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फ्लोर टेस्ट क्या होता है और कितने तरह का !


कर्नाटक विधानसभा में २०१९ में हुआ था फ्लोर टेस्ट !

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार को शुक्रवार की शाम 5 बजे फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दे दिया है. इसके बाद से ही कयास लगाये जा रहा है कि क्या कमलनाथ की सरकार रहेगी या जायेगी ? तो ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि फ्लोर टेस्ट क्या होता है और इसके प्रकार क्या है ? पढ़िये पोल टॉक की ये स्पेशल रिपोर्ट.

क्या होता है फ्लोर टेस्ट ?

फ्लोर टेस्ट के जरिए यह फैसला लिया जाता है कि वर्तमान सरकार या मुख्यमंत्री के पास पर्याप्त बहुमत है या नहीं. चुने हुए विधायक अपने मत के जरिए सरकार के भविष्य का फैसला करते हैं. यह पिछले वर्ष कर्नाटक में हुआ था.

जिसे सभी ने देखा था. इसमें राज्यपाल का किसी भी तरह से कोई हस्तक्षेप नहीं होता. मध्यप्रदेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पूरा विडियोग्राफी किया जाएगा.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ .
कितने प्रकार का होता है फ्लोर टेस्ट ?
सामान्य फ्लोर टेस्ट

सामान्य फ्लोर टेस्ट तब होता है, जब कोई पार्टी या फिर गठबंधन का नेता मुख्यमंत्री बनता है। इसके लिए उसे सदन में बहुमत साबित करना होता है। अगर सरकार पर कोई संकट आता है या फिर राज्यपाल को लगे कि सरकार सदन का विश्वास खो चुकी है, उस स्थिति में भी सामान्य फ्लोर टेस्ट होता है।

उदाहरण के तौर पर जब जुलाई 2019 में कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार पर संकट आया तो उस समय फ्लोर टेस्ट कराया गया. वोटिंग के दौरान कांग्रेस-जेडीएस के पक्ष में 99 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 105 वोट पड़े। इस तरह कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिर गई और येदियुरप्पा ने बाजी मार दी। और कर्नाटक में बीजेपी की सरकार बन गई.

लालजी टंडन , राज्यपाल!
कंपोजिट फ्लोर टेस्ट!

जब एक से ज्यादा नेता सरकार बनाने का दावा करते हैं, इस स्थिति में कंपोजिट फ्लोर कराया जाता है। इसके लिए राज्यपाल विशेष सत्र बुलात हैं और फिर ये देखा जाता है कि किस नेता के पास बहुमत है। इसके बाद सदन में विधायक खड़े होकर या फिर हाथ उठाकर, ध्वनिमत से या डिविजन के माध्यम से वोट देते हैं। इसका बेहतरीन उदाहरण उत्तरप्रदेश का है.

जब फरवरी 1998 में यूपी में कल्याण सिंह के नेतृत्व वाली जनता पार्टी की सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था। तब कांग्रेस के जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री बनाया गया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो कोर्ट ने 48 घंटे के अंदर कंपोजिट फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश दिया। 225 वोट हासिल कर कल्याण सिंह जीत गए। जगदंबिका पाल को महज 195 वोट मिले थे। इसी दौरान जगदम्बिका पाल एक दिन के लिए सीएम बने थे.


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पोल टॉक और PollTalk.In के सम्पादक संतोष कुमार पांडेय देश के कई शहरों में पत्रकारिता कर चुके हैं। ये शहर जो कार्यस्थल बने वाराणसी , लखनऊ, आगरा, देहरादून, नोएडा, जयपुर, बिहार, हैदराबाद, पानीपत, सतना में रहे हैं। इन संस्थानों में दी सेवाएं राजस्थान पत्रिका , दैनिक भास्कर, एग्रो भास्कर, हिन्दुस्थान, जनसन्देश न्यूज़ चैनल, जनसन्देश टाइम्स, ईटीवी भारत में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किये. राजनीति की सही जानकारी और कुछ रोचक इन्टरव्यू दिखाना प्राथमिकता है।

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