संतोष कुमार पांडेय। जयपुर
राजस्थान में नए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ( Rajasthan Congress New Pcc Chief ) के लिए अभी पेंच फंसा हुआ है। क्योंकि, जातीय समीकरण फिट नहीं बैठ पा रहा है। अभी कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व जिस तरह से ओबीसी, एससी और अल्पसंख्यक को लेकर आगे बढ़ रहा है। उस हिसाब से राजस्थान में कांग्रेस फिट बैठ रही है। मगर, आगे के लिए परेशानी दिख रही है। चूंकि, वर्तमान अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा का कार्यकाल अभी विस्तार पर चल रहा है। विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव और उपचुनाव डोटासरा के नेतृत्व में लड़ा गया। अब यहां पर युवा नए नेतृत्व की मांग कर रहा है। इसलिए दिल्ली तक भाग दौड़ जारी है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली ने पार्टी में अपना बड़ा कद बना लिया है। इसलिए नेता प्रतिपक्ष नहीं बल्कि प्रदेश अध्यक्ष के बदलने की पूरी संभवाना है। ऐसे में जातीय समीकरण ऐसा बैठा है कि सचिन पायलट के अलावा किसी अन्य चेहरे पर चर्चा नहीं हो पा रही है। अभी भी राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट का गुट बेहद मजबूत है।
जाट या कोई अन्य
राजस्थान में जब कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में गोविन्द सिंह डोटासरा का कार्यकाल बढ़ाया गया तब महिला कांग्रेस में किसी दूसरी जाति को साधने की बात सामने आई थी। लेकिन अब सारिका सिंह को महिला का अध्यक्ष बनाया गया है। इसलिए महिला मोर्चे में जाट आने से कई मोर्चे में बदलाव की कोशिश जारी है। प्रदेश अध्यक्ष के (Rajasthan Congress new pcc chief) पर क्या किसी ओबीसी से यादव को लाया जाएगा या गुर्जर को जगह मिलेगी। ऐसे में जयपुर की शाहपुरा से विधायक मनीष यादव, सचिन पायलट, अशोक चांदना के नाम सामने आ सकते हैं। इसके अलावा किसी कुमावत या सैनी पर दांव खेला जा सकता है। लेकिन जातीय समीकरण में पार्टी पूरी तरह से उलझ गई है।
इन दिग्गजों ने संभाली है कमान ?
अशोक गहलोत, हीरालाल देवपुरा, डॉ सीपी जोशी, परसराम मदेरणा, गिरिजा व्यास, बीडी कल्ला, सचिन पायलट के बाद अब गोविन्द सिंह गोडटसा के हाथ में पार्टी की कमान है। राजस्थान में कांग्रेस इस बार अध्यक्ष का चुनाव 60 साल की उम्र से कम व्यक्ति का होगा। इसके साथ ही वो (Rajasthan Congress New Pcc Chief) प्रदेश के लिए बड़ा चेहरा भी हो। ऐसे में उस व्यक्ति की तलाश जारी है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी किसी सांसद या विधायक में से किसी को मौका देगी।
अशोक और सचिन से परे कोई और चेहरा ?
राजस्थान में पार्टी के कुछ नेता चाहते हैं कि अब किसी तीसरे चेहरे पर पार्टी भरोसा जताये। क्योंकि सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच बहुत ही पुरानी सियासी अदावत चल रही है। जिसका नुकसान पार्टी के कई नेता उठा चुके है। अब पार्टी में लोग इससे निकलना चाह रहे हैं। इसलिए तटस्थ चेहरे को लाया जाए जो दोनों गुटों को साथ लेकर चल सके। लेकिन ऐसी शख्सियत खोजना जो ना सिर्फ संगठनात्मक रूप से मज़बूत हो, बल्कि जमीनी पकड़ भी रखता हो, बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
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दिल्ली से आलाकमान की रणनीति पर सबकी नजरें
राजस्थान की राजनीति को कांग्रेस हाईकमान बहुत बारीकी से देख रहा है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की टीम राजस्थान से फीडबैक ले रही है, लेकिन फैसला लेने में देरी हो रही है, जिससे कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं, इसका असर यहां की राजनीति पर भी पड़ रहा है। जिस पर यहां के नेताओं का भरोसा भी जीता जाएगा।
विधानसभा चुनाव से पहले ओवरहालिंग
राजस्थान में वर्ष 2028 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। उसे देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष का फैसला सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। अगर समय रहते कांग्रेस ने सही फैसला नहीं लिया, तो बीजेपी को मौका मिल सकता है राज्य में अपनी पकड़ और मज़बूत करने का प्रयास होगा। इसे दोनों तरफ ओवरहालिंग जैसा देखा जा रहा है। ऐसे में अब कोई बड़ा फैसला हो सकता है।