16 साल की उम्र में दिया पहला भाषण, प्रियंका गाँधी से वाड्रा तक ऐसे गुजरा है प्रियंका का सफर

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कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी न तो सांसद और न ही विधायक यहां तक प्रियंका गण्डजी ने आज तक कोई भी चुनाव भी लड़ा बावजूद इसके प्रियंका गाँधी का नाम देश के बड़े नेताओं में गिना जाता है। प्रियंका गांधी देश के सबसे पुराने राजनीतिक घरानों ने से एक गांधी परिवार से आती हैं। हाल में ही उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 में प्रियंका गांधी की अत्यंत सक्रियता देखने को मिली थी। इस लेख में प्रियंका गांधी के राजनीतिक सफर व उनसे जुड़े कुछ अन्य रोचक तथ्यों के बारे में जानेंगे।

कौन हैं प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी का जन्म 12 जनवरी 1972 को भारत की राजधानी दिल्ली में हुआ था। प्रियंका गाँधी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी और कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी की बेटी हैं। प्रियंका गांधी ने अपनी स्कूल की पढ़ाई दिल्ली के मॉडर्न स्कूल एवं कान्वेंट ऑफ जीसस एवं मैरी स्कूल से पूरी की। इन्होने अपना ग्रेजुएशन दिल्ली यूनिवर्सिटी के जीसस एवं मैरी कॉलेज से साइकोलॉजी में पूरा किया है। साइकोलॉजी में डिग्री हासिल करने के बाद प्रियंका ने सन 2010 में बुद्धिस्ट स्टडीज में अपना एमए की डिग्री हासिल की। प्रियंका गाँधी का विवाह 18 फरवरी 1997 को व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा से हुई। प्रियंका गाँधी के एक बेटा और एक बेटी है। प्रियंका गाँधी के बेटे का नाम रेहान है और बेटी का नाम मिराया है।

प्रियंका गाँधी की की राजनीतिक सक्रियता 

प्रियंका गाँधी वाड्रा को शुरुआत से राजनीति में कोई रूचि नहीं थी। प्रियंका गाँधी का मन फोटोग्राफी में ज्यादा लगता है। लेकिन राजनीतिक घराने में जन्मी प्रियंका गाँधी खुद को ज्यादा से समय तक राजनीतिक से दूर नहीं रख सकीं। हालाँकि प्रियंका गाँधी सक्रीय रूप से राजनीति का हिस्सा नहीं बनी परन्तु राजनीति से दूर भी नहीं रहीं।

प्रियंका की उम्र जब 16-17 साल थी तब उन्होंने सार्वजानिक रूप से भाषण दिया था जिसे लोग आज भी याद करते हैं। प्रियंका गाँधी के उस भाषण के बाद उन्हें सक्रीय राजनीती में लाने की मांग उठी थी। हालांकि कांग्रेस पार्टी उन्हें किसी ब्रम्हास्त्र के रूप में प्रयोग करना चाह रही थी। शुरुआत में प्रियंका गाँधी का राजनीतिक सफर केवल अपनी मां की संसदीय सीट रायबरेली और अमेठी तक ही सीमित था। विधानसभा चुनाव के दौरान भी प्रियंका गाँधी की सक्रियता केवल रायबरेली और अमेठी जिले के सीटों पर ही होती थी। 2019 तक चाहे वह लोकसभा चुनाव हो या फिर विधानसभा चुनाव प्रियंका गांधी केवल रायबरेली और अमेठी की सीटों पर ही नजर आती थीं।

राजनीती में पूर्णरूप से सक्रियता

2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक 23 जनवरी 2019 को प्रियंका गांधी जी पूरी तरह से राजनीति में शामिल हो गई है। कांग्रेस पार्टी में लम्बे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि प्रियंका गाँधी देश की सक्रीय राजनीति का हिस्सा बने। 2019 में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी के कहने पर प्रियंका गाँधी ने राजनीति में औपचारिक रूप से कदम रखा। तब राहुल गाँधी द्वारा प्रियंका गाँधी को कांग्रेस पार्टी का महासचिव बनाया गया था। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रियंका गाँधी की सक्रियता का कोई असर देखने को नहीं मिला था।

वहीं, हाल ही में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में भी प्रियंका गाँधी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश भरती नजर आयीं थीं। देश में सबसे अधिक जनसँख्या वाले राज्य की चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी प्रियंका गाँधी ने संभाली। 2022 के चुनाव प्रचार में प्रियंका गाँधी की एंट्री बड़े ही जोर शोर और चर्चा के साथ हुई। कहा जा रहा था कि उत्तर प्रदेश में लगातार सियासी जमीन खो रहीं कांग्रेस पार्टी की पालनहार प्रियंका गाँधी बन सकती हैं। प्रियंका गाँधी की चुनावी सक्रियता बावजूद कांग्रेस पार्टी को 2022 के चुनाव में निराशा हाथ लगी। 403 सीटों पर 40 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी के चुनाव लादिन कांग्रेस पार्टी को प्रियंका गाँधी मात्र 2 सीट जिताने में कामयाब हो पायीं।


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