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पाली सांसद पीपी चौधरी ने किसानों की परेशानियों से सरकारों को कराया अवगत , दिए सुझाव


  • टिड्डी प्रकोप, समर्थन मूल्य, खरीद, सिंचाई से जुड़े आदी मामलों का जल्द निपटान की बात कही 
  • 15 दिनों में हजारों किसानों की फसल चौपट हो गई

जयपुर | पोलटॉक नेटवर्क

पाली के भाजपा सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने किसानों की समस्याओं से केंद्र और राज्य सरकार को अवगत कराया है । जिसमें टिड्डी प्रकोप, समर्थन मूल्य, खरीद सिंचाई, कृषि मंडियों की व्यवस्था, फसल खरीद, बारदाना, जमाबंदी, खातेदारी, बिजली, फसल बीमा, राजस्व से जुड़े आदी मामलों का जल्द निपटान की बात कही है. 

किसानों को हो रही हैं ये प्रमुख परेशानियां

पश्चिमी राजस्थान में टिड्डियों का प्रकोप बढ़ रहा है. जिससे लगभग 15 दिनों में हजारों किसानों की फसल चौपट हो गई. केन्द्र सरकार द्वारा इस गम्भीर समस्या से निपटने के लिए टीमें भेजी जा चुकी है, जो कि निरन्तर टिड्डियों पर काबू पाने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी तक हजारों एकड़ भूमि पर फसलों का चौपट किया जा चुका है. किसानों को मुआवजा और विशेष गिरदावरी करवाने तथा तत्काल टिड्डीयों की रोकथाम में जिला प्रशासन को केन्द्रीय टीम का पूर्ण सहयोग देने हेतु निर्देशित करें.

समर्थन मूल्य की सूची में सम्मलित नहीं होने के अनेक प्रकार की फसलों से किसान अब दूर होता जा रहा है, जिसके कारण वह अपनी कृषि भूमि पर सबसे ज्यादा उत्पादकता वाली फसलों की खेती के अतिरिक्त ऐसी ही खेती करने पर विवश है, जिससे उसे समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके। प्रतिवर्ष किसान कृषि मंडियों की कार्यशैली से जुड़ी विभिन्न समस्याओं से जुझता रहता है, जिसमें प्रमुखतः रजिस्ट्रेशन, माल तुलाई, माल गुणवत्ता जाँच, बारदाना, वेयरहाऊस की उपलब्धता, फसल की खरीद बीच में बंद किया जाना और समयबद्ध प्रक्रिया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से छोटे व गरीब किसानों को राहत पहुचाने का कार्य किया जा रहा है.

लेकिन किसी-किसी जगह सम्मान निधि को किसानों तक नहीं पहुचाया जा सका है। वर्तमान में कृषि क्षेत्र में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है, जिससे किसानों को यह बताया जा सके कि उन्हें आने वाले मांग के अनुसार क्या पैदावार करनी चाहिए, जिसके कारण प्रतिवर्ष किसानों द्वारा की गई पैदावार का बहुत कम दाम मिलने के कारण सड़कों पर फैकने की खबर देखने को मिलती है।

फसल उत्पादन जोन के आधार पर सिंचाई की व्यवस्था वर्तमान में सिचांई व्यवस्था में क्षेत्रीय विश्लेषण में क्षेत्र के किसानों की रूचि एवं समय की मांग के ध्यान के सम्बन्ध में कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण प्रति हैक्टर उत्पादकता में कमी रहती है। फसलों का समर्थन मूल्य पर उत्पादन का 40 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करना किसानों द्वारा फसलों को उचित मूल्य पर बेचने की समस्या आम है। यह देखने में आता है कि कृषि मंडियों में पंजीयन की क्षमता कम होने के कारण खरीद का लक्ष्य भी कम होता है, जिसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है।

दलहन व तिलहन की खरीद प्रिक्रया में एक किसान से एक दिन में अधिकतम् 25 क्विंटल उपज क्रय करने की अधिकतम सीमा है। समर्थन मूल्य खरीद में पंजीकरण, गिरदावरी दस्तावजों की अनिवार्यता तथा खरीद केन्द्र पर उपज को लाने की प्रक्रिया जटिल है। ज्यादातर किसानों को खुले बाजार में चना बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है जहां कम कीमत मिलने से बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

उत्पादन का 40 प्रतिशत खरीद अनुसार पंजीयन कर पर्याप्त चने की खरीद की जावें तथा ऑन लाईन पंजीयन सुचारू रूप से हो इसकी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्रदेश में कृषि मंडियोँ द्वारा बारदाने के अभाव में फसल नहीं खरीदने की खबरे प्राप्त हो रही है। कृषि मंडियों को पर्याप्त बारदाने की उपलब्धता सुनिश्चित कराया जाना आवश्यक है, साथ ही मंडियों को बारदाने के अभाव में किसानों को ना लौटाने के निर्देश भी दिये जाए।

फसल बीमा योजना के सम्बन्ध में अन्य सुझाव

1. किसानों से ग्राम स्तर पर बीमा कंपनी, बैंक,कृषि विभाग, राजस्व विभाग व पंचायती विभाग के सहयोग से बोई जाने वाली फसलों का घोषणा पत्र लेकर ही फसल बीमा किया जाये। 2. फसल बीमा होते ही किसान के हिस्से का फसल वार कटे बीमा प्रीमियम व उसमें सरकार की अनुदानित राशि का मोबाइल पर संदेश दिया जावें। 3. बीमित फसलों कि जानकारी व उसका उपलब्ध जोखिम का मोबाइल पर संदेश। 4. फसल, बीमा की ऑनलाइन पॉलिसी जारी कर जोखिम की उपलब्धता की परिस्थितियों का विवरण किसान को उसकें मोबाइल पर ऑनलाइन उपलब्ध करवा कर प्रिंटेड प्रतिलिपी उपलब्ध करवाई जावें।


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पोल टॉक और PollTalk.In के सम्पादक संतोष कुमार पांडेय देश के कई शहरों में पत्रकारिता कर चुके हैं। ये शहर जो कार्यस्थल बने वाराणसी , लखनऊ, आगरा, देहरादून, नोएडा, जयपुर, बिहार, हैदराबाद, पानीपत, सतना में रहे हैं। इन संस्थानों में दी सेवाएं राजस्थान पत्रिका , दैनिक भास्कर, एग्रो भास्कर, हिन्दुस्थान, जनसन्देश न्यूज़ चैनल, जनसन्देश टाइम्स, ईटीवी भारत में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किये. राजनीति की सही जानकारी और कुछ रोचक इन्टरव्यू दिखाना प्राथमिकता है।

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