विपक्ष की आलोचना से परेशान हुए झारखंड के शिक्षामंत्री, 11वीं में लिया एडमिशन, बच्चों के साथ क्लास में पढ़ेंगे

नेताओं की पढाई को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहते हैं. लेकिन शिक्षा मंत्री अगर कम पढ़ा लिखा हो तो मामला और ज्यादा गंभीर हो जाता है. ऐसे में संबधित नेता को जवाब देना मुश्किल हो जाता है. उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है. ऐसी ही कुछ कहानी है झारखंड के शिक्षा मंत्री की कहानी बताते है. जगरनाथ ने बस मैट्रिक तक पढाई की थी. गिरिडीह जिले के बड़े नेता है.

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जगरनाथ महतो, झारखंड शिक्षामंत्री
जगरनाथ महतो, झारखंड शिक्षामंत्री.

  • गिरिडीह ज़िले की डुमरी सीट से 4 बार से जेएमएम से लगातार हैं विधायक
  • मंत्री ने कहा- परिस्थितियों ने मुझे शिक्षा से दूर किया था

संतोष कुमार पाण्डेय | सम्पादक

नेताओं की पढाई को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहते हैं. लेकिन शिक्षा मंत्री अगर कम पढ़ा लिखा हो तो मामला और ज्यादा गंभीर हो जाता है. ऐसे में संबधित नेता को जवाब देना मुश्किल हो जाता है. उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है. ऐसी ही कुछ कहानी है झारखंड के शिक्षा मंत्री की कहानी बताते है. जगरनाथ ने बस मैट्रिक तक पढाई की थी. गिरिडीह जिले के बड़े नेता है. झारखण्ड मुक्ति मोर्चा की पार्टी से चार बार से लगातार विधायक है. महतो इस समय स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, उत्पाद एवं मद्य निषेद्ध विभाग के मंत्री है.

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आइये जानते हैं क्यों पढाई रुकी…

झारखण्ड में जब हेमंत सोरेन की सरकार बनी तो जगरनाथ को शिक्षा मंत्री बनाया गया. लेकिन इनकी शिक्षा को लेकर कई बार व्यंग किया गया. यह व्यंग मंत्री को अच्छा नहीं लगा. फिर इन्होने पढाई की बात मन में ठान ली. जिसको इन्होंने स्वयं बताया है. जगरनाथ महतो सोमवार 10 अगस्त को कॉलेज पहुंचे. जहां उन्होंने 1100 रुपए का फॉर्म भरा और दाखिला ले लिया. उन्होंने ट्वीट किया है कि स्वयं में सुधार करके शुरुआत कर रहा हूँ। मैट्रिक पास करने के बाद, परिस्थितियों ने मुझे शिक्षा से दूर किया था…आज उसी दूरी को पाटने की अभिलाषा ने प्रेरित किया है.. इंटरमीडिएट के शिक्षा हेतु , मैंने अपना नामांकन देवीमहतो इंटर कॉलेज नावाडीह में किया है।

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शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने वर्ष 1995 में चंद्रपुरा प्रखंड के नेहरू उच्च विद्यालय तेलो से मैट्रिक की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में पास की थी. वह एक छोटे किसान परिवार से आते हैं, गरीबी की वजह से भी आगे की पढ़ाई नहीं कर पाए. इसका मलाल हमेशा ही रहता था. लेकिन इस बार अपनी इस स्थिति को वह पूरी तरह से बदलने के लिए तैयार हैं.

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कॉलेज के प्रचार्य दिनेश प्रसाद वर्णवाल ने कहा, ‘शिक्षा मंत्री ही इस कॉलेज समिति के चेयरमैन हैं. कॉलेज के संचालन के लिए एक गवर्निंग बॉडी है. कॉलेज में सभी छात्रों के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है.’

 


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