Home अंदर की बात देवरिया में बचाने वाले ही मिटा रहे है हरियाली....अधिकारी हैं मौन

देवरिया में बचाने वाले ही मिटा रहे है हरियाली….अधिकारी हैं मौन


  •  राप्ती नदी के केवटलिया बन्धे पर पेड़ो का अवैध कटान, माफिया सक्रिय.
  •  मंत्री और ब्लॉक प्रमुख के दबाव में नही हुई लकड़ी माफियाओं पर कार्यवाही.

प्रियेश शुक्ला की रिपोर्ट…

कोरोना महामारी में लॉकडाउन के चलते जहां जनपद की गलियां चौक चौबारे और गाँव-गाँव सन्नाटा पसरा हुआ है, पूरा प्रशासनिक अमला कोरोना योद्धा के रूप में जंग लड़ रहा है। ऐसे में रुद्रपुर क्षेत्र के राप्ती नदी के किनारे बने बंधे लकड़ी माफियाओं के लिए मुनाफ़े का बाज़ार बना हुआ है। थाना मदनपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले केवटलिया बन्धे पर लकड़ी माफियाओं की सक्रियता दिन दुगुनी बढ़ती ही जा रही है, बंधे पर लगे कीमती हरे पेड़ो को लकड़ी माफ़िया ख़ाकी और खादी की सरपरस्ती में अंधाधुंध काट रहे है। जिसके चलते राप्ती के किनारे बने बंधो से हरियाली गायब होती जा रही है। इसका ख़ामियाजा हर साल बाढ़ के रूप में भुगतना पड़ता है क्यो की हरे पेड़ो के कटने के चलते बंधे कमजोर हो गए है और जैसे ही पानी का दवाब दबाव बढ़ता है बंधे के टूटने का खतरा मँडराने लगता है। जब कि सरकार करोड़ो रूपये बंधे के संरक्षण के लिए पैधारोपण पर हर साल खर्च करती है।

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बताते चले कि पांच दिन पूर्व केवटलिया निवासी चंद्रभान सिंह ने वन विभाग को यह सूचना दी गई थी कि राप्ती नदी के केवटलिया बंधे पर गाँव के ही लकड़ी माफ़िया छेदी सिंह द्वारा अपने लोगो द्वारा भारी मात्रा में अबैध रूप से चोरी छिपे कीमती हरे पेड़ो का कई दिनों से कटान किया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद भी वन विभाग द्वारा स्वतः संज्ञान में कोई विभागीय कार्यवाही लकड़ी माफियाओं पर नही की गई।

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जब शिकायतकर्ता द्वारा हरे पेड़ो के अबैध कटान की शिकायत जिलाधिकारी से की गई तो जिलाधिकारी के आदेश पर वन विभाग हरकत में आया और कार्यवाही के नाम पर लकड़ी माफियाओं के ऊपर खानापूर्ति करते हुए वन दरोग़ा ने प्रदेश सरकार के मंत्री और एक ब्लॉक प्रमुख के सिफारिशों का हवाला देते हुए लकड़ी माफ़िया के सम्मान को बचाते हुए मौके पर सिर्फ काटी गई लकड़ी की तीन बोटो की बरामदगी दिखाया गया। जब कि काटे गए हरे बबूल के पेड़ के तने की मोटाई 165 सेमी. मौके पर पहुँचे विभागीय अधिकारियों द्वारा नापी गई थी। बाकी लकड़ी का कीमती हिस्सा वन दरोगा ने लकड़ी माफ़िया को ही सुपुर्द कर दी गई। जबकि पूरी लकड़ी वन विभाग की संपत्ति थी जिसे वन दरोगा बरामद कर के पहुँचे थे। पूरी लकड़ी की बरामदगी न होने के चलते शिकायतकर्ता द्वारा जब वन दरोगा से कारण पूछा गया तो वन दरोगा शिकायतकर्ता को ही वर्दी की हेकड़ी दिखाते हुए फोन पर घुड़की देने लगा । और अपनी मनमर्जी का रुआब दिखाकर देख लेने की बात कह दी।

मंत्री और ब्लॉक प्रमुख की क्या है भूमिका ?

राप्ती बंधे पर लकड़ी माफियाओं द्वारा अबैध रूप से हरे पेड़ो के हो रहे कटान के बावजूद शिकायतकर्ता ने जब कार्यवाही की बात पूछी तो वन दरोग़ा द्वरा यह साफ शब्दों में कहते हुए सुना जा सकता है कि पूरी लकड़ी इस लिए बरामद नही की गई कि मंत्री विधायक और ब्लॉक प्रमुख का फोन आया था हमारे पास, उनके दरवाजे का सम्मान देखते हुए इस तरह की कार्यवाही की गई है। वन दरोग़ा के इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि खाकी और खादी की सरपरस्ती में लकड़ी माफ़िया चांदी काट रहे है। और राप्ती बन्धे की हरियाली गायब होती जा रही है।

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जिम्मेदारों पर होगी कार्यवाही- डीएफओ

अवैध कटान से संबंधित मामले में जब विभागीय जिम्मेदारों की संलिप्तता और हीलाहवाली को लेकर डीएफओ देवरिया से पूछा गया तो इनका कहना था कि अगर मौके से पूरी लकड़ी बरामद नही की गई है तो संलिप्त लोगो के ऊपर कठोर विभागीय कार्यवाही की जाएगी। जितनी भी लकड़ी काटी गई है उसके हिसाब से ही मुक़दमा कर जुर्माना वसूला किया जाएगा। अन्यथा अग्रिम कार्यवाही के लिए न्यायालय भेज दिया जाएगा। अभी पूरे मामले की जांच कर कार्यवाही की जाएगी।

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हाथी के दांत जैसी है वन विभाग की कार्यवाही।

जिस तरह से राप्ती के बंधो पर लकड़ी माफियाओं का बोलबाला बढ़ गया है और हरे पेड़ दिनरात काटे जा रहे है उसके हिसाब से वन विभाग की कार्यवाही हाथी की दांत की तरह है जो सिर्फ जुर्माने का खेल खेला जा रहा है और माफियाओं को कीमती लकड़ी लुटाई जा रही है। वन विभाग द्वारा मिली सूचना के अनुसार लकड़ी माफ़िया छेदी सिंह पुत्र दुख्खी सिंह निवासी केवटलिया पर धारा – 33 , 77 व 26 के अंतर्गत कार्यवाही की गई है। जब कि मामले की जांच अभी की जा रही है।


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पोल टॉक और PollTalk.In के सम्पादक संतोष कुमार पांडेय देश के कई शहरों में पत्रकारिता कर चुके हैं। ये शहर जो कार्यस्थल बने वाराणसी , लखनऊ, आगरा, देहरादून, नोएडा, जयपुर, बिहार, हैदराबाद, पानीपत, सतना में रहे हैं। इन संस्थानों में दी सेवाएं राजस्थान पत्रिका , दैनिक भास्कर, एग्रो भास्कर, हिन्दुस्थान, जनसन्देश न्यूज़ चैनल, जनसन्देश टाइम्स, ईटीवी भारत में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किये. राजनीति की सही जानकारी और कुछ रोचक इन्टरव्यू दिखाना प्राथमिकता है।

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