दृष्टिकोण : जैक मा मुद्दे पर भारत उठाए मौके का लाभ

वुहान लब से फैले विश्वव्यापी कोरोना वायरस के कारण इसका दंश झेल रहे देश अब भारत की तरफ टक टकी भरी निगाह से देख रहे है।

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deepak paney
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  • भारत को विश्वभर से निवेश करने और उद्यमियों की सुरक्षा को लेकर ऐलान करना चाहिए
  • चीन का नाम लिए बगैर वैश्विक आश्वासन देना चाहिए

दीपक पाण्डेय | लेखक सामरिक मामलों के विश्लेषक है 

चीन के गिरते साख के बीच विश्वभर की विनिर्माण इकाईयां चीन से स्थानांतरित होकर भारत आना चाह रही है। शी जिनपिंग सरकार से तकरार के बाद दो माह से अधिक समय से गायब चल रहे अलीबाबा व आंट ग्रुप के संस्थापक जैक मा को लेकर भारत को इसका वैश्विक लाभ उठा सकता है।

भारत को विश्वभर से निवेश करने और उद्यमियों की सुरक्षा को लेकर ऐलान करना चाहिए कि यहां उद्यमी स्वतंत्र और सुरक्षित है। वे अपनी हर बातों को बिना डर के रख सकते हैं। सरकार इन सब बातों का ध्यान रखेगी। चीन का नाम लिए बगैर वैश्विक आश्वासन देना चाहिए। इससे चीन की छवि को और धक्का पहुचेगा। क्योंकि विश्व में भारत के विरोध में यह तानाशाह देश कभी भी मौका नहीं चूकता। चाहे पीओके में पाकिस्तान को स्टैंड लेना, पाकिस्तान के पक्ष में आतंकवादियों को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित न होने देना, संयुक्त राष्ट्र में भारत के विरोध में बिल लाने समेत कई मुद्दे है। इसी तरह भारत को भी यह मौका नहीं चूकना चाहिए। इससे चीन के उलट भारत पर कारोबारियों का भरोसा और बढ़ेगा। दुनिया में एक सकरात्मक संदेश जाएगा। चीन को समुचित जवाब मिलेगा।

देखा जाए तो इससे पहले भारत ने अमेरिका और चीन व्यापार कोल्ड वार का उतना फायदा नहीं उठा पाया जितना उठाना चाहिए था। इस ऐलान से को निवेश की सोच रहे हैं। उनका रूझान बढ़ेगा। आकर्षक नीतियां उन्हें खींच लाएगी।
यह तो जगजाहिर है कि होंग कोंग में लोकतंत्र को गला घोटना, कॉरोना वायरस का केंद्र रहे वुहान लैब की जानकारी छुपाना व वायरस को फैलने देना, शिंजियांग प्रांत में यूइगर मुस्लिमो पर अत्याचार करने समेत कई घटनाओं से चीन का तानाशाही रवैया दुनिया के सामने है।

भारत के खिलाफ जिनपिंग का बयान दुनिया को भटकाने वाला
चीन ने हाल ही में बयान दिया कि अपने दुश्मन देश के साथ युद्ध लड़ने को तैयार रहे। देखा जाए तो इस बयान का कोई मायने नहीं। भारत और चीन में तल्खी कम हुई है। चीन ने सीमा पर से अपने दो लाख पी एल ए सेना को पीछे खींच लिया है। ऐसे में साफ संकेत जाता है कि मूल मुद्दे यानी जैक मा के दो माह से गायब होने के मुद्दे से दुनिया का ध्यान भटकाना चाहता है। जैक मा को चीन में अज्ञात स्थान पर रखा गया है। सिर्फ उन्हें है नहीं और कई उद्यमियों के साथ ऐसा ही हुआ है। इनमें एक चर्चित अरबपति बिजनेस मैन लियू कियागदोंग व अन्य काफी दिनों से गायब हैं। वह यहां जे डी डॉट काम का नेतृत्व करते हैं। इस हश्र से बचने के लिए उनकी कंपनी ने दो बार माफी मांगी और मैनेजमेंट में बदलाव कर दिया है।

जैक मा के बढ़ते प्रभाव से था चिंतित
बताया तो यह भी जाता है कि चीन इन उद्यमियों के बढ़ते प्रभाव से चिंतित था। ऐसे में वह मौके के तालाश में था। मौका मिलने पर जैक मा को गायब कर दिया। जैक मा ने चीन के व्याजखोर वितिय नियामकों व सरकारी बैंकों की पीछले साल आलोचना की थी। इसके फलस्वरूप उनके आंत ग्रुप के 37 अरब डॉलर के आई पी ओ को निलंबित कर दिया।

ठोस जवाब जरूरी
भारत में 26 जनवरी में इंग्लैंड के प्राइम मिनिस्टर बोरिस जॉनसन ने अपने देश कोरॉना के बढ़ते चौथे स्ट्रेंथ के कारण अपनी यात्रा रद्द कर दी है। ऐसे में भारत को बतौर मुख्य अतिथि अपने मित्र देश व आसियान देशों से किसी को बुलाना चाहिए। चीन के संबंध इन देशों से ठीक नहीं है। 26 जनवरी के दिन उद्यमियों के लिए ऐलान करना चाहिए।


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