FULL STORY OM PRAKASH RAJBHAR: ओम प्रकाश राजभर ऐसे बन गए यूपी के चर्चित नेता

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  • ओमप्रकाश राजभर ने सुहेलदेव भारतीय समाज नाम से नई पार्टी बनाई
  • 2017 में राजभर के चार प्रत्याशी विधानसभा चुनाव जीत गए थे

पोल टॉक नेटवर्क | लखनऊ

हमेशा अपने चर्चित बयानों को लेकर के उत्तर प्रदेश (UTTAR PRADESH) की राजनीति किस सुर्खियों में बने रहने वाले ओमप्रकाश राजभर (OM PRAKASH RAJBHAR) को उत्तर प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाला कौन नहीं जानता होगा। ओमप्रकाश राजभर (OM PRAKASH RAJBHAR) वर्तमान में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष हैं। लेकिन राजभर (OM PRAKASH RAJBHAR) का राजनीतिक जीवन बड़ा संघर्ष भरा रहा है। इस लेख में हम संक्षिप्त में ओमप्रकाश राजभर (OM PRAKASH RAJBHAR) के राजनीतिक सफर के बारे में जाने वाले हैं।

राजभर की शिक्षा और शुरुआती जीवन कुछ ऐसा ही रहा

ओमप्रकाश राजभर (OM PRAKASH RAJBHAR) का जन्म 15 अक्टूबर 1962 को हुआ था उनके पिता का नाम सन्नू राजभर है जो कि कोयला खदान में काम करते थे। ओमप्रकाश राजभर (OM PRAKASH RAJBHAR) ने साल 1983 में वाराणसी के बड़ागांव स्थित बलदेव डिग्री कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली उसके बाद उन्होंने राजनीति शास्त्र से परास्नातक किया।

पढाई के दौरान आर्थिक कमजोरी के चलते ओमप्रकाश राजभर टेंपो चलाकर अपना खर्चा निकालते थे। थोड़ा पैसे होने के बाद उन्होंने एक जीप खरीदी और पैसेंजर ढोने का काम शुरू किया। ओमप्रकाश राजभर (OM PRAKASH RAJBHAR) अपने गांव में खेती भी करते थे। ओमप्रकाश राजभर (OM PRAKASH RAJBHAR) के परिवार में उनकी पत्नी राजमती राजभर और उनके दो पुत्र हैं। उनके दोनों पुत्र राजनीति में सक्रिय हैं जिनका नाम है अरुण राजभर और अरविंद राजभर ।

ओम प्रकाश राजभर का राजनीतिक सफर

ओमप्रकाश राजभर (OM PRAKASH RAJBHAR) ने 1981 में बसपा संस्थापक कांशीराम के समय से राजनीति की शुरुआत की थी। ओमप्रकाश राजभर ने अपनी शुरुआती राजनीति बहुजन समाज पार्टी से ही शुरू की। ओमप्रकाश राजभर ने राजनीति में कदम रखते ही पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए लड़ाई करना शुरू कर दिया जिससे उनकी समाज में पकड़ धीरे-धीरे अच्छी होती गई।

ओमप्रकाश राजभर ने 1995 में अपनी पत्नी राजमती राजभर को वाराणसी जिला पंचायत का चुनाव लड़वाया और वह चुनाव जीत गई। ओमप्रकाश राजभर (OM PRAKASH RAJBHAR) ने 1996 में बसपा से पिंडरा विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ा हालांकि, इस चुनाव में वे हार गए।

2001 में बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती (MAYAWATI) से विवाद होने के बाद उन्होंने बसपा से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद सोने लाल पटेल की पार्टी अपना दल युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद ओमप्रकाश राजभर ने सुहेलदेव भारतीय समाज नाम से पार्टी बनाई। उसके बाद उत्तर प्रदेश में होने वाले सभी विधानसभा चुनाव में लगातार को सक्रिय रहे लेकिन उन्हें कभी बहुत बड़ी कामयाबी नहीं हासिल हुई।

2014 के लोकसभा चुनाव में ओमप्रकाश राजभर ने सलेमपुर सीट से सांसद का चुनाव लड़ा हालांकि, उस चुनाव में उन्हें महज 66,084 वोट प्राप्त हुए और वह चुनाव हार गए। ओमप्रकाश राजभर की राजनीति किस्मत तब जबकि जब 2017 में उनके चार प्रत्याशी विधानसभा चुनाव जीत गए और ओमप्रकाश राजभर योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री पद पर बिठा दिए गए।

2019 के लोकसभा चुनाव में ओमप्रकाश राजभर और बीजेपी के बीच सीटों को लेकर के बात नहीं बनी। जिसके बाद मन मुटाव के चलते ओमप्रकाश राजभर मंत्री पद पद से बर्खास्त कर दिए गए। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और उनकी पार्टी ने 6 सीटों पर जीत हासिल की।

ओम प्रकाश “राजभर” समाज के नेता के रूप में

ओमप्रकाश राजभर ने अपने लंबे राजनीतिक सफर में खुद को पिछड़ों के नेता के रूप में स्थापित किया। राजभर पूर्वांचल की 2 दर्जन से अधिक ज्यादा सीटों पर अपना प्रभाव रखते हैं। राजभर समाज की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश में इनकी आबादी लगभग 12% है। पूर्वांचल क्षेत्र में राजभर जाति की आबादी पूर्वांचल की कुल जनसंख्या की लगभग 12 से 22 प्रतिशत के बीच है। ऐसे में ओमप्रकाश राजभर ने पूर्वांचल या यूं कहा जाए कि संपूर्ण उत्तर प्रदेश में आप को राजभर नेता के रूप में स्थापित किया है।


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