‘भाजपा अध्यक्ष ने कहा-अभी लंका लुटी नहीं है’, दिया कुमारी जिंदाबाद के लगे नारे

जयपुर में इन दिनों राजनीति का पारा चढ़ा हुआ है. महीना बारिश का है लेकिन मौसम में बस उमस ही उमस है. और सरकार जैसलमेर और कुछ हिस्सा मानेसर में है. वहीँ विपक्ष के राज्य कार्यालय में भी हलचल बढ़ी हुई है. कुछ नए पदाधिकारी उत्साहित हैं और जिन्हें टीम में जगह नहीं मिली वो उद्वेलित हैं. मंगलवार को कुछ जिले के कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता भी पहुचे थे.

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राजस्थान भाजपा अध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां और सांसद दिया कुमारी .
राजस्थान भाजपा अध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां और सांसद दिया कुमारी .

  • राजस्थान भाजपा कार्यालय में उमड़े थे कार्यकर्ता , पद की कर रहे मांग
  • अध्यक्ष से मिलने नवनिर्वाचित भाजपा महामंत्री दिया कुमारी पहुँचीं थीं मिलने

संतोष कुमार पाण्डेय | सम्पादक

जयपुर में इन दिनों राजनीति का पारा चढ़ा हुआ है. महीना बारिश का है लेकिन मौसम में बस उमस ही उमस है. और सरकार जैसलमेर और कुछ हिस्सा मानेसर में है. वहीँ विपक्ष के राज्य कार्यालय में भी हलचल बढ़ी हुई है. कुछ नए पदाधिकारी उत्साहित हैं और जिन्हें टीम में जगह नहीं मिली वो उद्वेलित हैं. मंगलवार को कुछ जिले के कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता भी पहुचे थे. इसीबीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां से कुछ लोगों ने पद की मांग की तो उन्होंने तुरंत कह दिया की ‘अभी लंका लुटी नहीं है जाइए काम करिये’. इसे सुनते ही कुछ के चेहरे खुश हुये तो कुछ फिर उसी धुन में लग गए. इसकी चर्चा कार्यालय में हर तरफ हो रही थी.

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दिया कुमारी जिंदाबाद के नारे लगे…

राजसमन्द की सांसद और नवनिर्वाचित प्रदेश भाजपा महामंत्री दिया कुमारी अपने समर्थकों के साथ प्रदेश कार्यालय पहुंची थीं. उस दौरान कार्यालय में जोर-जोर से दिया कुमारी जिंदाबाद के नारे लग रहे थे. दिया कुमारी के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता दिखे. महामंत्री बनने के बाद पहली बार दिया कुमारी कार्यालय आई थीं. बड़ी संख्या में लोग इनसे मिलने भी पहुंचे थे. मगर भाजपा की नई कार्यकारणी को लेकर खूब चर्चा हो रही थी.

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वहीं प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं राज्य सरकार की नीयत बदली नहीं है. पहले जैसे ही है. पूर्वागृह से ग्रसित होकर विधायकों के खिलाफ षडयंत्र रचा गया, जिसका अब पर्दाफाश हो चुका है, अब प्रदेश की जनता को अब सरकार पर बिल्कुल भरोसा नहीं रहा। डाॅ. पूनियां ने कहा कि हमने बहुत पहले ही कहा था कि 124ए राजद्रोह का मामला है, अंग्रेजों के समय 1870 में यह कानून था, जो महात्मा गांधी जी पर भी अंग्रेजांे ने लगाया था और यही कानून एक पत्रिका में लेख लिखने पर लोकमान्य बालगंगाधर तिलक पर लगाया था।

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