SANJAY NISHAD: भाजपा और सपा दोनों के लिए मुफीद हैं संजय निषाद, जानिए पूरी कहानी

भाजपा और सपा दोनों के लिए मुफीद हैं संजय निषाद, जानिए पूरी कहानी

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Sanjay Nishad biography

  • पहले सपा से मिली जीत की राह, अब सपा के लिए बने ‘काल’
  • बड़ा बेटा सांसद, छोटा बेटा विधायक और खुद हैं यूपी में कैबिनेट मंत्री

पोल टॉक नेटवर्क | लखनऊ

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP VIDHAN SABHA ELECTION 2022 ) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लगातार दूसरी बार बहुमत से जीत हासिल की। भारतीय जनता पार्टी ने 403 में से 255 सीटें जीती जबकि सहयोगी दलों को मिलाकर कुल 273 सीटें एनडीए के खाते में गई। बीजेपी (BJP) ने सहयोगी दल निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद (sanjay nishad) को मंत्री पद दिया है। संजय निषाद (sanjay nishad) को योगी कैबिनेट में मत्स्य विभाग का मंत्री बनाया गया है। इस लेख में हम संक्षिप्त में संजय निषाद के राजनीतिक सफर के बारे में बात करने वाले हैं।

संजय निषाद निषाद पार्टी के अध्यक्ष हैं। संजय निषाद राजनीति में आने से पहले उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इलेक्ट्रो होम्योपैथी क्लीनिक चलाते थे। संजय निषाद ने राजनीति में आने से पहले ही अपने समाज की आवाज को बुलंद करना शूरू कर दिया था। उन्होंने 2002 में पूर्वांचल मेडिकल इलेक्ट्रो होम्योपैथिक एसोसिएशन बनाया संजय निषाद इस विधि को मान्यता दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी गए थे।

राजनीति की बात की जाए तो संजय निषाद (SANJAY NISHAD) 2008 में बामसेफ से जुड़े और पहली बार कैम्पियरगंज से चुनाव लड़ा और चुनाव हार गएहालांकि, इसके बाद भी उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई। कैम्पियरगंज से चुनाव हारने के बाद डॉक्टर संजय निषाद ने खुद को अपनी जाति तक समेट लिया। संजय निषाद ने 2008 में ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटी वेलफेयर मिशन और शक्ति मुक्ति महासंग्राम नाम से दो संगठन बनाए।

संजय निषाद ने साल 2013 में निषादों की पार्टी का गठन किया। संजय निषाद ने राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद नामक संघठन बनाया। राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने निषादों को एकजुट करना शुरू किया उसके बाद धीरे-धीरे डॉ. संजय निषाद ने उपजातियों को भी अपने आप से जोड़ना शुरु किया। इसके बाद निषाद पार्टी एक मजबूत दल के रुप में उभरने लगी।

एक घटना जो संजय निषाद को चर्चा में लाई

संजय निषाद (SANJAY NISHAD) उत्तर प्रदेश अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में जुटे हुए थे कि उसी बीच निषादों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग उठी जिसका डॉ. संजय निषाद ने भरपूर समर्थन किया। 7 जून 2015 को गोरखपुर के सहजनवा में कसार गांव के पास निषाद ने अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग को लेकर के रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया।  रेलवे ट्रैक पर हो रहे प्रदर्शन में पुलिस की फायरिंग हुई और अखिलेश निषाद नाम के युवक को गोली लगने से मौत हो गई इस घटना के बाद वहां जमकर बवाल हुआ प्रदर्शन हुआ इसमें संजय निषाद सहित तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ और संजय निषाद को जेल की हवा भी खानी पड़ी। हालांकि उस घटना के बाद संजय निषाद का नाम चर्चा में आया इसके बाद संजय निषाद ने निषाद पार्टी बनाई और 2016 में गोरखपुर में शक्ति प्रदर्शन किया और फिर निषाद पार्टी उत्तर प्रदेश की राजनीति की मुख्यधारा से जुड़ गई।

2017 के विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी ने किस पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। संजय निषाद की पार्टी ने 72 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन उनके हाथ केवल एक ज्ञानपुर विधानसभा सीट पर सफलता मिली थी। 2017 के चुनाव में संजय निषाद खुद गोरखपुर सीट से चुनाव लड़े थे लेकिन तब उन्हें सफलता नहीं मिली थी। 2017 में संजय निषाद को कुल 34,869 वोट ही हासिल हुए थे।

सपा गठबंधन से मिली राजनीतिक राह

2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल की और योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया। सीएम बनने से पहले योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से सांसद थे। उनके सीएम बनने के बाद गोरखपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुए। 2018 में हुए उपचुनाव में संजय निषाद की पार्टी ने सपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा। गोरखपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद ने भाजपा को हराया दिया।

2019 लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संजय निषाद की ताकत को देखते हुए उन्हें एनडीए गठबंधन में शामिल किया और संत कबीर नगर से प्रवीण निषाद को उतारा और वह फिर से सांसद बन गए। उसके बाद भाजपा ने संजय निषाद को यूपी में विधान परिषद का सदस्य बनाया। विधानसभा चुनाव 2022 में एक बार फिर से निषाद पार्टी और बीजेपी ने मिलकर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। योगी सरकार 2.0 में संजय निषाद को कैबिनेट मंत्री का पद दिया गया। हालांकि उनके खाते में केवल मत्स्य विभाग ही आया।


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