Kanpur Violence: किसने भड़काई कानपुर में हिंसा, कानपुर में क्यों हुई सांप्रदायिक हिंसा

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Nupur Sharma Comment

  • जुमे की नमाज के बाद कानपुर में तनाव 
  • झड़प के दौरान कानपुर में चली कई राऊंड गोलियां 

पोलटॉक नेटवर्क | लखनऊ/आदित्य कुमार 

Kanpur Violence: शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में जुमे की नमाज के बाद हिंसा भड़क उठी। जुमे की नमाज के बाद कानपुर के यतीम खाने में दुकान बंदी को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। इस दौरान जमकर ईंट-पत्थर चले और कई राउंड फायरिंग भी हुई। पुलिस ने मौके पर पहुँच स्थिति को काबू में लिया। कानपुर के सीपी विजय मीणा ने बताया कि बाजार बंद को लेकर दो समुदायों के बीच हुई झड़प के मद्देनजर 18 लोगों को हिरासत में लिया गया है। डीएम नेहा शर्मा ने कहा कि स्थिति अब कंट्रोल में है। पत्थरबाजों पर कार्रवाई की जा रही है, साथ ही साजिश करने वालों की पहचान की जा रही है।

कानपुर में क्यों भड़की हिंसा 

शुक्रवार को कानपुर में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गवर्नर आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ एक कार्यक्रम में भाग ले रहे थे। इसी कार्यक्रम स्थल से लगभग 70 किमी दूर कानपुर शहर में सांप्रदायिक तनाव हुआ और दो पक्षों में ईंट-पत्थर चले और कई राउंड फायरिंग भी हुई। राष्ट्रपति, पीएम और सीएम के शहर में रहते हुए हिंसा के होने से बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।


कानपुर में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के पीछे भाजपा नेत्री द्वारा दिया बयान बताया जा रहा है। दरअसल, भाजपा प्रवक्ता नुपूर शर्मा ने एक टीवी डिबेट में पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी की, जिससे मुस्लिम समुदाय के लोग नाराज थे। जोहर फैंस एसोसिएशन व अन्य मुस्लिम तंजीमों ने शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय से कारोबार बंद रखने की अपील की थी। इसका व्यापक असर देखने को मिला। सुबह से ही चमनगंज, बेगनगंज, तलाक महल, कर्नलगंज, हीरामन पुरवा, दलेल पुरवा, मेस्टन रोड, बाबू पुरवा, रावतपुर व जाजमऊ में कहीं आंशिक तो कहीं पूर्ण बंदी दिखाई दी।

दो समुदाय में हुई झड़प 

जुमे की नमाज के दौरान ज्यादातर मस्जिदों में हुई तकरीरों में कहा गया कि वे पैगंबर पर की गई किसी भी टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। वहीं, मुस्लिम संगठनों ने बाजार बंद का आह्वान भी किया। जानकारी के मुताबिक कानपुर के परेड चौराहे पर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के विरोध में दुकानों को बंद कराने की कोशिश की। जब दूसरे समुदाय के दुकानदारों ने विरोध किया, तो पत्थरबाजी शुरु हो गई।


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