जयपुर | पोलटॉक नेटवर्क
राजस्थान की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कोटा उत्तर से पूर्व विधायक प्रह्लाद गुंजल (ex mla prahlad gunjal) की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में संभावित वापसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मंत्री शांति धारीवाल एक अहम कारण बनते नजर आ रहे हैं।
हालांकि, अभी तक प्रह्लाद गुंजल (ex mla prahlad gunjal) या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक अंदरखाने में बातचीत का दौर चल रहा है।
क्यों चर्चा में है प्रह्लाद गुंजल की वापसी?
प्रह्लाद गुंजल (ex mla prahlad gunjal) लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे हैं और कोटा की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। पिछले विधानसभा चुनावों से पहले वे कांग्रेस में शामिल हुए थे, लेकिन चुनावी परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे। इसके बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं। अब लोकसभा चुनावों और आगामी नगर निकाय व विधानसभा समीकरणों को देखते हुए भाजपा संगठन कोटा में अपनी जमीनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है, ऐसे में गुंजल की वापसी को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
शांति धारीवाल कैसे बने कारण?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कोटा की राजनीति में शांति धारीवाल का दबदबा लगातार बढ़ा है। कांग्रेस संगठन और प्रशासनिक फैसलों में उनकी भूमिका प्रभावशाली मानी जाती है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस में रहते हुए प्रह्लाद गुंजल को अपेक्षित राजनीतिक स्पेस नहीं मिल पाया। कोटा की राजनीति में धारीवाल बनाम गुंजल की अदृश्य खींचतान की चर्चा लंबे समय से रही है। कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन पूरी तरह धारीवाल के पक्ष में झुका हुआ है इन परिस्थितियों में गुंजल के लिए कांग्रेस में भविष्य सीमित नजर आ रहा है।
भाजपा को क्या होगा फायदा?
यदि प्रह्लाद गुंजल भाजपा में लौटते हैं तो पार्टी को कई स्तरों पर लाभ मिल सकता है। कोटा उत्तर और आसपास के क्षेत्रों में मजबूत स्थानीय चेहरा। पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह बन रहा है। शांति धारीवाल के प्रभाव क्षेत्र में सेंध। आगामी चुनावों में सीधा मुकाबला आसान। भाजपा सूत्रों का मानना है कि गुंजल की वापसी से संगठनात्मक संतुलन मजबूत होगा।
क्या कहती है कांग्रेस?
कांग्रेस खेमे में फिलहाल इस मुद्दे पर चुप्पी साधी गई है। पार्टी के स्थानीय नेताओं का कहना है कि “यह केवल अफवाहें हैं”, लेकिन अंदरूनी तौर पर बेचैनी से इनकार नहीं किया जा सकता।
अभी क्या है स्थिति?
कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं लेकिन अंदरखाने संवाद की चर्चा तेज बताई जा रही है। कोटा की राजनीति में बढ़ता तनाव लेकिन दोनों दलों की रणनीतिक निगाहें बनी हुई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि प्रह्लाद गुंजल का रुख स्पष्ट होता है, तो कोटा ही नहीं, पूरे हाड़ौती क्षेत्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

