एक्सक्लूसिव : राजस्थान में एसएमएस अस्पताल के सर्जिकल विभाग के डॉक्टरों पर ‘आफत’, कैसे हो पायेगा इलाज ?

उन्हें न तो अभी तक एयरोसोल बॉक्स और न ही फेस शील्ड उपलब्ध कराई गई है. उनका कहना है कि ये किसी बड़ी 'आफत' से कम नहीं है. चूंकि, जब मरीज का सर्जरी वार्ड में ये आपरेशन करते हैं. तो उन्हें यह पता नहीं चल पाता है कि किसे कोरोना हुआ है किसे नही.

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एसएमएस हास्पिटल में डॉक्टर्स पर आफत
एसएमएस हास्पिटल में डॉक्टर्स पर आफत

संतोष कुमार पाण्डेय : जयपुर 

सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे भारत का सबसे प्रमुख अस्पताल है. यहाँ पर हजारों मरीज रोज आते हैं. एसएमएस अस्पताल में 500 बेड को कोरोना के लिए वार्ड बना दिया है. राजस्थान में लगातार इसके मामले भी बढ़ते जा रहे हैं. अब एक दूसरी परेशानी सामने आ रही है. दरअसल, एसएमएस में रोज आपातकाल (इमरजेंसी ) वार्ड में बड़ी संख्या मरीज आते हैं. मगर सर्जरी विभाग के डॉक्टर्स के सामने बड़ी परेशानी है कि उन्हें सुरक्षा उपकरण मुहैया नहीं कराये जा रहे हैं. एसएमएस सर्जरी विभाग के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने बताया कि उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्हें न तो अभी तक एयरोसोल बॉक्स और न ही फेस शील्ड उपलब्ध कराई गई है. उनका कहना है कि ये किसी बड़ी ‘आफत’ से कम नहीं है. चूंकि, जब मरीज का सर्जरी वार्ड में ये आपरेशन करते हैं. तो उन्हें यह पता नहीं चल पाता है कि किसे कोरोना हुआ है किसे नही. रैपिड टेस्ट किट न होने के चलते यह दिक्कत ज्यादा बढ़ रही है. डॉक्टर्स का कहना है उनपर सरकार का कोई ध्यान नहीं है. वो परेशानी का सामना कर रहे है. और लगातार अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं. पढिये पोलटॉक विशेष रिपोर्ट.

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एयरोसोल बॉक्स और फेस शील्ड की उपयोगिता

सेनेटाइज करने के बाद एयरोसोल बॉक्स को दूसरे मरीजों के उपयोग में लाया जाता है. कोरोनो वायरस के संक्रमण से बचाव हेतु यह बॉक्स काफी उपयोगी और महत्वपूर्ण है। एयरोसोल बॉक्स जहां उपलब्ध होता है वहां चिकित्सक संक्रमण से ग्रसित रोगी के मुंह पर की तरफ यह बॉक्स लगाकर मरीज का आसानी से इलाज कर सकते है. यह बॉक्स पूरी तरह पारदर्शी व कांच का होने की वजह से चिकित्सक को इलाज करने में भी समस्या उत्पन्न नहीं होती है। वही फेस शील्ड की उपयोगिता से डॉक्टर्स सुरक्षित रहते हैं.

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परिवार से रहना हो रहा दूर

सुविधाओं के अभाव में इन डॉक्टर्स को अपने परिवार से दूर रहना हो रहा है. अगर सुविधाएं मिले तो वो सभी परेशानियों का सामना कर लेंगे. उन्हें एक बड़ी आफत जैसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. डॉक्टर्स के बारे में रोज नई खबरें आ रही है. इसलिए इन्हें डर लगता है.

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दिल्ली और पुणे में हो चुकी है घटना

पिछले दिनों एम्स के डॉक्टर में भी कोरोना का केस मिला था. जिस डॉक्टर में संक्रमण की पुष्टि हुई है वह फिजियोलॉजी विभाग में रेजिडेंट डॉक्टर हैं। उन्हें और उनके संपर्क में आने वाले सभी स्टाफ व डॉक्टरों को एकांतवास में रख दिया गया है। ऐसा ही हुआ था महाराष्ट्र के पुणे में डी वाई पाटिल अस्पताल में इलाज करा रहे एक दुर्घटना पीड़ित के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद डॉक्टरों समेत इस अस्पताल के कम से कम 92 कर्मियों को पृथक वास (क्वारंटाइन) में भेज दिया गया है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डासना के सरकारी चिकित्सा अधीक्षक कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं.

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बिहार में हो चुकी है घटना

बिहार के एम्स में एक व्यक्ति की मौत हो गई. सुबह उसकी मौत हुई और शाम को उसकी रिपोर्ट आई तो उसमें कोरोना पाजिटिव मिला. लेकिन उस मुद्दे पर बिहार का स्वास्थ्य प्रसाशन और एम्स के डॉक्टर्स में इसको लेकर मतभेद हो गया था. स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव का कहना था कि उसकी किडनी फेल हुई थी और एम्स के डॉक्टर्स कोरोना को लेकर अड़े थे.

नोट : इस खबर के सिलसिले में कई बार राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री, और स्वास्थ्य अधिकारी रोहित कुमार सिंह, जयपुर के सीएमएचओ को कई बार फोन पर सम्पर्क करने की कोशिश की गई मगर बात नहीं हो सकी. 

मेरा उद्देश्य इस खबर के माध्यम से किसी को हतोत्साहित करना नहीं है. बस परेशानी को सामने लाकर उसका निदान कराना है. जो प्रदेश के हित में है. 


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