मलेशिया में अंतरराष्ट्रीय क्लाईमेट चेंज कांफ्रेंस में भाग लेकर लौटे विशाल शुक्ला ने बताई नई बातें

'इंटरनेशनल क्लाईमेट चेंज एंड एयर पॉल्यूशन कांफ्रेंस- फैम 2024' में भाग लेकर 10 दिवसीय मलेशिया यात्रा के बाद लौट आए

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मलेशिया में आयोजित कार्यक्रम में विशाल शुक्ला
मलेशिया में आयोजित कार्यक्रम में विशाल शुक्ला

लखनऊ।  लखनऊ के विशाल शुक्ला बीते दिनों मलेशिया की राजधानी क्वालालम्पुर में आयोजित ‘इंटरनेशनल क्लाईमेट चेंज एंड एयर पॉल्यूशन कांफ्रेंस- फैम 2024’ में भाग लेकर 10 दिवसीय मलेशिया यात्रा के बाद लौट आए। इसका आयोजन मलेशिया की राजधानी क्वालालम्पुर की सनवे यूनिवर्सिटी में किया गया था। इस अंतराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में मलेशिया, भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, वियतनाम, थाईलैंड, ब्रिटेन, सिंगापुर, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे तमाम देशों के वरिष्ठ पर्यावरण कार्यकर्ता, पर्यावरण पत्रकार और बुद्धिजीवी शामिल हुए। जो लंबे समय से दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन की बिगड़ती स्थिति को लेकर संचार माध्यमों के द्वारा लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं।

इसपर किया काम

विशाल ने बताया कि इस क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस की खास बात ये थी कि इसमें जलवायु परिवर्तन के कई अनछुए पहलुओं पर भी विशेषज्ञों ने अपने प्रेजेंटेशन दिए और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के जरिए भी लोगों को इसके बारे में बताया गया। कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि किस तरह से क्लाइमेट चेंज के कारण कम उम्र में बच्चियों के विवाह, मौसमी विस्थापन, हीटवेव के चलते वंचित वर्गों पर पड़ने वाले प्रभाव, फसलों के नुकसान, बढ़ते समुद्री जलस्तर और नवजात शिशुओं पर पड़ने वाले वायु प्रदूषण के प्रभाव का गरीब और विकाशील देशों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। मौजूदा समय में नवजात शिशु जिस हवा में सांस ले रहा है उसमें 8 सिगरेट के बराबर प्रदूषण पाया जाता है। विकसित देशों को इसके लिए आगे आना चाहिए और पेरिस क्लाईमेट कन्वेंशन में क्लाइमेट फंड के लिए व्यक्त की गई अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर विकासशील देशों को इससे लड़ने में सहयोग देना चाहिए।

ऐसे मिला मौक़ा

विशाल ने बताया कि इसके लिए उन्हें दुनिया भर के पर्यावरण कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के मध्य एक कठिन चयन प्रक्रिया के बाद चुना गया था। फरवरी में इसमें शामिल होने के लिए सूचना दी गई थी। बता दे मूल रूप से शहीद नगरी शाहजहांपुर के रहने वाले विशाल की उच्च शिक्षा इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन (आईआईएमसी), नई दिल्ली और सेंट स्टीफंस, नई दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में हुई है। वह दो बार यूजीसी-नेट की परीक्षा भी मॉस कम्युनिकेशन और जर्नलिज़्म विषय में उत्तीर्ण कर चुके हैं। इसके अलावा हाल ही में उन्हें इंस्टिट्यूट ऑफ़ ह्यूमन साइंसेज, विएना (ऑस्ट्रिया) की तरफ से भी क्लाइमेट चेंज के कारण हो रहे विस्थापन पर बात रखने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ़ केलिफोर्निया डेविस, निवर्सिटी ऑफ़ इलिनोइस, शिकागो, यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया डेविस, ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ जिनेवा  जैसे दुनिया के शीर्षतम संस्थानों के वक्ताओं के सात वक्ताओं के साथ आमंत्रित किया गया था।

‘मेमोरी, मीडिया और माइग्रेशन’ पर चर्चा

जिसमें उन्हें पोलिश पत्रकार डालिया मिकुल्स्का के साथ ‘मेमोरी, मीडिया और माइग्रेशन’ विषयक सत्र में अपनी बात रखनी थी। इस सत्र में विशाल ने ‘इनसाइट्स फ्रॉम माय इनवायरमेंटल न्यूज़ रिपोर्टिंग:एक्सप्लोरिंग क्लाइमेट इंड्यूसड माइग्रेशन’ पर अपनी बात रखी। इसके अलावा विशाल को पूर्व में नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास, टेरी, इंडियन स्कूल का बिजनेस इंटरनेशनल रोटरी क्लब और अर्थ जर्नलिज्म नेटवर्क जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।


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