MP Panchayat Chunav: मध्यप्रदेश में होंगे बिना आरक्षण के चुनाव, देखें क्या आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला

मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय के चुनाव ओबीसी आरक्षण के बिना ही होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 2 हफ्ते में अधिसूचना जारी करने के लिए कहा है।

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  • बिना ओबीसी आरक्षण के होंगे मध्यप्रदेश पंचायत चुनाव 
  • सुप्रीम कोर्ट ने जल्द चुनाव कराने के दिए निर्देश 

पोलटॉक नेटवर्क | भोपाल

मध्यप्रदेश पंचायत चुनावों (MP Panchayat Chunav) को लेकर सर्वोच्च अदालत ने बड़ा फैसला सुना दिया है। अदालत के फैसले से चुनाव में ओबीसी आरक्षण की मांग कर रही सियासी पार्टियों को बड़ा झटका लगा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने आदेश दिया है कि सभी राज्य सरकारों और संघशासित प्रदेश लंबित पड़े स्थानीय चुनावों को जल्द से जल्द कराये। इसके साथ ही कोर्ट से आदेश दिया है कि चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण (OBC reservation) का इंतजार न करें। यानी मध्यप्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के कराये जायेंगे।

दो सप्ताह के भीतर जारी हो अधिसूचना

दरअसल, मध्यप्रदेश में स्थानीय चुनावों में ओबीसी आरक्षण का मामला लगातार विवाद का हिस्सा बना हुआ है। इसी आरक्षण विवाद के चलते मध्यप्रदेश में एक साल से ज्यादा समय से स्थानीय चुनाव नहीं कराये जा पा रहें हैं। मंगलवार को सर्वोच्च न्यायलय ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि संविधान में हर 5 साल के अंदर चुनाव कराने की व्यवस्था है, लिहाजा चुनावों में देरी नहीं की जा सकती। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं कि वह मध्य प्रदेश पंचायतों के चुनाव जल्द कराए। इसके लिए दो सप्ताह के भीतर अधिसूचना जारी करने के लिए भी कहा है।

सभी राज्यों पर लागू होगा फैसला 

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि शर्ते पूरी किए बिना ओबीसी आरक्षण नहीं दिया जा सकता। इसलिए पंचायत चुनाव में केवल एससी तथा एसटी आरक्षण ही लागू होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछले दो साल से 23000 के करीब स्थानीय निकाय के पद खाली पड़े हैं। पांच साल में चुनाव कराना सरकार का संविधानिक दायत्व है। आरक्षण देने के ट्रिपल टेस्ट को पूरा करने के लिए और वक्त नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह आदेश न केवल मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र राज्य और चुनाव आयोग तक सीमित है, बल्कि शेष राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों पर भी लागू होगा।

क्या है ओबीसी आरक्षण का मामला 

ओबीसी आरक्षण को लेकर भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस आमने-सामने थे। मध्यप्रदेश सरकार ने मंत्री का कहना है कि राज्य में ओबीसी की आबादी 48 प्रतिशत है इसलिए ओबीसी काे 27 नहीं 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए।  लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की दलील नहीं मानी। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का आदेश ही दे दिया था। मध्यप्रदेश में दोनों दल एक दूसरे पर ओबीसी आरक्षण का विरोधी होने का आरोप लगा रहे थे। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का हल निकलते हुए  मध्य प्रदेश में ओबीसी के आरक्षण के बिना ही पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दे दिए हैं।


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