कोरोना का प्रभाव …तो 5 रूपये लिटर में बिकेगा पेट्रोल और डीजल, कंगाल हो जायेंगे ये देश

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तेल उत्पादन रिफायनरी.

पूरी दुनिया में कोरोना का बड़ा असर हुआ है. इसका बड़ा असर पेट्रोलियम तेलों पर भी पड़ेगा. एनर्जी कंसल्टेंसी रिस्टैड एनर्जी के अनुसार आने वाले दिनों में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत कम हो जायेगी और उत्पादन बढ़ जाएगा. जिससे काफी परेशानी बढ़ेगी. वर्ष 2020 की शुरुआत में 65 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की कीमत में बिक रहा था. और पिछले कुछ सप्ताह से तेल की कीमत लगातार 30 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी हुई है. एनर्जी कंसल्टेंसी रिस्टैड एनर्जी ने इंडस्ट्री को चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में 10 डॉलर प्रति बैरल पहुँच जाएगी. जब 65 डॉलर प्रति बैरल था तो हमें 75 रूपये में मिलता था. और जब 10 डॉलर प्रति बैरल हो जाएगा तो ५ रुपये के पास लोगों को मिलेगा.

सबसे अधिक खपत वाले देश कोरोना से परेशान

कार में तेल भरता पेट्रोल पम्पकर्मी.

अमेरिका, चीन और भारत दुनिया में सबसे अधिक कच्चे तेल का खपत करते हैं. और ये तीनों देश अब कोरोना के चलते लॉक डाउन की परेशानी में फंस गए हैं. यहाँ पर खपत कम हो गई है. भारत नोटबंदी के बाद से काफी बेहतर सुधार कर रहा था. लेकिन अब लॉकडाउन की तरफ भारत आ चुका है. चीन, अमेरिका, भारत, जापान, इग्लैंड, साउथ कोरिया, जर्मनी, फिलिपिन्स, इटली, स्पेन सबसे बड़े तेल आयातक देश हैं. मगर ये सभी अब लॉक डाउन हो चुके हैं.

ये देश सबसे अधिक तेल उत्पादक देश हैं !

तेल उत्पादन सेंटर.

वेनेज़ुएला 302,300,000,000 बैरल, सऊदी अरब 266,200,000,000 बैरल, कनाडा 170,500,000,000 बैरल, ईरान 157,200,000,000 बैरल, इराक़ 148,800,000,000 बैरल, कुवैत 101,500,000,000 बैरल, संयुक्त अरब अमीरात 97,800,000,000 बैरल उत्पादक देश हैं.

तेल उत्पादक यूनिट.

ओपेक का क्या होगा ?

OPEC की स्थापना 10-14 सितम्बर, 1960 को ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेज़ुएला द्वारा बगदाद सम्मेलन में की गयी थी. यह पेट्रोलियम निर्यात करने वाले देशों का एक स्थायी अंतर सरकारी संगठन है. सितंबर, 2019 में विश्व के कुल कच्चे तेल उत्पादन में ओपेक सदस्य देशों का हिस्सा 33.1% था. ओपेक के कुल उत्पादन 32,761 मिलियन बैरल प्रतिदिन में सऊदी अरब लगभग 32% योगदान देता है. वर्तमान में ओपेक के कुल 14 सदस्य देश हैं.


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