकाना जेल बन गया।

2012 का चुनाव लड़ने के लिए अतीक ने जमानत अर्जी लगाई और अतीक को जमानत दे दी गयी। 2012 के चुनाव में अतीक अहमद ने एक बार फिर से चुनाव लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उसे राजू पाल की पत्नी पूजा पाल से हार का सामना करना पड़ा। 2012 में सपा की सरकार बनी और सटीक अहमद ने फिर से अपना रसूख दिखाना शुरू कर दिया। 2017 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार आने के बाद से अतीक अहमद पर लगातार क़ानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। सरकार ने अतीक की करोड़ों रूपये की सम्पति कुर्क कर दी। तमाम इमारतों को पर बुलडोजर चल चुका है। फिलहाल 80 के दशक से शुरू हुआ ठीक का साम्राज्य ध्वस्त होने की कगार पर आ पहुंचा है।

रिपोर्ट- पत्रकार आदित्य कुमार 


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