संस्मरण : कुछ ऐसे थे मछलीशहर विधान सभा के चार बार के MLA ज्वाला प्रसाद

आत्मबल, कर्मठता ,समर्पण और अपने जुझारूपन के कारण फर्श से अर्श वाली लोकोक्ति को चरितार्थ करते हुए मछलीशहर के घोरहा गाँव के गलियारों से निकल कर जनसँख्या में देश के सबसे बड़े सूबे के सदन में 4

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EX MLA JWALA PRASAD YADAV
EX MLA JWALA PRASAD YADAV

  • जौनपुर की सियासत में हमेशा याद किये जाएंगे ज्वाला प्रसाद यादव
  • चार बार विधायक रहे लेकिन VIP कल्चर से हमेशा दूर दिखे 

जौनपुर से पोल टॉक के लिए यह संस्मरण अजीत कुमार यादव ने लिखा 

आत्मबल, कर्मठता ,समर्पण और अपने जुझारूपन के कारण फर्श से अर्श वाली लोकोक्ति को चरितार्थ करते हुए मछलीशहर के घोरहा गाँव के गलियारों से निकल कर जनसँख्या में देश के सबसे बड़े सूबे के सदन में 4 बार मछलीशहर विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले ज्वाला प्रसाद (ex mla jwala prasad) के नाम के आगे न कोई विरासत में मिला तमगा था और न ही इसके पीछे धनपशु होने का गुरूर था। मैं, अपने को सौभाग्यशाली समझता हूँ कि मुझे अपने पिता के कभी साथी रहे फिर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हमेशा स्मृत व्यक्तित्व पर और संस्मरणों पर कलम चलाने का मौका मिला।

उनके बारे में लिखते वक्त मुझे अपने पिता बिंद्रा प्रसाद (BINDRA PRASAD YADAV ) एवं मरहूम विधायक ज्वाला प्रसाद के बीच लम्बी प्रतिद्वंदिता होने के बावजूद सामना होने पर मछलीशहर की राजनीति के केंद्र बिंदु रहे दोनों व्यक्तियों के बीच सार्वजनिक मौकों की मुलाकातों में सहज विनम्रता एवं उदारता ने बेहद प्रभावित किया।

हालांकि, बचपन में उनके साथ के कई संस्मरण है किन्तु एक घटना का उल्लेख यहाँ इस लिए करना चाहूंगा क्योंकि उससे मैंने एक सीख अर्जित की थी। एक संस्मरण है जिससे सामाजिक जीवन में व्यवहार की एक सीख मिली थी मुझे वो मेरे लिए सम्पूर्ण जीवन अविस्मरणीय रहेगा। वर्ष 2007 में मेरे बहन की शादी में ज्वाला प्रसाद हमारे घर आये, लगभग पूरी रात मेरे पिता के साथ बहन की शादी की रस्मों में शामिल रहे ! दोनों लोगों के बीच उस दिन जो सहजता को मैंने देखा वह वर्तमान राजनितिक परिदृश्य में आमतौर पर बेहद कम अवसरों पर यह दृष्टिगत होता है कि दो राजनितिक प्रतिद्वंदी आपस में इतने उदार एवं सहज हों।

सभ्य समाज पीढ़ी दर पीढ़ी अपने पुरखों और सामाजिक- राजनितिक नायकों को याद कर प्रेरणा पाता है। जीवनपर्यंत अपने कुशल, उदार, विनम्र व्यवहार की बुनियाद पर ज्वाला प्रसाद ने समकालीन जौनपुर की राजनीति में राज्यशिल्प का एक नया प्रतिमान स्थापित किया था। आज यह आवश्यक है कि लोग ऐसे व्यक्तित्व और कृतित्व से प्ररेणा लें जिसने बदलती राजनीति में भी अपने राजनैतिक विचारों, विश्वासो सिद्धांतों का समझौता नहीं किया वह सामान्य परिवार में जन्मे एक ऐसे लोकप्रिय जननेता का जीवन वृत्त है, जिसके पास न कोई वंशानुगत राजनैतिक पृष्ठभूमि थी, न विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करने के अवसर, न समृद्ध वंश के संसाधन और न ही धर्म पर आधारित वोट बैंक। वे निष्ठा के साथ अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की सेवा के भी आग्रही थे।

उन्हें यह बखूबी पता था कि लोग आपके पास तीन कारणों से आते हैं। भाव से, अभाव से, प्रभाव से। उन्होंने इसका उदारतापूर्वक निर्वहन किया। आचरण में मर्यादा, वरिष्ठों और सहयोगियों के प्रति आदर, कनिष्ठों के प्रति स्नेहिल सद्भाव, आचरण में मर्यादित सौम्यता और बराबरी का व्यवहार, ज्वाला प्रसाद (ex mla jwala prasad) की जीवन शैली की नैसर्गिक प्रवृत्ति रहे। आज जब कई बार ‘लोहिया का समाजवाद आज परिवारवाद में सिमटकर रह गया है ‘ का आरोप प्रत्यारोप होता है, जब आरोप लगता है कि उनके अनुयायी आज मनमौजी सत्ता चला रहे हैं, उसमें ज्वाला प्रसाद उदाहरण ही होंगे की उन्होंने बलात वंशवाद में हाथ नहीं धोया न ही लक्जरी वाहनों में घूमते मिले न ही संपत्ति की अट्टालिका अर्जित की।

वीआईपी कल्चर वाले रोग से भी दूर थे। जीवनपर्यंत संघर्षरत रहे। सत्ता के विरोध में राजनीतिक, सामाजिक संघर्ष किए इस योगदान को कभी नकारा नहीं जा सकेगा। निश्चित रूप से अपने क्षेत्र के हजारों लोग एवं अपने पार्टी के दर्जनों नेताओं की उपस्थिति में उनकी आत्मा सम्पूर्ण मनोयोग से एक ही कामना कर रहा होगी– ‘लॉन्ग लिव समाजवाद एंड समाजवादी पार्टी!’ अलविदा, ज्वाला प्रसाद जी ! आप निश्चिततौर पर याद किये जायेंगे।


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