पोलटॉक नेटवर्क | देहरादून
उत्तराखंड में हुए त्रीस्तरीय पंचायत चुनाव (Uttarakhand Panchayat Election 2025 ) को सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा था। जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) की अगुवाई में हुए चुनाव में भाजपा ने जीत का चौका-छक्का लगाया है। हरिद्वार जिले के अलावा बाकी सभी 12 जिलों में से 10 पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। वहीँ, बड़े दावे कर रही कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीत पाई है। वहीं, नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव परिणाम का इंतजार है। दरअसल, इस त्रीस्तरीय पंचायत चुनाव के परिणाम को सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा था। लेकिन, जिस तरह से भाजपा की जीत हुई है। उसे सीएम पुष्कर सिंह धामी के काम से जोड़कर देखा जा रहा है। पढ़िए ये ख़ास रिपोर्ट।
क्या रही सीटों की स्थिति ?
उत्तराखंड में कुल 13 जिले हैं। जिनमें से 10 जिले में भाजपा का जिला पंचायत अध्यक्ष बना है। हरिद्वार में उत्तर प्रदेश के साथ ही पंचायत के चुनाव होते हैं।वहीँ वहीँ, नैनीताल में अभी तस्वीर साफ़ नहीं हो पाई है। प्रदेश के 89 क्षेत्र पंचायतों में प्रमुख के 63 पदों पर भी भाजपा ने कब्जा जमाया है। प्रमुख के 28 पद कांग्रेस व निर्दलीयों की झोली में गए हैं। भाजपा ने ग्राम प्रधान के 7499 पदों में से 85 प्रतिशत पदों पर पार्टी की जीत का दावा किया है।
सीएम धामी के काम और रणनीति का खेल ?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के काम पर जनता ने मुहर लगा दिया है। जबकि, कांग्रेस ने सीएम के काम पर कई सवाल उठाये थे। अब पंचायत चुनाव में मिली जीत को भाजपा ने सरकार के काम पर छोड़ दिया है। चूंकि, वर्ष 2027 में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इसलिए इस चुनाव पर सीएम के काम काज को जोड़कर देखा जा रहा था।
कांग्रेस के लिए संकट ?
उत्तराखंड के पंचायत चुनाव (Uttarakhand Panchayat Election 2025 ) में कांग्रेस की जो स्थिति रही है। उसे लेकर पार्टी में अब चिंतन का दौर चल रहा है। वहीँ जिला पंचायत देहरादून के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस का कब्जा हो गया है। चकराता विधायक प्रीतम सिंह के दांव पर प्रत्याशी सुखविंदर कौर ने भाजपा प्रत्याशी मधु चौहान को चार वोट से पराजित कर दिया। जिसे कांग्रेस मजबूती से देख रही है।
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नए चेहरों को मिली बड़ी ज़िम्मेदारी
उत्तराखंड में इस बार का पंचायत चुनाव बेहद ख़ास रहा है। क्योंकि इन पंचायत चुनावों में बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं ने जीत हासिल की है। खास बात यह रही कि कई जगहों पर उम्मीदवारों ने बिना किसी राजनीतिक समर्थन के जीत दर्ज की, जिससे साफ हुआ कि लोग अब जमीनी काम करने वालों को प्राथमिकता देने लगे हैं। ऐसे में इस बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरी ताकत झोंक दी थी।
मुख्य पदों के लिए हुई कड़ी टक्कर
पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) और जिला पंचायत सदस्य (Zila Panchayat) के पदों पर हुई चुनावी जंग में कई रोचक मुकाबले देखने को मिले। कुछ जगहों पर तो 1-2 वोटों के अंतर से परिणाम तय हुए, जो बताता है कि हर वोट की अहमियत कितनी बड़ी होती है। इसके साथ ही बड़े राजनीतिक परिवार के लोगों को लांच भी किया जाता है।इस बार कई नए चेहरे सामने आये हैं। पढ़े लिखे लोगों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसीलिए खुलकर नए लोग आये हैं। इस बार कई नए चेहरे सामने आये हैं। पढ़े लिखे लोगों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसीलिए खुलकर नए लोग आये हैं। महिला वोटरों की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कई इलाकों में महिलाओं ने लंबी कतारों में खड़े होकर वोट डाला और लोकतंत्र की मजबूती में अपना योगदान दिया।