Home जनसरोकार अशोक गहलोत सरकार ने जनविरोधी बजट पेश किया है : राजेन्द्र राठौड़

अशोक गहलोत सरकार ने जनविरोधी बजट पेश किया है : राजेन्द्र राठौड़


  • राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने उठाये कई सवाल
  • यह सारा बजट कपोल कल्पित घोषणाओं के आधार पर बनाया गया है

पोल टॉक नेटवर्क | जयपुर

राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ (rajendra rathore bjp leader ) ने राजस्थान विधानसभा में प्रस्तुत किए गए राज्य बजट 2021-22 को अत्यन्त निराशानजक, विजनलेस व जनविरोधी बताते हुए कहा कि वर्ष 2020-21 में राज्य सरकार ने बजट में बजटीय घाटा 12 हजार 378 करोड़ रुपये का जो अनुमान लगाया था वह सरकार की गलत नीतियों के कारण बढ़कर संशोधित अनुमान के अनुसार 41 हजार 721 करोड़ रुपये हो गया तथा वर्ष 2021-22 में फिर 23 हजार 750 करोड़ रुपये का राजस्व घाटे का बजट मुख्यमंत्री जी ने प्रस्तुत किया है। कुल मिलाकर दो वर्षों का लगभग 65 हजार करोड़ से अधिक का बजटीय घाटा राज्य की बदहाल अर्थव्यवस्था की ओर इंगित करता है। इस प्रकार के घाटे के बजट से विकास की संभावनाएं पूरी होना असंभव है।

राठौड़ ( rajendra rathore bjp leader )  ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने अलग से कृषि बजट प्रस्तुत करने की बात कही जबकि कृषि बजट के अंदर वित्तीय संसाधनों का उल्लेख अपने बजट भाषण में नहीं किया। यह सारा बजट कपोल कल्पित घोषणाओं के आधार पर बनाया है जो निराशाजनक है। राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट भाषण में शब्दों का मायाजाल व आंकड़ों की जादूगरी करके राजस्थान की साढ़े 7 करोड़ जनता की उम्मीदों एवं आशाओं को गहरा आघात पहुंचाया है और मुंगेरीलाल के हसीने सपने दिखाते हुए आमजन के साथ छलावा किया है। मुख्यमंत्री जी के बेहद लंबे, लच्छेदार बजटीय घोषणाओं व भारी भरकम वित्तीय शब्दों से आमजन को कोई सरोकार नहीं है। आमजन को केवल इसी से सरोकार है कि बजट से उसकी जेब में क्या आया और क्या गया, हालांकि इस बजट में जनता की जेब में कुछ नहीं आया यह वास्तविकता है।

राठौड़ ने कहा कि सरकार के आर्थिक कुप्रंबधन के चलते प्रदेश आर्थिक दिवालिएपन के कगार पर पहुंच गया है। बजट में बार-बार कोरोना संकट का जिक्र करने वाले मुख्यमंत्री जी को यह नहीं भूलना चाहिए कि कोरोना महामारी तो वर्ष 2020 में आई थी लेकिन राज्य की आर्थिक स्थिति तो विगत दो वर्षों से ही बदतर है। कोरोना के नाम पर सरकार अपने आर्थिक कुप्रबंधन पर पर्दा नहीं डाल सकती है। जिस प्रकार केन्द्र सरकार ने ”आपदा को अवसर” में बदला ठीक उसी तर्ज पर राज्य सरकार अग्रसर होकर राजस्थान को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बजट में ठोस प्रावधान लाती तो बेहतर होता।

राठौड़ ने कहा कि राज्य बजट 2021-22 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अधिकतर योजनाएं गांधी परिवार को समर्पित है जिसके माध्यम से उन्होंने दिल्ली दरबार के सम्मुख अपने नंबर बढ़ाने का काम किया है। दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री जी ने अधिकतर सौगातें गृह नगर जोधपुर को देकर अन्य जिलों के साथ भेदभावपूर्ण नीति अपनाई है। राठौड़ ने कहा कि वर्ष 2019-20 व 2020-21 के दो बजटों की तरह ही इस बार के भी वर्ष 2021-22 के बजट में सरकार का ना कोई स्पष्ट विजन दिखाई दिया और ना ही कोई रोडमैप। राज्य का बजट प्रत्येक वर्ग को घोर निराश करने वाला है।

राठौड़ ने कहा कि कृषि, सिंचाई, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, ग्रामीण विकास, विद्युत, उद्योग, परिवहन, सामाजिक व सामुदायिक सेवाएं, पिछड़ी जातियों के कल्याण, महिला सुरक्षा, अपराधों व भ्रष्टाचार पर लगाम और आधारभूत संरचनाओं सहित अन्य सभी जनता से जुड़े मुद्दों पर अधिकाधिक लोक लुभावनी घोषणाएं कर सरकार की मंशा महज वाहवाही लूटने की है जबकि वास्तविकता यह है कि बजट में इन घोषणाओं को कैसे पूरा किया जाएगा उसके लिए कोई ठोस नीति व योजना का समावेश नहीं किया गया है।

राठौड़ ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना काल में व्यापारियों व आम उपभोक्ता की कमर टूट चुकी थी। लघु-कुटीर उद्योगों व आमजन को सरकार से विद्युत दरों में कमी और पेट्रोल-डीजल के वैट में कमी की आस थी लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन पर मुख्यमंत्री जी ने कुछ नहीं बोला।

राठौड़ ने कहा कि युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने का झूठा सपना दिखाने वाली सरकार ने एक बार फिर बेरोजगारी भत्ते में 1 हजार रुपये बढ़ाने की घोषणा की है लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रदेश के युवाओं को बेरोजगारी भत्ता पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। विगत दो वर्षों में भर्ती प्रक्रियाओं की घोषणाएं अभी तक अधर में है और अब पुनः 50 हजार नई भर्तियों की घोषणा करना युवाओं को झांसे में लेने का जाल है।

राठौड़ ने कहा कि कथित किसान हितैषी बनने का ढोंग कर रही कांग्रेस सरकार ने राज्य के किसानों की आय में बढ़ोतरी, समृद्धि व खुशहाली के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किए हैं और ना ही संपूर्ण किसान कर्जमाफी करने के लिए कोई घोषणा की वरन् इसका जिम्मा भी केन्द्र सरकार पर लादने का काम कर दिया।


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पोल टॉक और PollTalk.In के सम्पादक संतोष कुमार पांडेय देश के कई शहरों में पत्रकारिता कर चुके हैं। ये शहर जो कार्यस्थल बने वाराणसी , लखनऊ, आगरा, देहरादून, नोएडा, जयपुर, बिहार, हैदराबाद, पानीपत, सतना में रहे हैं। इन संस्थानों में दी सेवाएं राजस्थान पत्रिका , दैनिक भास्कर, एग्रो भास्कर, हिन्दुस्थान, जनसन्देश न्यूज़ चैनल, जनसन्देश टाइम्स, ईटीवी भारत में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किये. राजनीति की सही जानकारी और कुछ रोचक इन्टरव्यू दिखाना प्राथमिकता है।

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