सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एपी सिंह ने राष्ट्रपति को लिखा खुला खत

वर्तमान समय में जैसा की सर्वविदित है कि कोविड-19 कोरोनावायरस ने दूसरे दौर में भारत देश को अधिक प्रभावित किया है, चाहे स्थिति हमारे देश के अस्पतालों, एंबुलेंस, श्मशान घाटों की हो चाहे देश के नागरिकों की इस काल के साक्षात हो रहे तांडव की

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supreme court advocate dr ap singh
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  • आसाराम, गुरमीत राम रहीम, रामपाल दास को रिहा करने की अपील 
  • डॉ. प्रणव पंड्या के केस का दिये हैं हवाला 

महामहिम राष्ट्रपति महोदय
राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली

वर्तमान समय में जैसा की सर्वविदित है कि कोविड-19 कोरोनावायरस ने दूसरे दौर में भारत देश को अधिक प्रभावित किया है, चाहे स्थिति हमारे देश के अस्पतालों, एंबुलेंस, श्मशान घाटों की हो चाहे देश के नागरिकों की इस काल के साक्षात हो रहे तांडव की, जिसे पूरा देश आपके कार्यकाल में देख रहा है, देश के बहुत से नागरिकों को एक बात इस समय सबसे अधिक सुनाई पड़ती है और वह मुझे भी विदीर्ण करती है, जब मेरे पास आने वाले फोनों जिनमें कहीं ऑक्सीजन नहीं, कहीं मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की बात होती है, तो बड़े बड़े नामी अस्पतालों के व्यवस्थापको व चिकित्सकों से मेरी बात होती है, तो वह यही कहते हैं कि हम तो अपनी तरफ से प्रयास कर रहे हैं परंतु आप लोग भी प्रभु परमात्मा से दुआ कीजिए तभी कुछ संभव होगा!

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स्थिति भयावह होती है सच भी है इंसान ने जिंदा रहने के लिए कमाना तो खैर छोड़ ही दिया मैं यह सोचते सोचते थक जाता हूं कि प्रभु परमात्मा से कैसे दुआ होगी, मैंने इस पर गहन मंथन किया तो ऐसा आभास हुआ कि कहीं यह दुआ  आसाराम के साथ जोधपुर जेल में, संत गुरमीत राम रहीम इंसा जी के साथ सुनारिया जेल, हरियाणा, संत रामपाल दास जी महाराज के साथ हिसार सेंट्रल जेल में तो नहीं रुक रही है! क्योंकि यह तो सत्य है कि बापू आसाराम जी से आशीर्वाद लेने समय-समय पर देश की नामचीन राजनीतिक हस्तियां, पक्ष विपक्ष की जाती रही हैं, उपरोक्त सभी ने समय-समय पर जब भी देश में प्राकृतिक आपदाओं का पहाड़ टूटा तो अपने अपने भक्तों के द्वारा देश की स्थिति को सुधारने और संभालने के लिए तन, मन, धन व आध्यात्मिक रूप से सहयोग करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और यह उनका नैतिक कर्तव्य भी था, और यह विडंबना ही है कि जहां एक ओर प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद निर्माण हो रहा है तो दूसरी तरफ भारत देश के तीनों संत अपने नाम के साथ राम जैसे विशाल शब्द को जोड़े रखने के बावजूद विगत कई वर्षों से जेल में है!

दूसरी तरफ कोविड-19 कोरोना कॉल में पिछले वर्ष देश की लगभग सभी जेलों से कई कई हत्याओं जैसे संगीन अपराधों में शामिल रहने वाले हमारे कैदियों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय की कोविड-19 की हाई पावर कमेटी की गाइडलाइन के आधार पर उन जेलों में से भी छोड़ा गया जिनमें उपरोक्त संत है लेकिन उपरोक्त संतो के मामले में समानता के कानूनी सिद्धांत को भी पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया जो कि आपके देश के सर्वोच्च पद पर रहते हुए अत्यंत दुखद है!

मैं, यह इसलिए भी कह रहा हूं कि जिस तरह से गायत्री मिशन संस्थान परिवार के डॉ. प्रणव पंड्या जी, इसी तरह का केस था उन पर, जिसमें मैं शिकायतकर्ता की तरफ से वकील था, लेकिन हमने बीच का रास्ता निकाल कर एक संत को जेल से बचाकर उनके लाखों अनुयायियों के लिए दुआओं का रास्ता खोले रखा, यह भी सत्य है कि उपरोक्त संतो ने मानवता भलाई, भाईचारा, सदभाव को बढ़ाने तथा सामाजिक कुरीतियों, नशा, दहेज, जातिवाद, संप्रदायवाद को समाप्त करने के लिए अथक प्रयास किए हैं! अब संत रामपाल दास जी महाराज को ही ले लीजिए उन्होंने दहेज रहित शादियां, मात्र 17 मिनट में हजारों विवाह करवा के झूठे कर्मकांडो और अन्य कुरीतियों को समाज से समूल नष्ट करने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर किया है, यह सब कुछ मैंने व्यक्तिगत रूप से उनके केसो में वकील के रूप में काफी निकट से देखा है!

इसलिए पूरे विश्वास के साथ मैं महामहिम राष्ट्रपति जी से अनुरोध करता हूं कि वृद्धावस्था की विभिन्न बीमारियों से ग्रसित संतो को कोविड-19 कोरोना काल में यदि आप अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए तीनों संतो को जेलों से रिहा करवा देंगे तो उन सभी के करोड़ों अनुयायियों व उनके द्वारा निश्चित ही इस महामारी से देश को मुक्त करने में सहयोग मिलेगा, ऐसा आश्वासन मैं उपरोक्त संतो के प्रतिनिधियों, अनुयायियों जोकि मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिलने आए उनसे मिलने के बाद आपको आश्वासन के रूप में, आश्वस्त कर रहा हूं! क्योंकि हमें समझना ही होगा कि आज दूरियां ही दवा बन गई, समीपता ही हृदय के आनंद को धता बता रही हैं, आज जिंदगी सस्ती और ऑक्सीजन महंगी हो गई है, यदि अदृश्य वायरस हमारी जिंदगी ले सकता है तो अदृश्य दुआएं हमें बचा भी तो सकती हैं!

डॉ. एपी सिंह

 


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