संतोष कुमार पांडेय। जयपुर
भारत का राजस्थान (RAJASTHAN THIRD FRONT) अकेला ऐसा राज्य हैं जहां पर पिछले 25 सालों से कोई भी सरकार लगातार दूसरी बार सत्ता में लौट नहीं पाई। हालांकि, सीएम के चेहरों में बहुत बदलाव नहीं हो सका है. कांग्रेस की तरफ से लगातार अशोक गहलोत ने सीएम की कमान संभाली। तो भाजपा की तरफ से चेहरों में बदलाव किये है। भैरों सिंह शेखावत, वसुंधरा राजे और अब भजनलाल शर्मा को कमान दी गई है। भाजपा ने यहां पर कई बदलाव किया।
किसी एक नेता के पास अब सत्ता की पूरी चाबी नहीं देने की तैयारी है। कांग्रेस भी आने वाले दिनों में कई बदलाव कर सकती है। राजस्थान में जहां पिछले 25 सालों से किसी भी दल की सरकार लगातार सत्ता में लौट नहीं पा रही है। वहीँ, गठबंधन की राजनीति और छोटे दल भी जोर लगा नहीं पा रहे हैं। कुछ ने ताकत दिखाई लेकिन वो फेल रहे। जानिए क्या है उसके पीछे की कहानी ?
जातीय समीकरण और उनकी स्थिति
राजस्थान को अगर जातीय समीकरण के हिसाब से देखें तो बहुत विविधिता है। या यूँ कह लें कि कई पॉकेट में बंटा हुआ है। करीब आठ करोड़ आबादी वाले राजस्थान में 200 विधानसभा और 25 लोकसभा की सीटें हैं। राजस्थान में राज्यसभा की कुल 10 सीटें हैं। राजस्थान में ऐसी कोई एक जाति या समुदाय नहीं है जो पूरे राज्य तक फैली हुई हो। हर क्षेत्र में एक बड़ा नेता है। फिर भी भाजपा और कांग्रेस के आलवा दूसरे दल अस्तित्व में नहीं आ सके।
अब शेखावटी खासकर नागौर, बांगड़ ( डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, उदयपुर ) में छोटे दलों के समर्थन में है। हालांकि, इन्हे भी बड़ी स्वीकार्यता नहीं मिल रही है। बावजूद उसके ये छोटे दल काफी मेहनत कर रहे हैं कि सरकार में कैसे शामिल हुआ जाय। इसके लिए पूरा प्रयास जारी है।
बसपा, आप, वामदल सबको मिली हार
राजस्थान में बसपा (बहुजन समाज पार्टी ), आप (आम आदमी पार्टी ) और वाम दल ने खूब ताकत दिखाई है। लेकिन राजस्थान में इन्हे बहुत सफलता नहीं मिली है। जबकि, बसपा को सात विधानसभा सीटों ( RAJASTHAN THIRD FRONT) पर जीत मिल चुकी है। बसपा का यहां पर जनाधार बढ़ा था। मगर, वो अब नेताओं पर जाकर टिक गया है। हालाँकि, बसपा के हर बार माहौल टाइट रहता है।
आम आदमी पार्टी ने राजस्थान में पूरी ताकत झोंकी थी लेकिन किसी एक भी विधानसभा सीट पर खाता नहीं खुला। यहां तक की किसी भी सीट पर फाइट भी नहीं कर पाई थी। वहीं, वाम दल को भी अब झटका लग रहा है। कामरेड भी कुछ बड़ा नहीं कर पा रहे हैं।
चुनाव बाद नहीं टिक पाते छोटे दल
राजस्थान में चुनाव के बाद छोटे दलों में खलबली मच जाती है। या तो उनके प्रमुख नेता दूसरा दल बना लेते हैं। दूसरे दल में चले जाते है। इन्हीं आदतों की वह से जनता भी उन्हें दूसरे या अगले चुनाव में सपोर्ट नहीं करती है। राजस्थान ( RAJASTHAN THIRD FRONT) में समय समय पर कई दिग्गज नेताओं ने दल बनाये लेकिन वो सफल नहीं रहे। जबकि, उन्हें पहली बार में ही कई सीटों पर सफलता मिली लेकिन दूसरी बार उन्हें क्लीन बोल्ड होना भी पड़ा है। अभी तक यही रहा है कि चुनाव बाद छोटे दल टिक नहीं पाते हैं।