मायावती ने कराई थी स्वाति सिंह की चुनावी एंट्री, जानें क्या है इसके पीछे वजह

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Swati Singh Political Journey

साल 2016 तक उत्तर प्रदेश की राजनीति से अनजान चेहरा स्वाति सिंह मात्र एक हाउस वाइफ थीं। लेकिन 2016 से राजनीति में सक्रिय होकर उत्तर प्रदेश सरकार की मंत्रिमंडल तक का सफर तय किया हुआ है भाजपा के फायर ब्रांड नेता के रूप में अपनी छवि स्थापित की। लेख में हम संक्षिप्त में स्वाति सिंह के राजनीतिक जीवन के बारे में जानेंगे।

कौन हैं स्वाति सिंह

स्वाति सिंह का जन्म झारखंड के बोकारो स्टील सिटी में हुआ था। स्वाति सिंह के पिता का नाम वीरेंद्र सिंह हैं। स्वाति सिंह का जन्म तो झारखंड में हुआ लेकिन स्वाति सिंह पली-बढ़ी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में है। स्वाति सिंह ने 2001 में इलाहाबाद (Allahabad) के एमएनआरईसी मौजूदा समय में एमएनएनआईटी से एमएमएस किया था और उसके बाद उन्होंने 2007 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलएम किया। स्वाति सिंह का विवाह बलिया निवासी दयाशंकर सिंह के साथ हुआ शादी के बाद 2016 तक स्वाति सिंह मात्र अपना गृहस्थ जीवन यापन कर रहीं थीं।

मायावती की वजह से हुई राजनीति में एंट्री

साल 2016 में उनके पति दयाशंकर सिंह द्वारा बसपा सुप्रीमो मायावती को अपशब्द कहे जाने के बाद उन्हें भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद बसपा नेताओं ने लगातार दयाशंकर सिंह उनकी पत्नी और बच्चों को लेकर अपशब्द कहे। लगातार आरोपों के बाद विरोधियों को जवाब देने का जिम्मा स्वाति सिंह ने संभाला और विरोधियों पर जमकर बरसीं। जिसके चलते बाह 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले सुर्खियों में आ गईं। 2016 में स्वाति सिंह ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। लगातार अपने तेज-तर्रार बयानों के चलते देखते ही देखते स्वाति सिंह की इमेज फायर ब्रांड नेता के रूप में उभर कर सामने आ गई। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए स्वाति सिंह को सीधे प्रदेश महिला मोर्चा का अध्यक्ष बना दिया गया इतना नहीं 2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में भी स्वाति सिंह को जगह दी गई।

मायावती को दी चुनाव लड़ने की चुनौती

बसपा नेताओं द्वारा लगातार स्वाति सिंह उनके बच्चे और उनके पति पर आरोप लगाए जा रहे थे इसका जवाब देते हुए स्वाति सिंह ने बसपा सुप्रीमो मायावती तक को चुनौती दे डाली। स्वाति सिंह ने मायावती को चुनाव लड़ने की चुनौती देते हुए कहा था कि मायावती यूपी की किसी भी सामान्य सीट से चुनाव लड़ लें वह खुद उनके खिलाफ चुनाव लड़ेगी। इस बयान के बाद माना जा रहा था कि उन्हें 2017 का विधानसभा टिकट मिलेगा और हुआ भी वही। 2017 में स्वाति सिंह को लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से उम्मीदवार बनाया गया।

लखनऊ की सरोजिनी  नगर सीट पर भारतीय जनता पार्टी पिछले तीन दशक सिंह जीत हासिल नहीं कर पा रही थी। तमाम विवादों और मोदी लहर के चलते राजनीति में नई कदम रखने वाली स्वाति सिंह ने सरोजिनी नगर सीट 2017 के चुनाव में जीतकर भारतीय जनता पार्टी की झोली में डाल दी। चुनाव जीतने के बाद मंत्रिमंडल का गठन हुआ और स्वाति सिंह को योगी कैबिनेट में शामिल किया गया। स्वाति सिंह को बाढ़ नियंत्रण, महिला कल्याण, एनआरआई, कृषि निर्यात, कृषि विपणन और कृषि विदेश व्यापार जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई।

2022 में कट गया पत्ता

2022 के विधानसभा चुनाव में सरोजनी नगर सीट से योगी सरकार में मंत्री रही स्वाति सिंह का टिकट काट दिया गया। स्वाति सिंह और स्वाति सिंह के पति दयाशंकर सिंह दोनों ही सरोजनी नगर सीट से टिकट मांग रहे थे। भारतीय जनता पार्टी ने दोनों को टिकट ना देकर राज राजेश्वर सिंह को अपना प्रत्याशी बना दिया। हालांकि स्वाति सिंह के पति दयाशंकर सिंह को बलिया से टिकट दिया गया।

विवादों से रहा है नाता

अपने पति के राजनीतिक विवाद के चलते राजनीति में कदम रखने वाली स्वाति सिंह का लगातार विवादों से नाता रहा। मंत्री बनने के बाद स्वाति सिंह ने लखनऊ में बियर शॉप का उद्घाटन करने पहुंच गई जिसके बाद वह सवालों के घेरे में खड़ी की गई। स्वाति सिंह ने अपने विधानसभा क्षेत्र सरोजनी नगर में नवरात्र के कार्यक्रम में भंडारे के दौरान प्रसाद के साथ कन्याओं को पान 500–500 के नोट खुलेआम बांटे जिसके बाद एक बार फिर वह चर्चा में आ गईं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 से पहले ऑडियो वायरल हुआ जिसमें एक व्यक्ति स्वाति सिंह के पति पर बिल्डिंग कब्जा किए जाने का आरोप लगा रहा था। हालांकि इस ऑडियो में स्वाति सिंह खुद ही अपने पर अपने पति द्वारा किए गए अत्याचारों की बात कर रही थी।

मंत्री पद पर रहते हुए स्वाति सिंह पर सबसे गंभीर आरोप अंसल बिल्डर को लेकर लगाया गया। सीओ कैंट और स्वाति सिंह के बीच बातचीत का एक ऑडियो वायरल हो गया जिसमें वह बिल्डर का पक्ष को रखते हुए सीओ को डांट रही थीं। वहीं उनका नाम बाल विकास पुष्टाहार विभाग में 38 करोड़ के टेंडर को लेकर भी महकमे के प्रमुख सचिव के साथ विवाद में खुलकर सामने आया था।


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