इटली से भारत तक…. क्या आप सोनिया गाँधी के बारे में ये बाते जानते हैं

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Sonia-Gandhi

दुनिया भर की 100 ताकतवर महिलाओं की सूची में जगह बनाने वाली कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। देश की राजनीति में सोनिया गांधी का अपना एक स्थान है। सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी की लगभग दो दशकों से अध्यक्ष पद पर हैं इस लेख में हम सोनिया गांधी के शुरुआती जीवन से लेकर उनके राजनीतिक सफर के बारे में जानेंगे।

कौन हैं सोनिया गांधी

भारत में सोनिया गांधी की पहचान नेहरू गांधी परिवार से है । भारत में सोनिया गांधी बतौर कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी होने के नाते जानी जाती हैं। सोनिया गांधी का वास्तविक नाम एडविग एंटोनिया एल्बीना मायनो है। सोनिया गांधी का जन्म 9 दिसंबर 1946 को इटली के लुधियाना शहर के कॉनट्रडा मैनी जिला/क्वाटर के वेनेटो में विसेन्ज़ा से 30 किमी दूर एक छोटे से गाँव में हुआ, जहाँ वे अपने परिवार के साथ रहती थीं। सोनिया गांधी के पिता स्तेफेनो मैनो, जोकि ओर्बस्सानो में ही एक छोटे से व्यापार के मालिक थे। इनके पिता स्तेफेनो  ने द्वितीय विश्व युद्ध में पूर्वी मोर्चे पर, एडोल्फ हिटलर के साथ सोवियत सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी। सोनिया गाँधी ने अपनी युवास्था ओर्बस्सानो में व्यतीत की, इसके बाद टूरिन के पास एक शहर है, जहाँ एक पारंपरिक रोमन कैथोलिक परिवार में ये पली बढ़ी। सोनिया गाँधी ने ओर्बसानो में एक कैथोलिक स्कूल में पढ़ाई की थी। इसके बाद अंग्रेजी और इंजीनियरिंग पढ़ने के लिए वो 1964 में कैम्ब्रिज चली गईं थीं। सन 1983 में इसके पिता की मृत्यु हो गई,सोनिया गाँधी की  माँ और दो बहनें अब भी ओर्बस्सानो  में ही रह रहीं हैं।

सोनिया गाँधी की राजीव गांधी से मुलाकात  

सोनिया गाँधी ने शुरआती शिक्षा ओर्बसानो में एक कैथोलिक स्कूल से ग्रहण की। 1964 में सोनिया गाँधी, कैम्ब्रिज शहर में “बेल एजुकेशन ट्रस्ट के भाषा स्कूल” में अंग्रेजी का अध्ययन किया। सोनिया गाँधी ने 1965 में कैम्ब्रिज के एक “स्माल लैंग्वेज कॉलेज” में पढाई कर रहीं थी और उसी उसी विश्वविद्यालय के रेस्तरां में वे एक वेट्रेस के रूप में काम किया करती थीं। सोनिया गाँधी की उसी रेस्तरां में एक एक सुंदर युवा इंजीनियरिंग छात्र से हुई जोकि भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के बेटे राजीव गाँधी थे। 1968 में सोनिया ने राजीव गाँधी से हिन्दू धर्म के अनुसार शादी की, उसके बाद वे भारत आकर रहने लगीं।

सोनिया गाँधी के एक दो बच्चे हुए, एक बेटा राहुल गाँधी जिनका जन्म सन 1970 में हुआ और एक बेटी प्रियंका गाँधी जिनका जन्म सन 1972 में हुआ था। राजनीतिक पृष्ठ्भूमि से आने वाले राजीव गाँधी राजनीति में न होकर पायलट थे और सोनिया गाँधी ग्रहणी का जीवन व्यतीत कर रहीं थीं।

