Home अंदर की बात पत्रकारों पर रिसर्च : गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में श्रमजीवी पत्रकार

पत्रकारों पर रिसर्च : गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में श्रमजीवी पत्रकार


  • डॉ. अनवर खान ने श्रमजीवी पत्रकारों के स्वास्थ्य संबंधित बीमारियां पर किया शोध अध्ययन

पोल टॉक नेटवर्क | भोपाल 

देश के अधिकांश श्रमजीवी पत्रकार मानसिक तनाव एवं अनिंद्रा जैसी गंभीर की बीमारी के शिकार हो चुके हैं। इसका खुलासा श्रमजीवी पत्रकारों पर किए गए एक शोध अध्ययन में हुआ। यह शोध 500 श्रमजीवी पत्रकारों पर किया गया। इसमें सामने आया है कि 95 प्रतिशत श्रमजीवी पत्रकारों ने स्वीकार किया है कि वह मानसिक तनाव और अनिंद्रा जैसी बीमारियांे से जूझ रहे हैं। उक्त शोध डॉ अनवर खान द्वारा किया गया है, जो स्वयं एक सीनियर पत्रकार है। उनके इस शोध को दिल्ली नोएडा स्थित अमिटी विश्वविद्यालय ने अपनी त्रैमासिक रिसर्च जर्नल में प्रकाशित किया है। हालांकि उक्त शोध अध्ययन मध्यप्रदेश के श्रमजीवी पत्रकारों पर किया गया है परंतु देश के सभी राज्यों के श्रमजीवी पत्रकारों की स्थिति लगभग इसी के समतुल्य है।

अनियमित दिनचर्या से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर
अन्य क्षेत्रों की तुलना में पत्रकारिता के पेशे में कार्यरत् लोगों की दिनचर्या बहुत ही अनियमित है। इनका खानपान और रात में सोने का टाइम-टेबल नियमित नहीं होता है। जिसके कारण श्रमजीवी पत्रकारों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ये स्वास्थ्य से संबंधित कई गंभीर बीमारियों के धीरे-धीरे चपेट में आते जा रहे हैं, जो एक बड़ी चिंता की बात है।

प्रदेश के 10 जिलों के पत्रकारों का सर्वे
मध्यप्रदेश के कुल 52 जिलों में से 10 जिलों के पत्रकारों पर डॉ. खान ने उक्त शोध अध्ययन किया है। इसमें भोपाल, जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, हरदा, होशंगाबाद, रायसेन, देवास, विदिशा और सीहोर जिला शामिल हैं। कुल 500 श्रमजीवी पत्रकारों का सैंपल लिया गया था। जिसमें 437 पुरूष पत्रकार एवं 63 महिला पत्रकार थीं। इन सभी से 7 प्रकार की बीमारियां मानसिक तनाव, अनिंद्रा, मोटापा, बैकपेन, पेट संबंधित बीमारी, सुगर एवं बल्डप्रेशर और कैंसर व किडनी आदि के बारे में प्रश्नावली भरवाई गई थी। इसमें से 95 प्रतिशत श्रमजीवी पत्रकारों में मानसिक तनाव और अनिंद्रा की बीमारियां होना उजागर हुआ है। डॉ. खान ने सर्वे से प्राप्त आंकड़ों का एनालिसिस एसपीएसएस (स्टेस्टिकल पैकेज फॉर सोशल साइंस) के माध्यम से किया है।

विभिन्न पदों के पत्रकार सर्वे में शामिल

मध्यप्रदेश में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया में कार्यरत् 500 श्रमजीवी पत्रकारों को सर्वे में शामिल किया गया। इसमें संपादक, उपसंपादक, संवाददाता, सीनियर उपसंपादक, सीनियर कंटेंट एडिटर, ब्यूरो चीफ, सिटी चीफ, चीफ सब एडिटर, सीनियर फोटो पत्रकार, फोटो जर्नलिस्ट, वीडिया जर्नलिस्ट, सीनियर संवाददाता, स्पेशल संवाददाता, एंकर, न्यूज रीडर एवं फ्रीलांसर थे।

और ये बीमारियां होना भी प्रकाश में आईं

सर्वे में प्राप्त आंकड़ों के अनुसार महिला एवं पुरूष दोनों समूह के कुल 95 प्रतिशत पत्रकारों ने माना है कि वह कार्य के असीमित बोझ तले मानसिक तनाव और अनिंद्रा के शिकार हो चुके हैं। उन्होंने स्वीाकर किया है कि देर रात तक कार्य करने के कारण वे रात में पर्याप्त नींद नहीं ले पाते है। जिसके कारण उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस तरह की दिनचर्या एक दो दिन नहीं बल्कि वर्षों से चली आ रही है और सप्ताह के सातों दिन चलती है। इसके अलावा अधिकांश श्रमजीवी पत्रकार पीठ दर्द, मोटापा, शुगर ब्लड-प्रेशर, बैकपेन, पेट खराब आदि बीमारियों के भी शिकार हो गए हैं। ब्रेन हेमरेज जैसे गंभीर बीमारी का ग्राफ भी पत्रकारिता पेशावरों में बढ़ता जा रहा है। जिसके कारण कम उम्र में आकस्मिक मरने वाले पत्रकारों के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। हालांकि कैंसर एवं किडनी से संबंधित बीमारी के मामले नाममात्र सामने आए हैं। कामकाजी कुल 500 पत्रकारों में से 88.2 प्रतिशत ने स्वीकार किया है कि उन्हें आकस्मिक और चिकित्सा अवकाश नहीं मिलता है। कुल 59.7 प्रतिशत श्रमजीवी पत्रकारों ने अपने परिवार एवं स्वयं की सुरक्षा के लिए किसी भी प्रकार की कंपनी से स्वास्थ्य तथा दुर्घटना बीमा नहीं कराया है। साथ ही कुल 79.8 प्रतिशत महिला एवं पुरूष श्रमजीवी पत्रकारों ने माना है कि वह प्रतिदिन 10-12 घंटे तक कार्य करते हैं।

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डॉ अनवर खान


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पोल टॉक और PollTalk.In के सम्पादक संतोष कुमार पांडेय देश के कई शहरों में पत्रकारिता कर चुके हैं। ये शहर जो कार्यस्थल बने वाराणसी , लखनऊ, आगरा, देहरादून, नोएडा, जयपुर, बिहार, हैदराबाद, पानीपत, सतना में रहे हैं। इन संस्थानों में दी सेवाएं राजस्थान पत्रिका , दैनिक भास्कर, एग्रो भास्कर, हिन्दुस्थान, जनसन्देश न्यूज़ चैनल, जनसन्देश टाइम्स, ईटीवी भारत में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किये. राजनीति की सही जानकारी और कुछ रोचक इन्टरव्यू दिखाना प्राथमिकता है।

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