तबलीगी जमात क्या है और किसने की थी इसकी स्थापना, क्या करती है ये जमात!

150 मिलियन मतलब डेढ़ करोड़ लोग इसके अनुयायी हैं

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कोरोना की महामारी से पूरी दुनिया परेशान है. इसी को लेकर भारत में भी लॉकडाउन है. इसीबीच तबलीगी जमात ही चर्चा में आ गया है. तो क्या आपको पता है कि यह क्या है और किसने इसकी स्थापना की थी. आइए इस पर आधारित पढिये पोलटॉक की ये ख़ास रिपोर्ट.

तबलीगी जमातियों का फोटो.

मुहम्मद इलियास थे संस्थापक

मुहम्मद इलियास भारतीय मुस्लिम विद्वान थे. इनका जन्म उत्तरप्रदेश के मुजफ्फनगर के कांधला में वर्ष 1885/1886 में हुआ था. इनका 13 July 1944 को दिल्ली के निजाम्मुद्दीन में निधन हो गया था. वर्ष 1925 में इन्होने तबलीगी जमात का गठन किया था.

तबलीगी जमातियों का फोटो.

क्या करता है तबलीगी जमात

तबलीग़ी जमात विश्व की सतह पर सुन्नी इस्लामी धर्म प्रचार आंदोलन है. जो मुसलमानों को मूल इस्लामी पद्दतियों की तरफ़ बुलाता है। खास तौर पर धार्मिक तरीके, वेशाभूश, वैयक्तिक गतिविधियां। परंपराओं के अनुसार, मौलाना मुहम्मद इलियास ने लोगों को धार्मिक शिक्षा देकर दिल्ली से सटे मेवात में अपना काम शुरू किया।

डेढ़ करोड़ हैं इनके अनुयायी

तबलीगी जमात के अनुयायी पूरी दुनिया में हैं. 150 मिलियन मतलब डेढ़ करोड़ लोग इसके अनुयायी हैं. दक्षिण एशिया में इनकी संख्या सबसे अधिक है. 195 देशों में इनके अनुयायी हैं. इस जमाअत के मुख्य छह उद्देश्य हैं. उसूल (कलिमा, सलात, इल्म, इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत, दावत-ओ-तबलीग) हैं। यह एक धर्म प्रचार आंदोलन माना गया।

तबलीगी जमातियों का फोटो.

इन देशों में ज्यादा प्रभावित

बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान, ग्रेट ब्रिटेन, इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण अफ़्रीका, श्रीलंका, यमन, किर्गिज़स्तान, रूस, सोमालिया, नाईजीरिया, कनाडा, मेक्सिको, हॉन्ग कॉन्ग, फ़्रान्स, जर्मनी में इनके अनुयायी हैं.

मामला क्या है ?

राजधानी दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में एक से 15 मार्च तक तबलीगी जमात में हिस्सा लेने के लिए दो हजार से ज्यादा लोग पहुंचे थे. इसमें देश के अलग-अलग राज्यों और विदेश से कुल 1830 लोग मरकज में शामिल हुए. मरकज के आसपास व दिल्ली के करीब 500 से ज्यादा लोग थे. जिसमें कहा गया कि तब्लीग-ए-जमात 100 साल से पुरानी संस्था है, जिसका हेडक्वार्टर दिल्ली की बस्ती निज़ामुद्दीन में है. यहां देश-विदेश से लोग लगातार सालों भर आते रहते है. जिसमें लोग दो दिन, पांच दिन या 40 दिन के लिए आते हैं. लोग मरकज में ही रहते हैं और यहीं से तबलीगी का काम करते है.


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