पहाड़ से मैदान तक सबके चहेते थे यूपी के पूर्व सीएम बहुगुणा

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा (Hemwati Nandan Bahuguna) पहाड़ से मैदान तक अपनी राजनीतिक पकड रखते थे ।

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Hemwati Nandan Bahuguna
Hemwati Nandan Bahuguna

  • यूपी के पूर्व सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा की राजनीतिक कहानी 
  • उनकी बेटी हैं प्रयागराज की सांसद और उनके बेटे विजय रह चुके हैं उत्तराखंड के सीएम 

पोल टॉक नेटवर्क । प्रयागराज

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा (Hemwati Nandan Bahuguna) पहाड़ से मैदान तक अपनी राजनीतिक पकड रखते थे । सन् 1936 से 1942 तक बहुगुणा जी छात्र आंदोलन में डटकर शामिल हुए और बहुगुणा जी चर्चित पुस्तक ने ‘इडिया निज हम’ को लिखी जिसे उनकी काफी प्रशंसा की गई।

कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म 25 अप्रैल,1989 में बुघाणी गांव, उत्तराखंड में हुआ था। हेमवती नन्दन बहुगुणा यूपी की राजनीति के नामी नेता हैं और 1942 के आंदोलन में उनका नाम इनामी क्रांतिकारियों में आया है। हेमवती नन्दन बहुगुणा का राजनीतिक जीवन सन् 1952 में सर्वप्रथम विधान सभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होकर शुरू हुआ। उनका वर्ष 1957-1969 तक और 1974 से 1977 तक उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य के लिए निर्वाचित किया गया।

इसके बाद बहुगुणा ने सन् 1952 में होने वाले उत्तर प्रदेश कांग्रेस समिति एवं सन् 1957 से अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य के रूप में भी नियुक्त किए गए।बहुगुणा को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव के रूप में भी नियुक्त किया गया हैं। सन् 1957 में बहुगुणा को जी के मंत्रिमंडल में सभा सचिव भी चुने गए जो कि श्रम एवं समाज कल्याण विभाग के पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी थे।

इसके बाद हेमवती नन्दन बहुगुणा को सन् 1958 में उद्योग विभाग के उप मंत्री के रूप में नियुक्त किए गए। सन् 1962 में बहुगुणा को श्रम विभाग के उप मंत्री मे नियुक्त किए गए। फिर सन् 1967 में परिवहन एवं वित्त मंत्री के रूप में सामने आए। बहुगुणा को सन् 1971/1977/1980 में लोक सभा सदस्य भी निर्वाचित किया गया हैं, और केंद्रीय मंत्रिमंडल में संचार राज्य मंत्री के पद पर दिनांक 2 मई, 1971 को नियुक्त हुए हैं।

बहुगुणा को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार 8 नवंबर 1973 से लेकर 4 मार्च, 1974 और दूसरी बार 5 मार्च 1974 से 29 नवंबर 1975 तक उत्तर प्रदेश में कार्यकाल संभालने का जिम्मा दिया गया। सन् 1977 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में पेट्रोलियम रसायन तथा उर्षक मंत्री के रूप में निर्वाचित किए गए एवं सन् 1979 में केन्द्रीय वित्त मंत्री बने।

सन् 1980 में होने वाले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ही कांग्रेस पार्टी में दोबारा शामिल किये गए, इस साल इंदिरा गांधी ने कांग्रेस में बहुगुणा को प्रमुख महासचिव बनने का निमंत्रण दिया गया। सन् 1980 में मध्यावधि चुनाव किया जिसमे वे गढ़वाल से जीत गए।


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