महाराज से माननीय तक ऐसा रहा है अमेठी के राजा संजय सिंह का सफर

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sanjay singh

पोलटॉक नेटवर्क | लखनऊ 

देश की सियासत में रियासतों और रजवाड़ों की अपनी भूमिका रही है। देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश भी इस राजशाही से अछूता नहीं रहा है। एक समय हुआ करता था जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में रियासतों का दखल काफी हद तक हुआ करता था। हालांकि उसके बाद एक के बाद एक चुनाव होते गए और राजशाही का दखल कम होता चला गया। इस लेख में हम कांग्रेस पार्टी का गढ़ माने जाने वाले अमेठी के राजा संजय सिंह के बारे में जाने वाले हैं।

कौन हैं अमेठी के राजा संजय सिंह

अमेठी के राजघराने के वारिस संजय सिंह के बारे में जानने से पहले थोड़ा अमेठी के राजघराने के बारे में जान लेना उचित होगा। अमेठी राज्य की स्थापना कछवाहा वंश के राजा ईष्ट देव के त्याग के कारण हुई थी।उन्होंने घोषणा की थी कि वह अपना नौगढ़ (वर्तमान का ग्वालियर) साम्राज्य दान में दे देंगे। राजा ईष्ट देव के पुत्र सोढ़ देव ने अपने पिता की इच्छा अनुसार नौगढ़ साम्राज्य दान कर दिया और ग्वालियर से अमेठी आ बसे। संजय सिंह इसी कछवाहा वंश के 34 वीं पीढ़ी के राजा हैं।

अमेठी के राजा संजय सिंह का राजनीतिक सफर

अमेठी का राजघराना देश के आजाद होने के बाद से ही राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गया था। देश आजाद होने के बाद 1952 में हुए पहले चुनाव में अमेठी राज्य परिवार से राजा रणंजय सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। रणंजय सिंह ने 1969 में जनसंघ और 1974 ने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीता। रणंजय सिंह 1962 से 1967 तक अमेठी के सांसद रहे। संजय सिंह को राजनीतिक विरासत अपने पिता रणंजय सिंह से विरासत में हासिल हुई। रणंजय सिंह के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को बेटे संजय सिंह बखूबी संभाल रहे हैं। 1980 से 1989 तक कांग्रेस पार्टी के टिकट से अमेठी के विधायक रहे इस दौरान व कई विभागों के मंत्री पद पर भी रह चुके हैं।

संजय सिंह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी के दोस्त रहे हैं। संजय गांधी को अमेठी लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने वाले संजय सिंह ही थे। 1989 के चुनाव से पहले संजय सिंह ने वी पी सिंह के द्वारा बनाए गए जनता दल पार्टी का हाथ थाम लिया। 1989 के चुनाव में संजय सिंह अपने मित्र संजय गाँधी के खिलाफ चुनाव लड़े हालाँकि इस चुनाव में संजय सिंह के हाथ हार लगी थी।

सोनिया गाँधी से मिली हार 

संजय सिंह इसके बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। 1998 के लोकसभा चुनाव में संजय सिंह भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर अमेठी से पर्चा दाखिल किया वहीँ उनके सामने कांग्रेस पार्टी से सोनिया गाँधी ने चुनाव लड़ा। नतीजन संजय सिंह चुनाव हार गए। संजय सिंह 2003 में एक बार घर वापसी करते हुए कांग्रेस में शामिल हो गए। 2009 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट से सुल्तानपुर से जीत हासिल की। बाद में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजा था लेकिन कार्यकाल खत्म होने से पहले वह जुलाई 2019 में कांग्रेस का साथ छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए।

रिपोर्ट- पत्रकार आदित्य कुमार 


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