पोलटॉक नेटवर्क। जयपुर
उपराष्ट्रपति (vice president of india rajasthan ) का चुनाव बेहद खास हो रहा है। उसके साथ पूरी सियासत के समीकरण तय किये जा रहे हैं। हानि और लाभ की बात समझाई जा रही है। हर कोई उसमें एक बड़ी राजनीति देख रहा है। लेकिन दो उपराष्ट्रपति ऐसे हुए कि उन्होंने अपने कार्यकाल के पूरा होने से पहले इस्तीफा दे दिया। उपराष्ट्रपति के चुनाव में उनकी चर्चा होती है। दोनों राजस्थान के ही रहने वाले। इसमें भी बेहद ख़ास बात कि दोनों नेता शेखावटी से संबंध रखते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत और जगदीप धनखड़ की। आइये जानते हैं उन दोनों नेताओं के बारे में आखिर क्यों दोनों ने दिए थे इस्तीफे।
भैरों सिंह शेखावत राजनीति के बड़े खिलाड़ी ?
राजस्थान में भैरों सिंह शेखावत (Bhairon Singh Shekhawat) को सम्मान में बाबोसा भी कहते हैं। उनका जन्म सीकर जिले के खाचरियावास गाँव में एक राजपूत परिवार में हुआ था। कुछ वर्षों तक पुलिस विभाग में काम किया और राजस्थान विधानसभा में चुनाव लड़ने के लिए पुलिस इंस्पेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद चुनाव और राजनीति से उनका लगाव जीवन पर्यन्त बना रहा। 1952 में वे रामगढ़ से विधायक चुने गए। 1957 में श्रीमाधोपुर से, 1962 और 1967 में वे किसनपोल से विधायक चुने गए। 1972 के चुनावों में वे हार गए लेकिन 1973 में वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए।
1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर रोहतक जेल भेज दिया गया। दातारामगढ़, निम्बाहेड़ा और आमेर से भी विधायक रहे। वे राजस्थान के 3 बार मुख्यमंत्री भी रहे। उसके बाद वो देश के उपराष्ट्रपति (vice president of india rajasthan ) भी रहे। लेकिन 21 जुलाई 2007 को प्रतिभा देवी सिंह पाटिल से राष्ट्रपति का चुनाव हारने के बाद उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे।
जगदीप धनखड़ वकालत से राजनीति तक ?
जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar ) देश के पूर्व उपराष्ट्रपति (vice president of india rajasthan ) रहे हैं। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रहे। राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव में जाट परिवार में हुआ था। वकालत के क्षेत्र में बड़ा नाम बनाया। उसके बाद राजनीति में भी हाथ आजमाया। 1989-91 के दौरान राजस्थान के झुंझुनू लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से जनता दल टिकट पर जीत दर्ज की। उसी बार केंद्र में मंत्री भी बने। चंद्रशेखर की सरकार में संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली थी।
कांग्रेस के टिकट पर 1993-98 के दौरान किशनगढ़ से विधायक भी रहे। राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन जयपुर के पूर्व अध्यक्ष भी रहे। 20 जुलाई 2019 को उनको पश्चिम बंगाल का गवर्नर नियुक्त किया गया। उसके बाद 16 जुलाई 2022 को भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने उन्हें भारत के उपराष्ट्रपति (vice president of india rajasthan ) के 2022 के चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया। लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले 21 जुलाई 2025 को इस्तीफ़ा दे दिया।
इनके इस्तीफों के मायने ?
भैरों सिंह शेखावत ने जब इस्तीफा दिया था तब वो राष्ट्रपति का चुनाव हार गए थे। इसलिए इस्तीफा दे दिया था। जबकि, जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर देर रात इस्तीफा दे दिया था। इन दोनों इस्तीफों के कई मायने निकाले गए हैं।