Peepal Baba : उन्होंने राजस्थान, उत्तराखंड, यूपी समेत कई राज्यों में धरती को बचाने की मुहिम के चलते हरियाली फैलाई है।
पोलटॉक नेटवर्क। जयपुर
पीपल बाबा (Peepal Baba ) उर्फ स्वामी प्रेम परिवर्तन ने लगभग पांच दशक तक जमीनी स्तर पर काम करके 2.70 लाख हेक्टेयर में पेड़ लगाकर वनस्पति को पुनर्स्थापित किया और ढाई करोड़ पेड़ लगाए। अब वह अपने अनुभवों को किताब के जरिए लोगों के सामने लाए हैं। उन्होंने राजस्थान, उत्तराखंड, यूपी समेत कई राज्यों में धरती को बचाने की मुहिम के चलते हरियाली फैलाई है। उन्होंने राजस्थान के जयपुर, उदयपुर, बड़गांव और जोधपुर में 7.5 लाख पौधे लगाए हैं।
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उनका कहना है कि पीपल के पत्ते की अपनी एक अलग ही खुशबू होती है। आयुर्वेद में पीपल के पत्तों का पाउडर अस्थमा के लिए और इसका काढ़ा हृदय रोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मराठवाड़ा में लोग नीम को बहुत पसंद करते थे, इसलिए मैंने उनकी गलियों को नीम से भर दिया। राजस्थान और गुजरात में लोग अरावली की कठोर प्रजातियां चाहते थे, जैसे लसोड़ा, चामरोड़, बहेड़ा, निर्गुंडी, वज्रदंती, मेहंदी, करौंदा।
उनका कहना है कि अगर आप उस छाया के मूल्य का आकलन करेंगे, तो हैरान रह जाएंगे। एक छायादार पेड़ की छांव से एक विक्रेता को प्रतिदिन का किराया लगभग 200 रुपये प्रतिदिन देने से मुक्ति मिल जाती है। इस तरह सालाना करीब 70,000 रुपये की बचत होती है।
कोरोना काल में भी वह और उनकी टीम पौधों को पानी देते थे। पीपल बाबा (Peepal Baba) बताते हैं कि नानी की बदौलत उनका उत्तराखंड के जंगलों, कॉर्बेट, राजाजी, हरिद्वार, ऋषिकेश, नरेंद्र नगर, टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और अल्मोड़ा से परिचय हुआ। उनके छोटे परिवार का तबादला हिमाचल प्रदेश के डलहौजी में हो गया। कैंब्रियन हॉल स्कूल उनकी पहली औपचारिक कक्षा बनी। उससे पहले उन्होंने कोलकाता, डलहौजी और चंडीगढ़ में एक-एक साल पढ़ाई की थी।
उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को एक किताब ‘पीपल की छांव’ में उतारा है। यह चर्चित किताब पेंग्विन प्रकाशन के द्वारा लॉन्च की जा रही है और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजन आदि पर मिलेगी। उनका कहना है कि पर्यावरणीय परिवर्तन केवल संस्थानों या नीतियों से शुरू नहीं होता, बल्कि यह साधारण नागरिकों से शुरू होता है, जो कार्य करने का निर्णय लेते हैं।

