Home अंदर की बात योगी के तीन साल के शासन पर 'भारी' पड़ी विकास की कहानी...

योगी के तीन साल के शासन पर ‘भारी’ पड़ी विकास की कहानी !


  • विकास दुबे के एनकाउंटर पर उठ रहे सवाल
  • पुलिस विभाग पर लोगों की बढ़ी नाराजगी
  • लोगों को इन्तजार था खुलासे का लेकिन बंद हुई कहानी

संतोष कुमार पाण्डेय | सम्पादक

उत्तर प्रदेश में 2017 में सत्ता का परिवतर्न हुआ तो लोगों ने अच्छे साशन की उम्मीद की थी. आदित्य योगीनाथ ने संसद में बोला था कि अपराधी यूपी छोडकर दूर भाग जायेंगे. इस बात को लोगों ने गंभीरता से लिया था.योगी सरकार के शुरूआती दिनों में अच्छी बातें दिखी थी. लोगों में साशन और प्रसाशन के प्रति आस्था और भरोसा बढ़ा था. इसी बीच में योगी सरकार के तीन साल पूरे हो गए. अब नई कहानी विकास दुबे की है. आइये जानते हैं कि कैसे विकास दुबे अब योगी सरकार पर भारी पड़ता दिख रहा है. पुलिस ने सरकार की पूरी किरकिरी करा दी है. सरकार की छवि को बड़ा नुकसान हुआ है.

पहले पुलिस की बदनामी हुई…

उत्तर प्रदेश पुलिस को लेकर समय समय पर बातें सामने आती रहती हैं. मगर योगी सरकार में पहले की तुलना में थोड़ा ठीक दिख रहा था . लेकिन विकास दुबे का मामला पूरी कहानी ही बदल के रख दिया. पुलिस की बदनामी हुई. कई पुलिस वाले इसमें बेनकाब हुए. पूरा थाना ही संदिग्ध हुआ. कई पुलिस वालों पर कार्रवाई हुई. और कई पर अभी बाकी है. मगर इतने समय में पुलिस की बदनामी हो चुकी है.

समय पर नहीं हुआ विकास का एनकाउंटर…

जब पुलिसवालों के साथ विकास दुबे ने काण्ड किया तो लोगों को उम्मीद थी की विकास दुबे का एन्काउंटर हो जायेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. लगभग 5 दिनों तक वो भागता रहा. और पुलिस के हाथ खाली थे. लोगों को फिर भी उम्मीद बनी रही. लेकिन योगी की पुलिस फेल रही. और विकास दुबे ने खुद मध्यप्रदेश पुलिस को सौंप दिया. और उसे वहां से लेकर यूपी पुलिस कानपुर आने लगी. और वो कानपुर के पास मारा गया.

लोगों को खुलासे का था इन्तजार

विकास दुबे मामले में लोगों को उम्मीद थी कि उससे यूपी की योगी सरकार सारे राज उगलवा लेगी लेकिन कुछ ऐसा नहीं हुआ. पुलिस ने अपना काम कर दिया. पुलिस भले ही विकास दुबे को मार गिराया हो लेकिन सवाल कई खड़े हो रहे हैं. इस मामले पर सरकार के जवाब का इंतजार सभी को है. लेकिन क्या कोई जवाब सरकार देगी.

योगी के तीन साल और अकेला विकास दुबे

विकास दुबे योगी सरकार में भी मनमानी करता रहा लेकिन सरकार शांत रही. जब उसने पुलिसवालों को ही मार डाला तो उसे 25 हजार से 5 लाख का इनामी बना दिया. और अब उसका एनकाउंटर हो गया. लोग कह रहे हैं कि योगी सरकार के तीन साल पर विकास दुबे की ये कहानी भारी पड़ी है.


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पोल टॉक और PollTalk.In के सम्पादक संतोष कुमार पांडेय देश के कई शहरों में पत्रकारिता कर चुके हैं। ये शहर जो कार्यस्थल बने वाराणसी , लखनऊ, आगरा, देहरादून, नोएडा, जयपुर, बिहार, हैदराबाद, पानीपत, सतना में रहे हैं। इन संस्थानों में दी सेवाएं राजस्थान पत्रिका , दैनिक भास्कर, एग्रो भास्कर, हिन्दुस्थान, जनसन्देश न्यूज़ चैनल, जनसन्देश टाइम्स, ईटीवी भारत में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किये. राजनीति की सही जानकारी और कुछ रोचक इन्टरव्यू दिखाना प्राथमिकता है।

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