BIHAR CHUNAV 2020 : जदयू में शरद यादव की फिर वापसी ! यह है बड़ा समीकरण 

बिहार की राजनीति में शरद यादव का बड़ा कद है. भले ही शरद यादव बिहार के न हो लेकिन इनकी लम्बी राजनीति बिहार से हुई है. जदयू के राष्ट्रीय रहे. लेकिन 2016 में आरजेडी+जेडीयू गठबंधन टूटने के बाद शरद यादव नीतीश कुमार के फैसले से नाराज थे. शरद यादव नहीं चाहते थे कि जेडीयू दोबारा से बीजेपी के साथ जाए। इन्हीं बातों को लेकर शरद यादव जेडीयू से अलग हो गए थे। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जनता दल का गठन किया था।

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शरद यादव
शरद यादव.

  • बिहार में विधान सभा 2020 का चुनाव होना है, इसलिए शरद की वापसी महत्वपूर्ण मानी जा रही है
  • वर्ष 2016 में शरद यादव ने जदयू छोड़ा था, राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से दिया था इस्तीफा

संतोष कुमार पाण्डेय | सम्पादक

बिहार की राजनीति में शरद यादव का बड़ा कद है. भले ही शरद यादव बिहार के न हो लेकिन इनकी लम्बी राजनीति बिहार से हुई है. जदयू के राष्ट्रीय रहे. लेकिन 2016 में आरजेडी+जेडीयू गठबंधन टूटने के बाद शरद यादव नीतीश कुमार के फैसले से नाराज थे. शरद यादव नहीं चाहते थे कि जेडीयू दोबारा से बीजेपी के साथ जाए। इन्हीं बातों को लेकर शरद यादव जेडीयू से अलग हो गए थे। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जनता दल का गठन किया था।

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अब चर्चा है कि शरद यादव 75 साल की उम्र में फिर एक बार सक्रिय राजनीति की तरफ बढ़ना चाहते है. जब नीतीश कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी से हाथ मिला तो अब शरद यादव भी नीतीश कुमार से हाथ मिलना चाह रहे होंगे। खैर, क्या इसका कोई असर पड़ेगा। जदयू इस बार कमजोर महसूस कर रही है। जदयू इस बार अकेले चुनाव में उतने से थोड़ा परेशान है. अपने पुराने साथियों को जदयू ढूंढ रहै है। इसी कड़ी में शरद यादव का नाम सामने है.

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शरद यादव ४ साल से जदयू से दूर है. लेकिन इनकी राजनीतीक जमीन जम नहीं पाई. जबकि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जनता दल का इन्होने गठन किया। लोकसभा चुनाव के दौरान इन्होने राजद का हाथ थाम लिया था. मगर इन्हें चुनाव में एक लाख से अधिक मतों से हार मिली। बिहार के अलावा यूपी और मध्यप्रदेश से भी लोक सभा का चुनाव शरद यादव ने जीता। मधेपुरा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से चार बार लोक सभा सांसद रहे.

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दो बार मध्यप्रदेश के जबलपुर से सांसद चुने गए, एक बार उत्तर प्रदेश के बदायूं से लोकसभा के लिए चुने गए। शरद यादव बिहार की राजनीती में अकेले ऐसे नेता है जो बिहार के अलावा कई राज्यों से चुनाव जीत चुके है. नीतीश कुमार शरद को वापस लाकर यादवों के वोट को साधना चाहते है. वहीँ राजद में शरद यादव को कोई बड़ा फायदा नहीं हुआ और उन्हें राजद ने न तो विधान परिषद का सदस्य बनाया और न ही राज्यसभा का सदस्य।

 

 


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