पोलटॉक नेटवर्क | जयपुर
राजस्थान की राजनीति (Parivarvad In Rajasthan Politics) में परिवारवाद कूट-कूटकर भरा है। पंचायत से नगरीय और विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा तक इनका बोलबाला है। राजस्थान में लोकसभा की कुल 25 सीटें हैं। जिनमें से तीन अनुसूचित जनजाति (एसटी), तीन अनुसूचित जाति ( एससी) के लिए आरक्षित हैं, बाकी सामान्य वर्ग के लिए हैं। मगर, राजस्थान की लोकसभा सीटों पर परिवारवाद (Parivarvad In Rajasthan Politics) का बोलबाला है।
अगर आंकड़ों की देखें तो 25 में से कुल 8 सांसद बड़े परिवारवाद से आते हैं। जिनके पिता या पति विधायक या सांसद रहे है। जिनका यहां की राजनीति में सिक्का चलता था। इतना ही नहीं इसमें कई तो राजघराने के लोग भी शामिल है। यूँ देखिये तो लगभग 40 प्रतिशत सदस्य परिवारवाद से है। पोलटॉक की ‘राजनीति में परिवारवाद’ की सीरीज की दूसरी कड़ी में पढ़े ये ख़ास रिपोर्ट सिर्फ पोलटॉक पर।
राजस्थान के परिवारवाद वाले सांसद
दरअसल, इस बार राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों में से भाजपा को 14 सीटों पर ही जीत मिल पाई. जबकि 11 पर विपक्ष को जीत मिली। कांग्रेस और भाजपा की तरफ कई दिग्गजों को मैदान में उतारा गया था। वो तो कुछ परिवारवाद वाले चुनाव हार गए। बड़ी संख्या में परिवारवाद सांसद बन चुके होते। जयपुर से मंजू शर्मा भाजपा की सांसद हैं। जिनके पिता भंवरलाल शर्मा राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री भी रहे। भाजपा के कई बार के विधायक रहे है।
नागौर से आरएलपी के सासंद हनुमान बेनीवाल के पिता राजस्थान के दो बार विधायक रहे। चुरुं से कांग्रेस के राहुल कस्वां तीसरी बार सांसद बने हैं। जिनके पिता कई बार सांसद और माता मंत्री रही हैं। झुंझुनूं से कांग्रेस के सांसद बृजेन्द्र ओला के पिता शीशराम ओला कई बार सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे। श्रीगंगानगर से कांग्रेस सांसद कुलदीप इंदौरा के पिता हीरालाल इंदौरा कई बार विधायक और मंत्री रहे।
झालावाड़-बारां से भाजपा सांसद दुष्यंत सिंह पांचवीं बार के सांसद हैं। उनकी मां वसुंधरा राजे राजस्थान की दो बार सीएम और केंद्रीय मंत्री रहीं हैं। टोंक-सवाईमधोपुर से कांग्रेस सांसद हरीश मीणा के भाई नमो नारायण मीणा केंद्रीय मंत्री रहे। राजसमंद से भाजपा की सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ के पति विश्वराज मेवाड़ राजस्थान के विधायक हैं। वो तो इन्हे जनता ने नकार दिया था।जयपुर शहर से पूर्व सीएम भैरोंसिंह शेखावत के भतीजे प्रताप सिंह खाचरियावास को लोगों ने हरा दिया। जालोर से अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को लोगों ने हरा दिया। नागौर से मिर्धा परिवार की ज्योति मिर्धा को हार का सामना करना पड़ा।
इनका भी सामान्य बैकग्राउंड नहीं
जयपुर ग्रामीण से भाजपा के सांसद राव राजेंद्र सिंह राजपरिवार (Parivarvad In Rajasthan Politics) से है। बीकानेर से भाजपा सांसद अर्जुनराम आईएएस रहे हैं। उदयपुर से भाजपा के सांसद मन्नालाल रावत राजस्थान की परिवहन सेवा से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ा। वहीं, दौसा से कांग्रेस के सांसद मुरारी मीणा कई बार विधायक और मंत्री रहे। बांसवाड़ा-डूंगरपुर से बाप के सांसद राजकुमार रोत दो बार विधायक रह चुके थे। कोटा-बूंदी से भाजपा के सांसद ओम बिड़ला कई बार विधायक और सांसद रह चुके हैं। करौली-धौलपुर से कांग्रेस सांसद भजनलाल जाट इसके पहले कई बार विधायक और मंत्री थे। अजमेर से सांसद भागीरथ चौधरी कई बार विधायक और सांसद रह चुके हैं।सीकर से सांसद अमरा राम कई बार विधायक रहे हैं।