राज्यपाल सत्यपाल मलिक का तीन साल में चौथी बार राज्य बदला

सत्यपाल मलिक ( satya pal malik ) को मेघालय का राज्यपाल बनाया गया है. अभी तक गोवा में पदस्थ थे. गोवा ( goa) का कामकाज महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी देखेंगे। सत्यपाल मलिक ( satya pal malik ) जब जम्मू कश्मीर के राज्यपाल बनाये गये थे तो उस समय चर्चा में रहे. क्योंकि उनके ही कार्यकाल में धारा 370 हटाई गई थी. और सत्यपाल मलिक अपने कामकाज को लेकर चर्चा में रहे.

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satya pal malik
सत्यपाल मलिक, राज्यपाल .

  • 30 सितम्बर 2017 से 21 अगस्त 2018 तक बिहार के रहे राज्यपाल
  • 23 अगस्त से 29 अक्टूबर 2019 तक जम्मू कश्मीर के राज्यपाल रहे

संतोष कुमार पाण्डेय | सम्पादक

सत्यपाल मलिक ( satya pal malik ) को मेघालय का राज्यपाल बनाया गया है. अभी तक गोवा में पदस्थ थे. गोवा ( goa) का कामकाज महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी देखेंगे। सत्यपाल मलिक ( satya pal malik ) जब जम्मू कश्मीर के राज्यपाल बनाये गये थे तो उस समय चर्चा में रहे. क्योंकि उनके ही कार्यकाल में धारा 370 हटाई गई थी. और सत्यपाल मलिक अपने कामकाज को लेकर चर्चा में रहे. इसके पहले वो बिहार के राज्यपाल बनाये गये थे. जम्मू-कश्मीर के बाद सत्यपाल मलिक को गोवा का राज्यपाल बनाया गया. यही से अब 18 अगस्त को सत्यपाल मलिक को मेघालय का राज्यपाल बनाया गया है। तीन साल में चार बार इनका राज्य बदला गया. मेघालय के राजयपाल तथागत रॉय फिर से सक्रिय राजनीति में लौटेंगे।

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30 सितम्बर 2017 से 21 अगस्त 2018 तक बिहार एवं 23 अगस्त से 29 अक्टूबर 2019 तक जम्मू कश्मीर के राज्यपाल रहे। 25 अक्टूबर 2019 को सत्यपाल मलिक को गोवा का राज्यपाल बनाया गया. सत्यपाल मलिक अलीगढ़ सीट से 1989 से 1991 तक जनता दल की तरफ से सांसद रहे। 1996 में समाजवादी पार्टी की तरफ से फिर चुनाव लड़े लेकिन हार गए। मेरठ के एक कॉलेज से उन्होंने पढ़ाई की है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।

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कौन हैं सत्यपाल मलिक

सत्यपाल मलिक बागपत में 1974 में चरण सिंह के भारतीय क्रांति दल से विधायक चुने गए थे. इसके अलावा वह 1980 से 1992 तक राज्यसभा के सांसद भी रह चुके हैं. 2004 में बीजेपी में हुए थे शामिल सत्यपाल मलिक 1984 में कांग्रेस में शामिल हो गए और राज्यसभा सदस्य भी बने लेकिन करीब तीन साल बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. वह वीपी सिंह नीत जनता दल में 1988 में शामिल हुए और 1989 में अलीगढ़ से सांसद चुने गए. साल 2004 में मलिक भाजपा में शामिल हुए थे और लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन इसमें उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह से शिकस्त का सामना करना पड़ा. वह 21 अप्रैल 1990 से 10 नवंबर 1990 तक केंद्र में राज्य मंत्री भी रहे थे.

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