मीडिया शिक्षा के 100 वर्षों की यात्रा पर विशेषांक

जयपुर से प्रकाशित मीडिया जर्नल कम्युनिकेशन टुडे ने अपने रजत जयंती वर्ष के अवसर पर भारत में मीडिया शिक्षा की एक सदी की यात्रा पर दो महत्वपूर्ण विशेषांकों का प्रकाशन किया है।

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PRO SANJEEV BHANAVT
SANJEEV BHANAVT

  • भारत में मीडिया शिक्षा के 100 वर्ष तथा मीडिया शिक्षा पर आलोचनात्मक लेखों का है संकलन 
  • विभिन्न प्रदेशों के मीडिया कर्मियों व शिक्षकों के योगदान की भी चर्चा 

पोल टॉक नेटवर्क | जयपुर 

जयपुर से प्रकाशित मीडिया जर्नल कम्युनिकेशन टुडे ने अपने रजत जयंती वर्ष के अवसर पर भारत में मीडिया शिक्षा की एक सदी की यात्रा पर दो महत्वपूर्ण विशेषांकों का प्रकाशन किया है। ‘भारत में मीडिया शिक्षा के 100 वर्षों’ पर केंद्रित इन विशेषांकों में मीडिया शिक्षा की एक शताब्दी का लेखा-जोखा और उससे जुड़े विभिन्न मुद्दों के संदर्भ में शोध परक जानकारी प्रकाशित की गई है।

जर्नल के संपादक प्रो. संजीव भानावत ने बताया कि इस जर्नल के जनवरी से मार्च व अप्रैल से जून के दो अंकों में भारत में मीडिया शिक्षा के 100 वर्ष तथा मीडिया शिक्षा पर आलोचनात्मक लेखों का संकलन किया गया है। लगभग 500 पृष्ठों ‌के इन दो विशेषांको में भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के केंद्रीय तथा प्रादेशिक विश्वविद्यालयों के साथ-साथ निजी एवं डीम्ड विश्वविद्यालयों व संस्थानों में मीडिया शिक्षा की शुरुआत व उनके विकास का विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है। इन अंकों में मीडिया शिक्षा के विकास में विभिन्न प्रदेशों के मीडिया कर्मियों व शिक्षकों के योगदान की भी चर्चा की गई है।

CCOMMUNICATION-TODAY
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प्रो. भानावत के अनुसार विश्वविद्यालय स्तर पर मीडिया शिक्षा की आवश्यकता को भारत में लगभग एक सदी पहले ही महसूस कर लिया गया था। सामान्यतः यह माना जाता रहा है कि वर्ष 1920 में अदयार विश्वविद्यालय, चेन्नई में में डॉ एनी बेसेंट के प्रयत्नों से कला संकाय के अंतर्गत पत्रकारिता का पहला औपचारिक पाठ्यक्रम शुरू किया गया था। हालांकि,  तमिलनाडु सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रो जी रविंद्रन का यह मानना है कि पत्रकारिता का पहला पाठ्यक्रम 1917 में नेशनल कॉलेज ऑफ कॉमर्स, नेशनल यूनिवर्सिटी चेन्नई में प्रारंभ किया गया था

उसके बाद उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार रहम अली अल हाशमी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पत्रकारिता पाठ्यक्रम के प्रभारी के रूप में इस विश्वविद्यालय में पत्रकारिता में डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किया। उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में पत्रकारिता पर पहली व्यावहारिक पुस्तक ‘फन- ए- सहाफत’ लिखी थी । ये प्रयास बहुत लंबे समय तक नहीं चल सके । व्यवस्थित रूप से पत्रकारिता का पाठ्यक्रम सन् 1941 में पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर में प्रो पीपी सिंह के प्रयत्नों से शुरू किया गया था।

प्रतिवर्ष 40 विद्यार्थियों के बैच के साथ स्नातकोत्तर स्तर का पाठ्यक्रम यहां प्रारंभ किया गया था। भारत विभाजन के साथ सन् 1947 में ‌इसका कैंप ऑफिस दिल्ली शिफ्ट हो गया था। प्रो पीपी सिंह ने अमेरिका और इंग्लैंड में पत्रकारिता की पढ़ाई की थी। आजादी के बाद यह विभाग कुछ समय तक दिल्ली में संचालित हुआ और उसके बाद सन 1962 में पंजाब विश्वविद्यालय,चंडीगढ़ में स्थानांतरित हो गया। इस प्रकार सन 2020 में भारत में मीडिया शिक्षा की एक सदी की यात्रा पूरी हो गई है।

प्रो भानावत के अनुसार कम्युनिकेशन टुडे ने अपने प्रकाशन के 25 वर्षों में कोविड-19 एवं मीडिया , मीडिया कर्मियों के लिए आचार संहिताओं का संकलन, इंटरप्ले बिटविन इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया, भारत में मीडिया का परिदृश्य , पत्रकारिता एवं जनसंचार साहित्य संदर्भिका, विदर जर्नलिज्म एंड पीआर एज्युकेशन, ह्यूमन राइट्स एंड मीडिया आदि विषयों पर केंद्रित विभिन्न विशेषांकों का समय-समय पर प्रकाशन किया है । कम्युनिकेशन टुडे के अकादमिक योगदान पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय ,वर्धा और लुधियाना के कृषि विश्वविद्यालय में भी शोध कार्य किया गया है। पब्लिक रिलेशंस काउंसिल ऑफ इंडिया ने 2011 में इस पत्रिका को चंडीगढ़ में आयोजित अपनी अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में एक्सटर्नल मैगजीन कैटेगरी में गोल्डन अवार्ड से भी सम्मानित किया है।


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