सोनिया गाँधी की राजनीति में भागीदारी 

वैसे तो सोनिया गाँधी को राजनीति बिल्कुल भी नहीं पसंद थी और वह राजीव गाँधी को भी राजनीति से दूर रहने की सलाह देतीं थीं। लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद राजीव गाँधी ने सक्रीय राजनीति में आने का फैसला किया। हालाँकि तब भी सोनिया गाँधी जनता से दूर रहीं। लेकिन सास की हत्या और राजीव गाँधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सोनिया गांधी की सार्वजनिक रूप से भागीदारी बढ़ने लगी। सोनिया गाँधी अपने पति के साथ भारत के राज्यों के दौरे पर जाने लगीं। सोनिया गाँधी ने साल 1984 में अपने पति की भाभी मेनका गाँधी के खिलाफ अमेठी में अभियान चलाया। दरअसल, सोनिया गाँधी की इटली के एक व्यापारी जिस पर बोफोर्स कांड में एक बिचौलिया होने का आरोप लगाया गया था, उसके साथ कथित दोस्ती होने का आरोप लगा। हालांकि राजीव गाँधी के 5 साल के कार्यकाल के अंत में वह बोफोर्स कांड से बाहर हो गए।

सोनिया गाँधी की राजनीति में एंट्री

सोनिया गाँधी के पति राजीव गाँधी की 1991 में हत्या कर दी गयी जिसके बाद उनके सामने प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव रखा गया जिसे सोनिया गाँधी ने मना कर दिया। कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने पी वी नरसिम्हा राव को अपना नेता चुना और वह प्रधानमंत्री बने। 1996 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी चुनाव हार गयी जिसके बाद पार्टी के बड़े नेता जैसे माधवराव सिंधिया, राजेश पायलट, नारायण दत्त तिवारी, अर्जुन सिंह, ममता बेनर्जी, जी.के. मूपनर, पी. चिदंबरम और जयंती नटराजन, इसके आलावा और भी कई वरिष्ठ नेताओं ने निवर्तमान राष्ट्रपति सीताराम केसरी के खिलाफ खुला विद्रोह किया।इनमें से कुछ नेताओं ने तो पार्टी छोड़ कर दूसरा दल बना लिया।

टूटी हुई पार्टी को वापस खड़ा करने के लिए 1997 में कलकत्ता पूर्ण सत्र में सोनिया गाँधी एक प्राथमिक सदस्य के रूप में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुईं और सन 1998 में पार्टी की नेता बन गईं। उसके बाद वे सन 1999 में सोनिया गाँधी ने कर्णाटक की  बेल्लारी और उत्तर प्रदेश की अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ीं। वे दोनों सीटें जीती, किन्तु उन्होंने अमेठी को चुना। सोनिया गाँधी ने  बेल्लारी में भाजपा की वरिष्ठ नेता रहीं सुषमा स्वराज को हराया था।

सोनिया गाँधी की कुछ खास बातें 

  • प्राथमिक सदस्य के रूप में पार्टी में शामिल होने के 62 दिनों के भीतर सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं थीं।
  • सन 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री पद के तहत भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन सरकार के कार्यकाल के दौरान, सोनिया लोकसभा में विपक्ष की नेता चुनी गईं।
  • 2 अक्टूबर सन 2007 को महात्मा गाँधी जयंती के दिन सोनिया ने संयुक्त राष्ट्र को संबोधित किया था। संयुक्त राष्ट्र ने 15 जुलाई सन 2007 को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसके बाद, इस दिन को अहिंसा के अन्तर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
  •  2013 में सोनिया पहली थीं, जोकि 15 साल तक लगातार कांग्रेस की अध्यक्ष बनी रहीं।
  • सोनिया गाँधी वर्तमान में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष हैं।
  • 2004 में सोनिया गाँधी का नाम दुनिया की सबसे ताकतवर महिला के रूप में फोर्ब्स पत्रिका में उल्लेख किया गया।
  • सोनिया गाँधी ने 2006 में “ब्रसेल्स विश्वविद्यालय” से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
  • सोनिया को बेल्जियम की सरकार द्वारा 2006 में ‘सम्राट लियोपोल्ड’ के साथ सम्मानित किया गया।
  • सोनिया गाँधी 2007 और 2008 के समय में दुनिया के 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली लोगों में से एक थीं।

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