Rajasthan Politics: एक बार फिर जासूसी की ‘एंट्री’, दो कैमरे बने बवाल, खड़ा हुआ नया ‘बखेड़ा’

Publish On:September 11, 2025
Rajasthan Politics.

संतोष कुमार पांडेय। जयपुर

राजस्थान (Rajasthan Politics) में एक बार फिर विधायकों के जासूसी कांड की ‘एंट्री’ हो गई है। विपक्ष इसे लेकर खूब हंगामा कर रहा है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tika Ram Jully) ने इस मामले को लेकर राज्यपाल से मुलाक़ात की है। इसमें विधानसभा में दो कैमरे ऐसे लगे हैं जिन्हे लेकर बवाल मचा हुआ है। नेता प्रतिपक्ष का आरोप है कि पहले से ही 9 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। दो और लगा दिए गए हैं। जिनका एक्सेस विधानसभा अध्यक्ष के रेस्ट रूम में है। जो युटुब पर नहीं जुड़ा है। इसके माध्यम से जासूसी हो रही है। हालांकि, इस मुद्दे को लेकर पक्ष और विपक्ष आमने सामने हैं। पढ़िए ये खास रिपोर्ट।

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नेता प्रतिपक्ष ने लगाया ये आरोप

टीकाराम जूली (Tika Ram Jully) का कहना है कि दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि विधानसभा की परंपराएं गौरवशाली रही हैं। और सदन के भीतर कोई भी सदस्य, चाहे वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का या फिर स्पीकर। अगर कोई बात कहते हैं तो बड़ी जिम्मेदारी से कहते हैं। उन्होंने कहा कि स्पीकर का यह कहना कि किसी की निजता का हनन नहीं हुआ है और न होगा। क्योंकि ये कैमरे जासूसी कर रहे हैं. जूली ने सरकार के मुख्य सचेतक और एक अन्य नेता द्वारा की गई टिप्पणियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी लगाया है।

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इमरजेंसी फंड का हुआ उपयोग ?

नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली (Tika Ram Jully) की माने तो ये कैमरे ‘कंप्लीट रिकॉर्डिंग सिस्टम’ के साथ लगाए गए हैं। जिनकी कीमत 18 लाख 46 हजार रुपये है। जूली ने यह भी दावा किया कि इन कैमरों का भुगतान विधानसभा के इमरजेंसी फंड से किया गया है। जो एक गंभीर अनियमितता है. उन्होंने स्पीकर के इस बयान पर भी सवाल उठाया कि कैमरों को सिर्फ ‘अपग्रेड’ किया गया है। जूली ने कहा कि ‘अपग्रेड’ करना और ‘अतिरिक्त कैमरे’ लगाना दो अलग-अलग बातें हैं।

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वसुंधरा राजे और भजनलाल की जासूसी

टीकाराम जूली ने कहा कि विधानसभा में इन दो कैमरों को लगाए जाने से पहले इंटिलिजेंस से अनुमति ली गई है या नहीं ? इसकी पूरी जानकारी सामने लाइ जाएगी। जब सदन स्थगित हो जाता है तब भी ये कैमरे चल रहे होते है। इनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग हो रही होती है। हम लोग क्या बात कर रहे हैं और कौन सी चर्चा में है। सब उन दो कैमरों से रिकॉर्ड होते हैं।

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद वसुंधरा राजे के साथ के विधायकों की रिकॉर्डिंग करवा रहे हो। जब उस दिन मुख्यमंत्री सदन में आये तो खुद वसुंधरा राजे से नहीं मिले। और जो विधायक वसुंधरा राजे के साथ बैठे थे उन्हें संदेश दिया गया कि वहां से उठिये और सदन में जाइये। ये सारी जासूसी का खेल चल रहे हैं।

F&Q

Q1: क्या कैमरे लगाना गैरकानूनी है?

नहीं, सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाए जा सकते हैं, लेकिन ऑडियो रिकॉर्डिंग करना और गोपनीय स्थानों की निगरानी करना निजता के अधिकार (Right to Privacy) का उल्लंघन हो सकता है।

Q2: इमरजेंसी फंड का इस्तेमाल क्यों विवाद में है?

इमरजेंसी फंड का उपयोग केवल आपातकालीन स्थितियों में और बजटीय अनुमोदन के बिना नहीं किया जा सकता। यदि बिना प्रक्रिया के खर्च किया गया, तो यह वित्तीय अनियमितता मानी जाएगी।

Q3: क्या स्पीकर को कैमरों का सीधा एक्सेस होना गलत है?

पारदर्शिता के लिए सीसीटीवी डेटा आमतौर पर एक नियंत्रित सिस्टम के माध्यम से मॉनिटर किया जाता है। यदि स्पीकर के रेस्ट रूम से गुप्त रूप से एक्सेस है, तो यह संदेहास्पद हो सकता है।

Q4: क्या पहले भी ऐसा कोई मामला हुआ है?

हां, भारतीय राजनीति में पहले भी जासूसी के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन यदि यह विधानसभा जैसे संवेदनशील स्थल में हो रहा है, तो यह गंभीर मामला है।